नागौरी पान मेथी को मिला कानूनी अधिकार
भारत सरकार के पौध किस्म प्राधिकरण ने किया पंजीकृत
13 मार्च 2026, नागौर: नागौरी पान मेथी को मिला कानूनी अधिकार – राजस्थान के नागौर जिले के किसानों के लिए यह एक ऐतिहासिक और गर्व का क्षण है। भारत सरकार के पौध किस्म एवं कृषक अधिकार संरक्षण प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए) ने “नागौरी पान मेथी” के बीज किस्म को आधिकारिक रूप से किसानों की सामुदायिक किस्म (कम्युनिटी राइट्स) के रूप में पंजीकृत कर दिया है। यह जानकारी 02 फरवरी 2026 को प्रकाशित प्लांट वैरायटी जर्नल में दी गई है। इस पंजीकरण के बाद अब नागौर के किसान कानूनी रूप से नागौरी पान मेथी (पान मेथी) के असली मालिक माने जाएंगे। यह पहली बार है कि इस खास पान मेथी के बीजों को दुनिया में कानूनी बौद्धिक संपदा अधिकार मिला है। यह उन किसानों की सामूहिक नवाचार क्षमता, संरक्षण और परंपरागत ज्ञान को मान्यता देता है जिन्होंने पीढ़ियों से नागौर की शुष्क कृषि-जलवायु में इस विशिष्ट और उपेक्षित पौध आनुवंशिक संसाधन को संरक्षित और विकसित किया है।

किसानों को मिले कानूनी अधिकार: पौध किस्म एवं किसान अधिकार अधिनियम, 2001 के तहत नागौर के मुंडवा किसान समुदाय जिसका प्रतिनिधित्व महिला प्रधान श्रीमती गीता देवी, पंचायत समिति मुंडवा कर रही हैं, को नागौरी पान मेथी का वैधानिक संरक्षक और अधिकारधारी माना गया है। जब संयुक्त राष्ट्र खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) द्वारा वर्ष 2026 को अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष के रूप में मनाया जा रहा है, ऐसे समय में किसानों को सामुदायिक अधिकार प्रदान कर पौध किस्म एवं किसान अधिकार प्राधिकरण (पीपीवीएफआरए) ने नागौरी पान मेथी पर किसानों, विशेषकर महिला किसानों को अधिकार देकर महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है।
इस पंजीकरण से किसानों को लाभ : अब कोई भी बाहरी व्यक्ति या कंपनी नागौरी पान मेथी का नाम या बीज गलत तरीके से इस्तेमाल नहीं कर सकेगी। दुनिया भर में नागौरी पान मेथी के बीजो से उत्पादित खुशबूदार पान मैथी को एक नए ब्रांड में स्थापित करने में मदद मिलेगी। यह पंजीकरण नागौरी पान मेथी को भौगोलिक पहचान (जीआई टैग) दिलाने की दिशा में मजबूत कदम है, जिससे किसानों को बेहतर दाम और बाजार में पहचान मिलेगी।
साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी) के डॉ. भागीरथ चौधरी ने कहा, “पौध किस्म एवं किसान अधिकार प्राधिकरण द्वारा ‘नागौरी पान मेथी’ का पंजीकरण कर नागौर के किसानों की पीढ़ियों की कड़ी मेहनत को एक ऐतिहासिक पहचान दी है। नागौर के किसान समुदाय ने नागौरी मेथी पर अपने बौद्धिक सम्पदा अधिकार का पेटेंट मिल गया है।”
भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के बायोटेक किसान हब और नाबार्ड पोषित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र के सहयोग से, नागौरी मेथी को पिछले वर्ष मसाला बोर्ड के अनुसूची-I में शामिल किया गया था, जिससे नागौरी मेथी को मसाला श्रेणी में स्थान मिला और निर्यात के रास्ते खुले। डॉ. चौधरी ने आगे कहा कि “कसूरी मेथी”नाम से लंबे समय से चली आ रही गलत पहचान को अब ठीक कर दिया गया है, जिससे नागौरी मेथी को घरेलू और वैश्विक बाजार में उसकी असली पहचान मिलेगी।
नागौरी पान मेथी इतनी खास क्यों है? : नागौरी पान मेथी सिर्फ नागौर जिले में ही उगाई जाती है और करीब 7,000 हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में इसकी खेती होती है। यह मुख्य रूप से मूंडवा, नागौर, मेड़ता, जायल, डेगाना और खींवसर क्षेत्रों में पैदा होती है। नागौरी पान मेथी एक बहु-कटाई (मल्टी-कटिंग) वाली पत्तेदार फसल है, जिसकी पत्तियों को धूप में सुखाकर बेचा जाता है। प्रत्येक कटाई में प्रति एकड़ लगभग 175 किलोग्राम सूखी पत्तियां प्राप्त होती हैं, जिससे किसानों को हर दस दिन में लगभग ₹25,000 की आय होती है। एक सीज़न में औसतन दस कटिंग के आधार पर किसान प्रति एकड़ लगभग ₹2.5 लाख की कमाई करते हैं। इस प्रकार नागौरी पान मेथी देश की सबसे अधिक आय देने वाली फसलों में से एक बन गई है। वर्ष 2024-25 के सीजन में नागौर जिले के किसानों द्वारा लगभग 30,000 मीट्रिक टन नागौरी पान मेथी की सूखी पत्तियों का उत्पादन किया गया, जिससे किसानों को कुल मिलाकर लगभग ₹450 करोड़ की आय प्राप्त हुई।
नागौरी पान मेथी की विशेषताएँ : नागौरी पान मेथी की कई विशिष्ट विशेषताएं हैं , जो इसे अन्य मेथी किस्मों से अलग पहचान देती हैं। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी तेज और विशिष्ट खुशबू है, जो पत्तियों को सुखाने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहती है। इसके बीज आकार में छोटे होते हैं तथा इसकी फलियां हंसिया के आकार की होती हैं। सूखी पत्तियों में गहरा स्वाद और भरपूर सुगंध पाई जाती है, जो इसे मसालों और खाद्य पदार्थों में अत्यंत लोकप्रिय बनाती है। इसके अतिरिक्त नागौर क्षेत्र की विशिष्ट मिट्टी और अनुकूल जलवायु इस मेथी की गुणवत्ता को और भी विशेष बनाती है। यही कारण है कि नागौरी पान मेथी ने देश ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी अलग और विशिष्ट पहचान स्थापित की है।
यह उपलब्धि कैसे संभव हुई? : नागौरी पान मेथी किस्म को पंजीकृत कराने के लिए साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर, जोधपुर पिछले 4-5 सालों से इस पर फील्ड आधारित अनुसंधान किया और 25 जून 2024 को आवेदन के साथ बीज सामग्री को पौध किस्म प्राधिकरण में जमा कराई । इस मेथी की पहचान और वैज्ञानिक अध्ययन भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) की “बायोटेक किसान हब” परियोजना के तहत किया गया। इसमें आईसीएआर-राष्ट्रीय बीज मसाला अनुसंधान केंद्र, अजमेर और नाबार्ड-पोषित कृषि निर्यात सुविधा केंद्र का भी सहयोग रहा।
किसान बौद्धिक संपदा संरक्षण में एसएबीसी की भूमिका: नागौरी पान मेथी के पंजीकरण से पहले भी साउथ एशिया बायोटेक्नोलॉजी सेंटर (एसएबीसी) ने किसानों की नवाचार क्षमता और उनके अधिकारों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। एसएबीसी के प्रयासों से सिरोही जिले के किसान ईशाक अली द्वारा दशकों की मेहनत से विकसित सौंफ की किस्म “आबू सौंफ-440” को कानूनी मान्यता और बौद्धिक संपदा अधिकार दिलवाए गए। इसके साथ ही, एसएबीसी ने सिरोही में किसान के खेत पर राजस्थान का पहला “आबू सौंफ कम्युनिटी जीन बैंक” स्थापित करने में सहयोग दिया। इस पहल के माध्यम से किसानों को सौंफ की जैव विविधता के संरक्षण, उसके वैज्ञानिक उपयोग तथा उन्नत खेती की पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। ये उपलब्धियाँ इस बात का प्रमाण हैं कि राजस्थान के किसान अब केवल कृषि उत्पादक ही नहीं, बल्कि जैव विविधता के संरक्षक, नवाचारकर्ता और बीज प्रजनक के रूप में भी उभर कर सामने आ रहे हैं।
किसान-केंद्रित मॉडल: नागौरी पान मेथी का सामुदायिक किस्म के रूप में पंजीकरण का एक ऐसा राष्ट्रीय और वैश्विक मॉडल विकसित हो रहा है ,जिसमें परंपरागत किसान किस्मों को आधुनिक कानूनी ढांचे के माध्यम से संरक्षित किया जा सकता है, ताकि किसानो के उपज का अधिक मूल्य मिले और बीजो के व्यापार का लाभ किसानों के साथ साझा किया जा सके। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें : 9999851051 एवं info@sabc.asia
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