नरवाई जलाने पर छिंदवाड़ा जिले में चार एफआईआर दर्ज
03 अप्रैल 2026, छिन्दवाड़ा: नरवाई जलाने पर छिंदवाड़ा जिले में चार एफआईआर दर्ज – जिले में गेहूं कटाई का कार्य तेजी से जारी है। कटाई के बाद खेतों में बचे डंठल (नरवाई) के उचित प्रबंधन के लिये कलेक्टर श्री हरेंद्र नारायन के मार्गदर्शन में कृषि विभाग द्वारा मैदानी स्तर पर व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। नरवाई जलाने से जहां खेतों के मित्र कीट नष्ट होते हैं, वहीं भूमि की उर्वरता भी कम होती है, जिससे आगामी फसल उत्पादन प्रभावित होने की संभावना रहती है।
कृषकों को नरवाई न जलाने के लिए जागरूक करने हेतु प्रत्येक पंचायत में गठित टीमों द्वारा चौपाल और संगोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। इन कार्यक्रमों में किसानों को शपथ दिलाई जा रही है तथा मुनादी के माध्यम से भी जागरूक किया जा रहा है। साथ ही नरवाई जलाने पर होने वाली दंडात्मक कार्रवाई की जानकारी भी दी जा रही है।
कृषि विभाग द्वारा किसानों को नरवाई प्रबंधन के लिए स्ट्रा रीपर, सुपर सीडर, हैप्पी सीडर तथा डीकंपोजर जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी जा रही है। वहीं कृषि एवं राजस्व विभाग की संयुक्त टीम लगातार नरवाई जलाने की घटनाओं पर निगरानी रख रही है और सूचना मिलने पर मौके पर पहुंचकर जांच एवं कार्रवाई कर रही है। राजस्व विभाग के पटवारी, कृषि विस्तार अधिकारी, ग्राम पंचायत सचिव और कोटवार की टीम गठित कर उन्हें नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए अधिकृत किया गया है। ये टीमें घटनाओं का पंचनामा बनाकर प्रतिवेदन प्रस्तुत कर रही हैं।
जिले में अब तक सेटेलाइट के माध्यम से 84 घटनाएं दर्ज की गई हैं, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि में दर्ज 251 घटनाओं की तुलना में काफी कम हैं। इन 84 घटनाओं में से 73 घटनाएं जंगलों में महुआ बीनने के दौरान आग लगाने से संबंधित पाई गई हैं। अब तक नरवाई जलाने पर विकासखंड अमरवाड़ा में 2, चौरई में 1 तथा बिछुआ में 1 एफआईआर दर्ज की गई है। साथ ही बिछुआ एवं छिंदवाड़ा विकासखंड में एक-एक व्यक्ति पर जुर्माना भी लगाया गया है। इसके अतिरिक्त 5 घटनाएं शॉर्ट सर्किट आदि कारणों से गेहूं की फसल में आग लगने की रिपोर्ट में सामने आई हैं।
कलेक्टर श्री नारायन एवं उप संचालक कृषि श्री जितेंद्र कुमार सिंह ने किसानों से अपील की है कि वे नरवाई न जलाएं और खेतों की उर्वरता बनाए रखने के लिए आधुनिक कृषि यंत्रों का उपयोग करें। उन्होंने सभी कंबाइन हार्वेस्टर में स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा रीपर का उपयोग अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही हार्वेस्टर से कटाई के बाद सुपर सीडर के माध्यम से मूंग एवं उड़द की बोनी करने की सलाह दी गई है, जिससे नरवाई जलाने की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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