किसान धान की जगह रबी में उगाएँ गेहूँ, सरसों और मसूर, कम पानी में मिलेगा बेहतर उत्पादन
22 नवंबर 2025, भोपाल: किसान धान की जगह रबी में उगाएँ गेहूँ, सरसों और मसूर, कम पानी में मिलेगा बेहतर उत्पादन – मध्यप्रदेश कृषि विभाग ने जिले के किसानों से रबी सीजन में धान की जगह वैकल्पिक फसलों गेहूँ, चना, मसूर और सरसों की खेती करने की अपील की है। जिले में परंपरागत रूप से खरीफ और रबी दोनों मौसम में धान बोए जाने से भूमि की उर्वरता घटने, कीट एवं रोग बढ़ने और बार-बार एक ही फसल लेने से खेतों में पोषक तत्वों की कमी जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं।
बालाघाट जिले के कृषि उप संचालक फूलसिंह मालवीय ने बताया कि रबी धान की खेती में अधिक पानी की आवश्यकता होती है। जिन क्षेत्रों में समय पर सिंचाई सुविधा उपलब्ध नहीं रहती, वहाँ धान की फसल प्राय: खराब हो जाती है और उत्पादन भी अपेक्षित नहीं मिल पाता है। किसान भाई अक्सर नहरों में पानी आने की उम्मीद में धान बो देते हैं, लेकिन पानी समय पर नहीं मिलने पर फसल सूख जाती है। किसानों को स्पष्ट किया गया है कि जिन ग्रामीण क्षेत्रों में नहर का पानी उपलब्ध नहीं है, वहाँ किसानों को रबी धान की खेती नहीं करना चाहिए। गेहूँ, चना, मसूर और सरसों जैसी रबी फसलों को धान की तुलना में कम पानी और कम खाद की आवश्यकता होती है। यही नहीं, पानी की कमी की स्थिति में भी ये फसलें बेहतर उत्पादन देती हैं।
उप संचालक मालवीय ने बताया कि रबी सीजन की धान से किसी प्रकार का अतिरिक्त लाभ नहीं मिलता है, जबकि गेहूँ, चना, मसूर और सरसों से अच्छा उत्पादन एवं आर्थिक लाभ मिलता है। फसल चक्र बनाए रखना भी आवश्यक है, जिससे भूमि की उर्वरता सुरक्षित रहती है और कीट-रोगों का प्रकोप कम होता है। किसानों से आग्रह किया गया है कि इस रबी सीजन में धान की जगह गेहूँ, चना, सरसों, मसूर तथा मौसमी सब्जियों की खेती कर अधिक लाभ प्राप्त करें और आने वाले खरीफ मौसम के लिए भूमि को तैयार रखें।
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