यूपी के किसानों को बताए खरपतवार नियंत्रण के लिए अचूक तरीके
29 नवंबर 2025, भोपाल: यूपी के किसानों को बताए खरपतवार नियंत्रण के लिए अचूक तरीके – यूपी के किसानों को खरपतवार नियंत्रण के लिए अचूक तरीके बताए गए है और कहा गया है कि वे इन तरीकों को अपनाए ताकि नुकसानी से बचा जा सके. ये तरीके और दवाएं तथा इस्तेमाल के तरीके कृषि विभाग ने बताए है.
रबी सीजन में बोई जाने वाली गेहूं की फसल में विभिन्न प्रकार के खरपतवारों के चलते पैदावार 25 फीसदी तक की कमी हो जाती है. खरपतवारों का समय पर प्रबंधन करके उत्पादन क्षति को कम किया जा सकता है. उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कृषि विभाग के सभी राजकीय बीज भंडारों पर गेहूं में प्रयोग होने वाली खरपतवारनाशी 50 फीसदी अनुदान पर उपलब्ध है.
गेहूं में खरपतवार का जमाव से पूर्व नियंत्रण हेतु पेंडिमिथिलीन 30% ई.सी. की 3.3 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई के 3 दिन के अंदर फ्लैट नाजिल से छिड़काव करना चाहिए. छिड़काव करते समय यह ध्यान रखा जाए कि आगे आगे छिड़काव कर पीछे की ओर बढ़ते रहे जिससे कि छिड़के गए खरपतवारनाशी की परत टूटने ना पाए.
गेहूं में खरपतवार नियंत्रण जमाव के 20 से 25 दिन बाद प्रयोग करने हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 75% डब्लू.पी. की 33 ग्राम एवं मेटसल्फ्यूरॉन इथाइल की 20 ग्राम को एक में मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग कर सकरी एवं चौड़ी पत्ती दोनों प्रकार के खरपतवारों का नियंत्रण किया जाता है. मैट्रीब्यूजिन 70% डब्लू.पी. 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर का बुवाई के 20 से 25 दिन बाद किसानों को इस्तेमाल करना चाहिए. अगर उनके खेत में गाजर घास या मोथा और दूब जैसे सघन खरपतवार हो रहे हैं. यह दवा इन खरपतवारों को नष्ट करने में मददगार है. गेहूं की फसल में खरपतवार नियंत्रित करने के लिए शुरुआती 20–25 दिनों में खेत की नियमित निगरानी सबसे महत्वपूर्ण होती है. बुवाई के तुरंत बाद सिंचाई के 2–3 दिन भीतर पुआल मल्चिंग या हल्की कोड़ाई करने से खरपतवार अंकुरण कम होता है. वहीं, नीम की पत्ती या नीम केक को बुवाई के समय खेत में मिलाने से कई तरह के खरपतवारों का नियंत्रण हो जाता है. इसके अलावा किसान समय पर निराई-गुड़ाई करके भी खरपतवारों से छुटकारा पा सकते हैं.
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