किसान हितैषी नीतियों से एमपी कृषि में अग्रणी, उत्पादन व आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: मंत्री एदल कंषाना
20 दिसंबर 2025, भोपाल: किसान हितैषी नीतियों से एमपी कृषि में अग्रणी, उत्पादन व आय में रिकॉर्ड बढ़ोतरी: मंत्री एदल कंषाना – किसान कल्याण एवं कृषि विकास मंत्री एदल कंषाना सिंह ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में निरंतर प्रगति कर रहा है। सरकार ने विकास और सेवा के दो वर्ष पूर्ण कर लिए हैं और “समृद्ध मध्यप्रदेश” के संकल्प को साकार करने की दिशा में ठोस परिणाम सामने आए हैं। यह बात उन्होंने जनसंपर्क संचालनालय के सभागार में आयोजित पत्रकार वार्ता में कही।
कृषि मंत्री ने कहा कि आज मध्यप्रदेश देश के अग्रणी कृषि राज्यों में शामिल है। सोयाबीन और मक्का उत्पादन में प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि गेहूं, उड़द, मसूर, चना, सरसों, कुल तिलहन, कुल दलहन, कुल खाद्यान्न और मोटे अनाज में प्रदेश द्वितीय स्थान पर है। यह उपलब्धि प्रदेश के किसानों की मेहनत और सरकार की किसान-हितैषी नीतियों का प्रतिफल है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाना, खेती को टिकाऊ बनाना और कृषि को लाभकारी व्यवसाय के रूप में स्थापित करना है।
मंत्री श्री कंषाना ने बताया कि वर्ष 2002-03 में जहां प्रदेश में सिंचाई का रकबा लगभग साढ़े सात लाख हेक्टेयर था, वहीं 2024-25 में यह बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर से अधिक हो गया है। आगामी तीन वर्षों में इसे 65 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही जैविक और प्राकृतिक खेती को भी तेजी से बढ़ावा दिया जा रहा है।
कृषि परिदृश्य: उत्पादन में मध्यप्रदेश की मजबूत स्थिति
देश में मध्यप्रदेश मक्का और सोयाबीन उत्पादन में प्रथम तथा गेहूं, उड़द, मसूर, चना, सरसों, कुल तिलहन, कुल दलहन, कुल खाद्यान्न और कुल मोटे अनाज में द्वितीय स्थान पर है। यह स्थिति प्रदेश को कृषि के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनाती है।
न्यूनतम समर्थन मूल्य पर उपार्जन
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में बीते दो वर्षों में प्रदेश सरकार ने 48 लाख 51 हजार किसानों से 2 करोड़ 41 लाख 31 हजार मीट्रिक टन अनाज का उपार्जन किया है। इसके एवज में किसानों के खातों में 81 हजार 768 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना
सोयाबीन उत्पादक किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए भावांतर भुगतान योजना लागू की गई है। योजना के तहत 9 लाख 36 हजार किसानों का पंजीयन हुआ है। अब तक लगभग 6 लाख किसानों ने 13 लाख 89 हजार मीट्रिक टन सोयाबीन मंडियों में बेचा है। दो चरणों में 2 लाख 67 हजार किसानों के खातों में 482 करोड़ रुपये अंतरित किए जा चुके हैं।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना
प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने पर किसानों को राहत देने के लिए पिछले दो वर्षों में 70 लाख आवेदनों पर 1,237 करोड़ 54 हजार रुपये की दावा राशि का भुगतान किया गया है।
प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 6 हजार रुपये और मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना के तहत अतिरिक्त 6 हजार रुपये दिए जा रहे हैं। अप्रैल 2025 से अब तक 1 करोड़ 68 लाख किसानों को 6,756 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है।
रानी दुर्गावती श्रीअन्न प्रोत्साहन योजना
जनजातीय अंचलों में श्रीअन्न को बढ़ावा देने के लिए प्रदेश के 16 जिलों में पहली बार कोदो-कुटकी का उपार्जन किया जा रहा है। 22 हजार 449 किसानों का पंजीयन हुआ है, जिनका रकबा 21 हजार 172 हेक्टेयर है। खरीफ 2025 में लगभग 15 हजार मीट्रिक टन उपार्जन का लक्ष्य है। किसानों को 1,000 रुपये प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि डीबीटी से दी जाएगी।
खाद वितरण और ई-विकास व्यवस्था
प्रदेश में पिछले दो वर्षों में 72 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 42 लाख मीट्रिक टन डीएपी व एनपीके का वितरण किया गया है। उर्वरक वितरण को पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ई-विकास पोर्टल के माध्यम से विदिशा, शाजापुर, जबलपुर, नर्मदापुरम, दतिया, शिवपुरी, अशोकनगर और गुना जिलों को जोड़ा गया है, जिससे किसानों को उनकी भूमि और फसल के अनुसार उर्वरक उपलब्ध हो सके।
जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा
परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत वर्ष 2025-26 में 43,350 हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक प्रमाणीकरण किया जा रहा है, जिसमें किसानों को 5,000 रुपये प्रति हेक्टेयर प्रति वर्ष अनुदान दिया जाता है। नेशनल मिशन ऑन नेचुरल फार्मिंग के अंतर्गत 1,513 क्लस्टर में 1.89 लाख एकड़ क्षेत्र में उतनी ही संख्या में किसानों के साथ प्राकृतिक खेती लागू की जा रही है, जिसमें 4,000 रुपये प्रति एकड़ प्रति वर्ष सहायता दी जा रही है।
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 8 जिलों—अनूपपुर, शहडोल, उमरिया, सीधी, अलीराजपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ और डिंडोरी—को शामिल किया गया है। इस योजना में कृषि सहित विभिन्न विभागों की 36 योजनाओं का अभिसरण कर कृषि उत्पादकता और ग्रामीण समृद्धि बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
दलहन आत्मनिर्भरता मिशन
11 अक्टूबर 2025 को शुरू हुए दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत तुअर, उड़द और मसूर पर फोकस किया गया है। वर्तमान में प्रदेश दलहन उत्पादन में प्रथम स्थान पर है। वर्ष 2024-25 में 44.92 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में दलहन की खेती हुई है, जिसे अगले तीन वर्षों में 55 लाख हेक्टेयर तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
आगामी कार्ययोजना
आने वाले समय में ई-विकास प्रणाली के तहत उर्वरक की होम डिलीवरी, मौसम आधारित फसल बीमा योजना, मूंगफली और सरसों को भावांतर योजना में शामिल करना, ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को ड्रोन उपलब्ध कराना और पराली प्रबंधन के लिए वैकल्पिक ऊर्जा मॉडल विकसित किए जाएंगे।
2026 कृषि वर्ष और पराली प्रबंधन
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026 को कृषि वर्ष के रूप में मनाने का निर्णय लिया है। लक्ष्य है कि वर्ष 2026 तक पराली जलाने की समस्या में 40 प्रतिशत की कमी लाई जाए। इसके लिए उन्नत तकनीकों और सीबीजी प्लांट आधारित मॉडल पर काम किया जा रहा है।
मंडी सुधार और डिजिटलीकरण
प्रदेश की 269 मंडियों में ई-मंडी योजना लागू है। आगामी तीन वर्षों में सभी मंडियों को आधुनिक बनाने और डिजिटल एग्री के माध्यम से कृषि क्षेत्र के आधुनिकीकरण की दिशा में काम किया जाएगा।
कृषि मंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि मूल्य संवर्धन के जरिए नए रोजगार सृजित हों, किसानों की आय बढ़े और मध्यप्रदेश कृषि के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करता रहे।
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