राज्य कृषि समाचार (State News)

रासायनिक और जैविक उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल से किसान पा सकते हैं अधिक उपज, कृषि विभाग ने जारी की विशेष सलाह

01 दिसंबर 2025, भोपाल: रासायनिक और जैविक उर्वरक का संतुलित इस्तेमाल से किसान पा सकते हैं अधिक उपज, कृषि विभाग ने जारी की विशेष सलाह – मध्यप्रदेश में वर्तमान में प्रमुख फसलें जैसे गेहूं, चना, अलसी मसूर एवं मटर आदि की बुवाई की सीजन चल रहा हैं। अतः खाद एवं रासायनिक उर्वरकों के प्रयोग के साथ-साथ अनिवार्य रूप से ताजा कल्चर एवं जैव उर्वरकों का प्रयोग कर खेती की लागत में कमी कर अधिक से अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. एस.आर. धुवारे द्वारा किसान भाईयों के लिए निम्न समसामयिक सलाह जारी की गई हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार खाद एवं उर्वरकों का प्रयोग हमेषा मृदा स्वास्थ्य कार्ड के आधार पर करना चाहिए। कम लागत में विभिन्न प्रकार के जैव उर्वरकों जैसे गेहूं में एजोटोबैक्टर तथा फास्फेट घोलक जीवाणु (पी.एस.बी.) कल्चर से बीजोपचार 10-15 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से करें। इसके प्रयोग से क्रमषः 15-20 प्रतिषत तक नत्रजन तथा फास्फोरस की बचत होती हैं।

इसी प्रकार चना, मटर, मसूर आदि की बुवाई पूर्व जैव उर्वरकों एवं कल्चर जैसे ट्राईकोडर्मा, पी.एस.बी. एवं राइजोबियम से 10-15 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज उपचार करें। ऐसा करने से क्रमषः उकठा या उगरा आदि रोगों में कमी के साथ-साथ फसलों में नत्रजन तथा फास्फोरस की लगभग 15-20 प्रतिषत तक बचत होती हैं। अतः जैविक उर्वरकों का प्रयोग करते समय हमेषा संस्तुत किए गए रासायनिक उर्वरकों की मात्रा में से 20-25 प्रतिषत तक घटाकर उपयोग करें। इससे लागत में कमी के साथ-साथ रोगों का नियंत्रण भी होगा।

मृदा में रासायनिक उर्वरक जैसे डी.ए.पी., एस.एस.पी., एन.पी.के., विषेषकर (12:32:16) आदि का लगातार प्रयोग करने से भूमि में लगभग 80-85 प्रतिषत तक फास्फोरस अनुपलब्ध अवस्था में पड़ा रहता हैं और पौधों को सुगमता से उपलब्ध नहीं हो पाता हैं। अतः यदि जैविक उर्वरकों जैसे ट्राईकोडर्मा फफूंदनाषक एवं पी.एस.बी. को प्रति एकड़ 2.0 कि.ग्रा. मात्रा को 100 किलों पकी गोबर की खाद में मिलाकर एक सप्ताह तक छाया में 40 प्रतिषत नमी के साथ मिलाकर रखने के बाद अंतिम जुताई के साथ नमी अवस्था में प्रयोग करने से भूमि की दषा में सुधार के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों की बचत के साथ-साथ लागत में कमी भी कमी आयेगी।

रासायनिक उर्वरकों के रूप में उपरोक्त फसलों डी.ए.पी. के अतिरिक्त एन.पी.के. (12:32:16), सिंगल सुपर फास्फेट जो भी उपलब्ध हो प्रयोग कर सकते हैं। सामान्य तौर पर संतुलित मात्रा में निम्नानुसार रासायनिक उर्वरकों को देने की सिफारिष की गई हैं। विकल्प एक के रूप में सिंचित गेहूं में एन.पी.के. (12:32:16) की (65 कि.ग्रा.) मात्रा के साथ-साथ 02 बोरी यूरिया की मात्रा तथा 25 कि.ग्रा. म्यूरेट आॅफ पोटाष प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए। वहीं अर्धिसिंचित गेहूं में (12:32:16) को एन.पी.के. (मिश्रित उर्वरक) के रूप में प्रति एकड़ 35-40 कि.ग्रा. एवं यूरिया की (45 कि.ग्रा.) एवं 12 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश देना चाहिए। जबकि दोनों ही अवस्था में जिंक सल्फेट 10 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से प्रत्येक तीन साल बाद भूमि में जुताई के समय अवष्य मिलाना चाहिए। अन्यथा पौधों की बढ़वार प्रभावित होती हैं। यदि आप के पास डी.ए.पी. उपलब्ध हो तो सिंचित गेहूं में प्रति एकड़ एक बैग डी.ए.पी. तथा यूरिया (80 कि.ग्रा.) एवं पोटाष की 25 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए। जबकि अर्धसिंचित गेहूं में उपरोक्त मात्रा को आधी कर देना चाहिए।

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इसी प्रकार सिंचित गेहूं में यदि आपके पास सिंगल सुपर फास्फेट उपलब्ध हो तो गेहूं प्रति एकड़ इसकी मात्रा सिंचित गेहूं में 150 कि.ग्रा. तथा यूरिया 10 कि.ग्रा. एवं म्यूरेट आफ पोटाष 25 कि.ग्रा. प्रति एकड़ की दर से देना चाहिए। अर्धसिंचित गेहूं में उपरोक्त मात्रा को आधी कर देना चाहिए। चना, मसूर एवं मटर इत्यादि दलहनी फसलों में विकल्प एक के रूप में एन.पी.के. (12:32:16) को प्रति एकड़ (65 कि.ग्रा.) एन.पी.के. देना चाहिए। जबकि विकल्प दो के रूप में प्रति एकड़ एक बैग डी.ए.पी. तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश देना चाहिए वहीं पोटाष की 12 कि.ग्रा. मात्रा को खेत की अंतिम जुताई के समय भूमि में मिला देना चाहिए।

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यदि दलहनी फसलों में जैव उर्वरक जैसे पी.एस.बी. तथा राइजोबियम कल्चर का उपयोग करते हैं तो उपरोक्त मात्रा में 20-25 प्रतिषत तक उपरोक्त उर्वरकों को कम करके प्रयोग करना चाहिए। यदि समय पर उर्वरक उपलब्ध नहीं हो तो अंतिम विकल्प के रूप में दलहनी फसलों में जैव उर्वरकों का प्रयोग भूमि एवं बीज उपचार के उपरांत बुवाई कर सकते हैं तथा बाद में घुलनषील उर्वरक की 1-1.5 कि.ग्रा. मात्रा 150-200 लीटर पानी में घोलकर फूल आने के पूर्व दो बार छिड़काव आवष्यक करें। साथ ही एक लीटर स्यूडोमोनास का छिड़काव करने से पौधों में अच्छी वृद्धि के साथ-साथ रोगों का प्रकोप से भी बचाव होगा। सभी किसान साथियों से अनुरोध हैं, कि मृदा के स्वास्थ्य एवं अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिये वैज्ञानिक अनुषंसा के अनुसार उर्वरकों का प्रयोग करें।

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