बेकसूर किसान भुगत रहे वसूली के बाद भी ब्याज की सज़ा

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12 मई 2022, इंदौर । बेकसूर किसान भुगत रहे वसूली के बाद भी ब्याज की सज़ा – सरकार कोई गलती करे तो उसे नज़र अंदाज़ कर दिया जाता है ,लेकिन उसकी सज़ा जनता को भुगतना पड़ती है। ऐसा ही एक मामला धार जिले की बदनावर तहसील के ग्राम मेहतपुरा का सामने आया है , जहां के 5 किसानों का गेहूं उपार्जन के बाद  सहकारी समिति द्वारा ऋण वसूली के तहत काटी गई राशि अब तक किसानों के खातों में जमा नहीं हुई है और इसका खामियाजा बेकसूर किसानों को वसूली के बाद भी ब्याज की सज़ा भुगतनी पड़ रही है। जिले का सहकारिता विभाग भी राज्य स्तर का मामला बता कर पल्ला झाड़ रहा है।

मेहतपुरा के पीड़ित किसान श्री जितेन्द्र पिता जगदीश सोनगरा ने कृषक जगत को बताया कि गत 4 अप्रैल को मैंने और मेरी मां लीला बाई ने  सहकारी समिति मनासा (धार ) के उपार्जन केंद्र पर समर्थन मूल्य पर क्रमशः 66.65 क्विंटल और 39.65 क्विंटल गेहूं बेचा था , जिसकी मूल राशि  1,34 ,299 और 73 ,245 रु में से क्रमशः 67,140 और 22050 रु की राशि ऋण के विरुद्ध सहकारी समिति द्वारा काट ली गई।  इसी तरह मेरे भाई वीरेन्द्र के  58.55 गेहूं  8 अप्रैल को इसी उपार्जन केंद्र पर बेचे थे जिसकी मूल राशि 1,17 ,978 में से ऋण के विरुद्ध 58 ,980 रु की राशि काट ली  गई और समिति ने अपने अभिलेख में दर्ज़ भी कर लिया , लेकिन उक्त राशि अभी तक सहकारी समिति के ऋण खाते में जमा नहीं  हुई है और हमें बाजार से ब्याज पर राशि उठाकर समिति के  ब्याज का भुगतान करना पड़ रहा है , जबकि अनाज खरीदी पावती में स्पष्ट उल्लेखित है कि खरीदी गई अनाज की मात्रा का स्वीकृति पत्रक जारी होने के 7 दिन के भीतर आपके बैंक खाते में भुगतान की राशि भेज दी जाएगी।

यहाँ गौर करने वाली  बात यह है कि सरकार ने ऋण वसूली की तारीख 15 अप्रैल निर्धारित की थी ,जबकि किसानों ने  15 अप्रैल  के पहले ही गेहूं बेच दिया था। शेष राशि पाने के लिए भी उन्हें सीएम हेल्प लाइन में शिकायत करना पड़ी तब जाकर उनका  भुगतान हुआ। सरकार की गलती का खामियाजा बेकसूरों को ब्याज के रूप में भुगतना पड़ रहा है । ऐसी ही समस्या सिलोदाबुजुर्ग के श्री सोहन पिता तेजकरण और श्री जीवन पिता तेजकरण के सामने भी आई है। उनके भी करीब 70  -70  क्विंटल गेहूं उपार्जन केंद्र द्वारा खरीदी के बाद ऋण की राशि काट ली गई ,लेकिन वह राशि उनके ऋण खाते में जमा नहीं हुई। जिले में ऐसे और भी कई किसान होंगे जो इस समस्या से परेशान होंगे।  इस बारे में मनासा सहकारी समिति के सचिव श्री राधेश्याम यादव का कहना था कि उक्त राशि हमारे ऋण खाते में जमा नहीं हुई  है इस कारण  ऋण खाता अभी भी जमा नहीं होना बता रहा है , इसलिए ब्याज जमा करवाया जा रहा है।

दूसरी ओर श्री परमानन्द गोडरिया, उपायुक्त सहकारिता , धार ने कृषक जगत को बताया कि शासन ने 15 अप्रैल तक उपार्जित गेहूं -चना की रकम  में से ऋण राशि जमा करने पर ब्याज से मुक्ति दी गई थी। इस मामले में किसी की भी गलती नहीं है। तकनीकी त्रुटि पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा। इस बारे में विभाग के प्रिंसिपल सेक्रेटरी से चर्चा करें।    

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