राज्य कृषि समाचार (State News)

ग्वालियर जिले के किसानों को भी अब “ई-टोकन प्रणाली” से मिलेगा खाद  

30 दिसंबर 2025, ग्वालियर: ग्वालियर जिले के किसानों को भी अब “ई-टोकन प्रणाली” से मिलेगा खाद – ग्वालियर जिले के किसानो को भी अब राज्य शासन द्वारा लागू की गई ई-टोकन प्रणाली से खाद (रासायनिक उर्वरक) का वितरण होगा। “ई-विकास प्रणाली” के नाम से लागू हो रही खाद वितरण की इस व्यवस्था से किसानों को लम्बी-लम्बी कतारों में खड़े होने की जरूरत नहीं रहेगी। साथ ही बिचौलियों की भूमिका समाप्त होगी और कालाबाजारी पर प्रभावी अंकुश लगेगा।

इस व्यवस्था की यह भी खूबी है कि सरकार को उर्वरक की मांग तत्काल पता लग जायेगी और जरूरत के मुताबिक आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी। कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने कृषि, सहकारिता व विपणन संघ के अधिकारियों सहित जिले के सभी एसडीएम को प्रभावी ढंग से ई-टोकन प्रणाली व्यवस्था के तहत खाद वितरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

 गत दिनों  कलेक्ट्रेट में आयोजित हुई राजस्व अधिकारियों की बैठक में जिला विपणन अधिकारी द्वारा विस्तारपूर्वक ई-टोकन उर्वरक वितरण प्रणाली का विस्तार से प्रजेंटेशन दिया गया। साथ ही इसी कड़ी में 6 जनवरी को कृषि, ग्रामीण विकास, सहकारिता, जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक, विपणन संघ एवं एमपी एग्रो के अधिकारियो को प्रशिक्षित किया जायेगा। ई-टोकन उर्वरक वितरण व्यवस्था के तहत किसानों को खाद वितरित करने के लिये डिजिटल टोकन उपलब्ध कराया जायेगा। टोकन में किसान का नाम, पंजीयन क्रमांक, उर्वरक का प्रकार व मात्रा, वितरण केन्द्र एवं निर्धारित तिथि व समय अंकित रहेगा। यह टोकन एसएमएस, मोबाइल एप या वेब पोर्टल के माध्यम से प्राप्त किया जा सकेगा। ई-टोकन के आधार पर किसान भाई निर्धारित समय पर संबंधित वितरण केन्द्र से उर्वरक प्राप्त कर सकेंगे।

Advertisements
Advertisement
Advertisement

आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

Advertisement
Advertisement
Advertisements
Advertisement
Advertisement