राज्य कृषि समाचार (State News)किसानों की सफलता की कहानी (Farmer Success Story)

काशी चमन भिंडी: किसानों के लिए आय बढ़ाने वाली नई किस्म की सफलता कहानी

22 दिसंबर 2024, भोपाल: काशी चमन भिंडी: किसानों के लिए आय बढ़ाने वाली नई किस्म की सफलता कहानी – भारत में भिंडी एक बेहद लोकप्रिय और पोषक तत्वों से भरपूर सब्जी है। यह विटामिन-सी, के और एंटीऑक्सीडेंट का अच्छा स्रोत है, जो सूजन रोकने, गंभीर बीमारियों का खतरा कम करने और हृदय एवं मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। भिंडी में मौजूद लेक्टिन नामक प्रोटीन कैंसर रोधी गुणों के लिए भी जाना जाता है।

हाल के वर्षों में, भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान (भाकृअनुप-आईआईवीआर), वाराणसी द्वारा विकसित भिंडी की किस्म ‘काशी चमन’ किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है। वर्ष 2019 में विकसित की गई यह किस्म गर्मी और बरसात दोनों मौसमों में उगाई जा सकती है और खतरनाक येलो वेन मोज़ेक वायरस (वाईवीएमवी) एवं ओकरा एनेशन लीफ कर्ल वायरस (ओईएलसीवी) जैसे रोगों के प्रति सहनशील है।

काशी चमन: एक नई उम्मीद

‘काशी चमन’ किस्म की उपज क्षमता अपने क्षेत्र में 21.66% अधिक है। यही कारण है कि यह उत्तर प्रदेश, बिहार और ओडिशा जैसे राज्यों में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। इस किस्म ने अब तक लगभग 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र को कवर कर लिया है।

श्री उपेंद्र सिंह पटेल की सफलता की कहानी

वाराणसी के आराजीलाइन ब्लॉक के बंगालीपुर गांव के किसान श्री उपेंद्र सिंह पटेल ने 10 जुलाई, 2021 को अपनी 0.3 एकड़ भूमि में ‘काशी चमन’ भिंडी के बीज बोए। उन्होंने संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा सुझाए गए वैज्ञानिक पैकेज और अनुशंसित उर्वरकों का इस्तेमाल किया।

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46 दिन बाद, 25 अगस्त, 2021 को भिंडी की पहली तुड़ाई हुई। इसके बाद हर 3-4 दिनों के अंतराल पर 35-40 किलोग्राम भिंडी की तुड़ाई होती रही। उन्होंने 90 दिनों की अवधि में कुल 19 तुड़ाई की, जिससे 668 किलोग्राम भिंडी का उत्पादन हुआ।

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उत्पादन और परिवहन लागत घटाने के बाद, श्री पटेल को 21,376 रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। इस सफलता ने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया, बल्कि गांव के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का काम किया।

क्यों खास है काशी चमन?

  1. रोग प्रतिरोधक क्षमता: येलो वेन मोज़ेक वायरस और ओकरा एनेशन लीफ कर्ल वायरस के प्रति सहनशील।
  2. मौसम के लिए अनुकूल: गर्मी और बरसात दोनों में खेती के लिए उपयुक्त।
  3. उच्च उपज क्षमता: पारंपरिक किस्मों की तुलना में अधिक उपज।
  4. आर्थिक लाभ: कम लागत में ज्यादा मुनाफा।

काशी चमन जैसी उन्नत किस्में किसानों की आय बढ़ाने और खेती को लाभकारी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। यह कहानी इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक खेती के तरीकों को अपनाकर किसान अपनी उपज और आमदनी को कई गुना बढ़ा सकते हैं।

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