झाबुआ: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: बूंद-बूंद से बनी समृद्धि की कहानी
01 अप्रैल 2026, झाबुआ: झाबुआ: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना: बूंद-बूंद से बनी समृद्धि की कहानी – जिला झाबुआ के विकासखंड राणापुर के छोटे से ग्राम डाबतलाई में रहने वाले कृषक श्री चैना रणजीत सिंगाड़ की कहानी आज बदलाव और प्रगति की मिसाल बन गई है। कभी सीमित संसाधनों और पारंपरिक खेती के कारण जहां उनकी मेहनत को उचित फल नहीं मिल पाता था, वहीं अब आधुनिक तकनीक ने उनकी किस्मत ही बदल दी है।
वर्ष 2024-25 में उन्होंने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत पोर्टेबल स्प्रिंकलर प्राप्त किया, जिसके लिए उन्हें ₹10,887 की अनुदान राशि मिली। यह स्प्रिंकलर उनके खेतों के लिए सिर्फ एक उपकरण नहीं, बल्कि नई उम्मीदों की शुरुआत साबित हुआ। योजना का लाभ लेने से पहले वे पारंपरिक खेती करते थे। सोयाबीन की फसल से उन्हें मात्र 4 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, जिसमें ₹6,000 की लागत के बाद कुल आय ₹13,000 और शुद्ध आय ₹7,000 ही रह जाती थी। इसी प्रकार गेहूं की फसल से 7.50 क्विंटल उत्पादन होता था, जिसमें ₹5,500 की लागत पर ₹17,500 की आय और ₹12,000 की शुद्ध कमाई होती थी। कुल मिलाकर मेहनत अधिक और लाभ सीमित था।
पोर्टेबल स्प्रिंकलर के उपयोग से सिंचाई की सुविधा बेहतर हुई और उन्होंने पारंपरिक फसलों के स्थान पर नगदी फसल भिंडी को अपनाया। परिणामस्वरूप उनकी आय में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई। पहली फसल में 50 क्विंटल भिंडी का उत्पादन हुआ, जिसमें ₹30,000 की लागत पर ₹1,05,000 की कुल आय और ₹75,000 की शुद्ध आय प्राप्त हुई। इसके बाद दूसरी फसल में उत्पादन बढ़कर 65 क्विंटल हो गया, जिसमें ₹32,000 की लागत पर ₹1,15,000 की कुल आय और ₹83,000 की शुद्ध आय हासिल हुई।
आज श्री चैना रणजीत सिंगाड़ की खेती न केवल अधिक उत्पादन दे रही है, बल्कि उन्हें आर्थिक रूप से भी मजबूत बना रही है। जहां पहले कुछ हजार रुपये की आय होती थी, वहीं अब वे एक फसल से ही कई गुना अधिक लाभ कमा रहे हैं। उनकी यह सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग, आधुनिक तकनीक का अपनाना और फसल चयन में बदलाव, किसानों की आय को कई गुना बढ़ा सकता है। श्री सिंगाड़ आज अपने क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए प्रेरणा बन चुके हैं और उनकी कहानी “कम संसाधनों में भी बड़े बदलाव” की एक जीवंत मिसाल है।
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