हिमाचल में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत 8,000 मीट्रिक टन से ज्यादा सेब की खरीद, पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल
13 अक्टूबर 2026, शिमला: हिमाचल में बाजार हस्तक्षेप योजना के तहत 8,000 मीट्रिक टन से ज्यादा सेब की खरीद, पूरी प्रक्रिया हुई डिजिटल – हिमाचल प्रदेश में बाजार हस्तक्षेप योजना (मार्केट इंटरवेंशन स्कीम, MIS) के तहत इस सीजन अब तक 8,000 मीट्रिक टन से ज्यादा सेब की सरकारी खरीद हो चुकी है। यह खरीद राज्य में 1 अगस्त 2026 से शुरू हुई थी और 31 अक्टूबर 2026 तक जारी रहेगी।
इस साल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि योजना का पूरा संचालन पहली बार पूरी तरह डिजिटल कर दिया गया है। राज्य भर में 213 सेब संग्रहण केंद्रों के जरिए हिमाचल प्रदेश मार्कफेड (HPMC) और हिमफेड (HIMFED) यह खरीद कर रहे हैं।
पंजीयन से भुगतान तक, सब कुछ एक पोर्टल पर
2026-27 सीजन से MIS का पूरा संचालन नए HPMIS प्लेटफॉर्म पर डिजिटल किया गया है। इसमें पंजीयन, खरीद, रसीद, परिवहन, प्रसंस्करण, निगरानी और भुगतान जैसे सभी चरण शामिल हैं। अब तक 17,000 से ज्यादा बागवान इस पोर्टल पर पंजीकृत हो चुके हैं।
संग्रहण केंद्र पर सेब की मात्रा डिजिटल तरीके से दर्ज होती है, और किसान के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर HPMIS की ओर से तुरंत रसीद भेज दी जाती है। कागज़ पर आधारित चालान, रिपोर्ट और रजिस्टर की जगह अब पूरी तरह डिजिटल दस्तावेज़ीकरण हो रहा है।
परिवहन और प्रसंस्करण की निगरानी भी रियल टाइम में होती है। प्रसंस्करण संयंत्र पारला, परवाणू और जदोल में स्थित हैं।
पंजीयन सिर्फ एक बार, भुगतान सीधे खाते में
बागवानों को पंजीयन सिर्फ एक बार कराना होता है। यह काम HPMIS मोबाइल ऐप, कॉमन सर्विस सेंटर (CSC), लोक मित्र केंद्र या अपनी ग्राम पंचायत के जरिए किया जा सकता है। पात्रता की जांच और योजना की शर्तें पूरी होने के बाद भुगतान सीधे बागवान के पंजीकृत बैंक खाते में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किया जाता है।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बागवानों से अपील की है कि वे HPMIS पोर्टल पर पंजीकरण कराएं, अपने क्षेत्र के तय सेब कलेक्शन सेंटर का ही इस्तेमाल करें, और अपना मोबाइल नंबर व बैंक खाते की जानकारी समय-समय पर अपडेट रखें, ताकि भुगतान में देरी न हो।
खरीद अभी एक महीने से ज्यादा समय तक जारी रहनी है, इसलिए जिन बागवानों ने अभी तक पोर्टल पर पंजीयन नहीं कराया है, उनके लिए अब भी मौका है। राज्य के बागवानी विभाग के मुताबिक डिजिटल व्यवस्था से किसानों को तौल और भुगतान में होने वाली पुरानी शिकायतों में कमी आने की उम्मीद है।
हिमाचल प्रदेश में सेब लाखों बागवान परिवारों की आजीविका का मुख्य आधार है, और बाजार में दाम गिरने पर बाजार हस्तक्षेप योजना ही किसानों को एक तय कीमत पर अपनी उपज बेचने का भरोसा देती है। जब मंडी में सेब के दाम उत्पादन लागत से नीचे चले जाते हैं, तभी सरकार इस योजना के तहत सीधी खरीद शुरू करती है।
पहले यह प्रक्रिया काफी हद तक कागज पर निर्भर थी, जिसमें तौल पर्ची, भुगतान और रिकॉर्ड रखने में समय लगता था और कई बार विवाद की स्थिति भी बनती थी। HPMIS पोर्टल के आने से अब हर कलेक्शन सेंटर पर हुई खरीद का डिजिटल रिकॉर्ड तुरंत बनता है, जिसे बागवान खुद अपने मोबाइल पर देख सकते हैं। इससे न सिर्फ पारदर्शिता बढ़ी है, बल्कि भुगतान में होने वाली देरी भी कम होने की उम्मीद जताई जा रही है।
213 कलेक्शन सेंटर और 17,000 से ज्यादा पंजीकृत बागवानों की मौजूदगी बताती है कि इस सीजन बड़ी संख्या में किसान इस डिजिटल व्यवस्था से जुड़ चुके हैं। आने वाले बरसों में इसी मॉडल को अन्य राज्यों में भी बागवानी उपज की सरकारी खरीद के लिए अपनाया जा सकता है, क्योंकि डिजिटल ट्रैकिंग से सरकार को भी यह पता चलता रहता है कि किस इलाके से कितनी खरीद हो रही है और भुगतान कहां तक पहुंचा।
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