धमतरी: परखंदा की महिला किसानों ने धान की जगह उगाया खस, 2.5 एकड़ में कमाए ₹1.12 लाख
02 अक्टूबर 2026, रायपुर: धमतरी: परखंदा की महिला किसानों ने धान की जगह उगाया खस, 2.5 एकड़ में कमाए ₹1.12 लाख – पारंपरिक खेती से आगे बढ़ते हुए छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के कुरूदn विकासखंड के ग्राम पंचायत परखंदा की ‘धान के कटोरा उत्पादक समिति’ स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने औषधीय और सुगंधित फसल खस की खेती को अपनाया। समूह ने 2.50 एकड़ क्षेत्र में खस की खेती कर पहली ही फसल में 11.20 क्विंटल खस का उत्पादन किया और 1 लाख 12 हजार रुपए की आय अर्जित की।
खस एक औषधीय पौधा है। इसकी जड़ों से निकाला गया सुगंधित तेल शरबत, पान मसाला, तंबाकू, इत्र, साबुन और अन्य सौंदर्य संसाधनों में इस्तेमाल किया जाता है। इसकी सूखी जड़ों का उपयोग लिनन और कपड़ों में सुगंध के लिए भी किया जाता है। इसके अलावा खस का इस्तेमाल आयुर्वेद जैसी पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में औषधि के रूप में भी होता है।
पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर अपनाई खस की खेती
ग्रामीण महिलाओं ने अब पारंपरिक खेती के साथ नए प्रयोगों को अपनाकर आजीविका के नए रास्ते तलाशने शुरू किए हैं। परखंदा की महिलाओं के लिए खस की खेती एक नया अनुभव था। नई फसल होने के कारण इसके उत्पादन और देखभाल को लेकर समूह के सामने चुनौतियां भी थीं। महिलाओं ने सामूहिक श्रम, नियमित देखभाल और सीखने की इच्छा के साथ खस की खेती को आगे बढ़ाया।
मेहनत का परिणाम पहली फसल की कटाई के समय सामने आया। समूह को 11.20 क्विंटल खस का उत्पादन मिला। इसके विक्रय से समूह को 1 लाख 12 हजार रुपए की राशि प्राप्त हुई। पहली ही फसल से मिली यह आय महिलाओं के लिए उत्साहवर्धक रही और इससे उन्हें उपलब्ध भूमि और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग का भरोसा मिला।
खस के बाद हल्दी की खेती भी शुरू
खस की पहली फसल से मिले परिणाम के बाद समूह ने अपनी गतिविधियों का विस्तार किया है। वर्तमान में महिलाएं खस के साथ हल्दी की खेती भी कर रही हैं। अलग-अलग फसलों को अपनाने से समूह के सामने कृषि आधारित आय के एक से अधिक विकल्प विकसित हो रहे हैं। समूह की महिलाओं ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर बचत और ऋण की गतिविधियों से आगे बढ़ते हुए उत्पादन, फसल प्रबंधन और विपणन जैसी गतिविधियों को भी अपनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। खस की खेती से मिली आय ने महिलाओं में आर्थिक गतिविधियों के प्रति आत्मविश्वास बढ़ाया है।
6 एकड़ में किया गया मिश्रित वृक्षारोपण
ग्राम पंचायत परखंदा में योजनांतर्गत 6 एकड़ क्षेत्र में मिश्रित वृक्षारोपण भी किया गया है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में हरित क्षेत्र का विस्तार करने के साथ प्राकृतिक संसाधनों और जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना है। मिश्रित वृक्षारोपण और औषधीय खेती को साथ बढ़ावा देने से इस पहल का दायरा बढ़ा है। एक ओर वृक्षारोपण पर्यावरणीय संतुलन और हरित आवरण बढ़ाने में सहायक है, वहीं दूसरी ओर औषधीय फसलों के माध्यम से ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका के अवसर विकसित हो रहे हैं।
महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता
परखंदा की महिलाओं की यह पहल केवल खस के उत्पादन और आय तक सीमित नहीं है। यह ग्रामीण महिलाओं के खेती में नए प्रयोगों और सामूहिक प्रयासों की मिसाल है। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग, महिला समूह की भागीदारी, फसल विविधीकरण और पर्यावरण संरक्षण को साथ लेकर यह पहल आगे बढ़ रही है।
खस की खेती से मिली सफलता के बाद महिलाओं ने हल्दी की खेती भी शुरू की है। इससे कृषि आधारित आय के नए विकल्प विकसित होने की संभावना बढ़ी है।
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