मध्यप्रदेश: पराली जलाना नुकसानदायक, कृषि विभाग ने फसल अवशेष क उपयोग और कमाई के तरीके किसानों को समझाए
24 मार्च 2026, भोपाल: मध्यप्रदेश: पराली जलाना नुकसानदायक, कृषि विभाग ने फसल अवशेष के उपयोग और कमाई के तरीके किसानों को समझाए – फसल कटाई के उपरांत खेत में छोड़े जाने वाले फसल अवशेषों को पराली अथवा नरवाई कहा जाता है। अगली फसल की तैयारी के लिए इन अवशेषों को कृषक आग लगा देते हैं जिससे मिट्टी प्रदूषण और वायु प्रदूषण होता है। इससे मिट्टी में उपस्थित रहने वाले मित्र कीट मर जाते हैं और प्रदूषण का प्रभाव मानवीय स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।
फसल अवशिष्ट जलाने से निकलने वाली विभिन्न प्रकार की गैस कई बीमारियां होती हैं। अत: कृषकों से आग्रह किया गया है कि वे फसल अवशिष्ट न जलायें। फसल अवशिष्ट प्रबंधन के लिए कई तरीके हैं और उनसे कई प्रकार के लाभ भी हैं। फसल अवशिष्ट से पशुओं के लिए भूसा, इको फ्रेंडली प्लेट एवं डिस्पोजल, पैकेजिंग इंडस्ट्री एवं बैग बनाने, कंप्रेस नेचुरल बायोगैस, प्लाईवुड उद्योग आदि में उपयोग किया जा सकता है।
एस्ट्रा रीपर कृषि यंत्र के माध्यम से गेहूं की फसल कटाई उपरांत खेत में छोड़ी गई फसल अवशिष्ट को यंत्र की सहायता से भूसा बनाकर पशुओं के आहार में उपयोग किया जा सकता है। वर्तमान में फसल अवशिष्ट से इको फ्रेंडली खाने के प्लेट एवं डिस्पोजल बनाने का व्यवसाय अपार संभावनाएं रखता है। फसल अवशिष्ट अब अतिरिक्त आय का जरिया बन सकती है। इसका उपयोग पैकेजिंग इंडस्ट्री, बायोडिग्रेडेबल बैग बनाने, सीएनजी बनाने, इंडस्ट्री में ईंधन के रूप में और प्लाईवुड उद्योग में किया जा रहा है।
कृषक फसल अपशिष्ट का उपयोग अब अवसर के रूप में कर सकते हैं। खेत से फसल अवशिष्ट को इकट्ठा करने के लिए बेलर कृषि यंत्र का उपयोग किया जाता है। यह बेलर मशीन खेत में पड़ी फसल अवशिष्ट को एकत्रित करती है, उसको कंप्रेस कर एक बंडल बना देती है, जिसे आसानी से विभिन्न उद्योगों तक पहुंचाया जा सकता है।
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