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राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़: ‘तूहर टोकन’ ऐप अब 24×7, धान विक्रय में समय-बाधा हटाई गई

15 दिसंबर 2025, रायपुर: छत्तीसगढ़: ‘तूहर टोकन’ ऐप अब 24×7, धान विक्रय में समय-बाधा हटाई गई – छत्तीसगढ़ सरकार ने धान विक्रय व्यवस्था में बदलाव करते हुए राज्य के किसान-उन्मुख मोबाइल ऐप तूहर टोकन को चौबीसों घंटे उपलब्ध कर दिया है। अब किसान किसी निर्धारित समय की परवाह किए बिना दिन-रात अपने अनूठे सुविधा के अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। सरकार के अनुसार इस बदलाव का उद्देश्य किसानों को टोकन लेने और धान विक्रय की योजना बनाने के लिए अधिक लचीलापन देना है।

क्या बदला है और किनके लिए सुविधा दी गई

सरकारी निर्देशों के मुताबिक अब किसान मोबाइल ऐप से 13 जनवरी तक अगले 20 दिनों के लिए टोकन बुक कर सकते हैं। साथ ही, जिन किसानों का रकबा 2 एकड़ या उससे कम है, उनके लिए यह सुविधा विशेष रूप से बढ़ाते हुए 31 जनवरी तक टोकन लेने की अतिरिक्त समयसीमा दी गई है। यह कदम लघु किसान वर्ग को ध्यान में रखकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर लागू किया गया है।

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि टोकन जारी करने की प्रक्रिया हर सहकारी समिति के आबंटित सीमा के भीतर ही जारी रहेगी। यानी टोकन की संख्या और वितरण सहकारी समितियों द्वारा निर्धारित सीमा के अनुसार ही होगा; इससे कहीं-ना-कहीं आवंटन से जुड़ी सीमाएं बनी रहेंगी।

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प्रशासन की दलील और किसानों से अपील

प्रशासन का कहना है कि 24×7 टोकन सुविधा और समय-बाधा हटाने से किसानों को भीड़ और तकनीकी दबाव कम करने में सहायता मिलेगी तथा वे अपनी सुविधानुसार टोकन लेकर धान विक्रय की बेहतर योजना बना सकेंगे। अधिकारियों ने किसानों से आग्रह किया है कि वे समय पर ऐप के माध्यम से टोकन प्राप्त कर लें ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।

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मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस फैसले पर कहा, “किसानों की सुविधा और पारदर्शी व्यवस्था हमारी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तूहर टोकन ऐप को 24×7 खोलने और समय की बाध्यता समाप्त करने का निर्णय इसी सोच का परिणाम है। अब किसान बिना किसी दबाव के, अपनी सुविधा अनुसार टोकन बुक कर सकेंगे। 2 एकड़ एवं 2 एकड़ से कम रकबा वाले किसानों के लिये टोकन की अतिरिक्त समय सीमा और अवधि का विस्तार किसानों को वास्तविक राहत देगा। राज्य सरकार किसान हित में हर संभव कदम उठाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है।”

समीक्षा के कुछ बिंदु

सरकारी घोषणा में लाभों पर जोर दिया गया है, लेकिन लागू होने पर यह देखना जरूरी होगा कि सहकारी समितियों के भीतर होने वाले आवंटन से वास्तविक खरीदी-प्रक्रिया पर क्या असर पड़ता है। 24×7 आवेदन-सुविधा होने से तकनीकी रुप से लचीलेपन की उम्मीद है, पर मैदान में व्यवस्थागत चुनौतियाँ, जैसे कि क्रॉस-चेकिंग, शेड्यूलिंग और नमी/गुणवत्ता संबंधी निरीक्षण, न सिर्फ़ ऐप पर निर्भर करती हैं बल्कि स्थानीय परिचालन क्षमता पर भी निर्भर रहेंगी।

किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे टोकन लेते समय सहकारी समिति द्वारा निर्धारित नियमों और आवंटन सीमाओं को ध्यान में रखें और किसी भी संशय पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करें।

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