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राज्य कृषि समाचार (State News)

छत्तीसगढ़: कभी गांव-गांव घूमकर बेचते थे थ्रेशर, आज खुद कृषि उपकरण बनाकर सालाना 7 करोड़ का टर्नओवर कर रहे हैं सुरेश देवांगन

18 अक्टूबर 2026, कोंडागांव: छत्तीसगढ़: कभी गांव-गांव घूमकर बेचते थे थ्रेशर, आज खुद कृषि उपकरण बनाकर सालाना 7 करोड़ का टर्नओवर कर रहे हैं सुरेश देवांगन – छत्तीसगढ़ के कोंडागांव जिले के बड़ेबेंद्री गांव निवासी सुरेश देवांगन ने अपनी मेहनत और सूझबूझ से सफलता की नई मिसाल पेश की है। कभी गांव-गांव जाकर किसानों को कृषि उपकरण उपलब्ध कराने वाले सुरेश आज खुद आधुनिक कृषि उपकरणों का निर्माण कर रहे हैं। उनके द्वारा स्थापित ‘किसान मितान एग्रो’ का वार्षिक टर्नओवर करीब 7 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उनकी इस पहल से जहां किसानों को स्थानीय स्तर पर कृषि उपकरण उपलब्ध हो रहे हैं, वहीं 25 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार भी मिला है।

किसानों की जरूरत को पहचाना, गांव-गांव पहुंचाए कृषि उपकरण

सुरेश देवांगन ने अपने शुरुआती दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में आधुनिक कृषि उपकरणों की कमी को करीब से महसूस किया। किसानों को खेती के लिए जरूरी उपकरण आसानी से नहीं मिल पाते थे। इस समस्या को देखते हुए उन्होंने थ्रेशर मशीनों के जरिए किसानों की मदद करना शुरू किया। वे गांव-गांव जाकर जरूरतमंद किसानों को किराये पर कृषि उपकरण उपलब्ध कराते थे।

समय के साथ किसानों के बीच कृषि उपकरणों की मांग बढ़ने लगी। इसे देखते हुए सुरेश ने थ्रेशर और रोटावेटर की बिक्री के लिए डीलरशिप लेने की योजना बनाई। इसके बाद उन्होंने दूसरे जिलों और राज्यों से कृषि ट्रॉलियां मंगाकर स्थानीय स्तर पर बेचनी शुरू की। हालांकि, बाहर से ट्रॉलियां मंगाने के दौरान उन्हें समय पर डिलीवरी नहीं मिलने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। इससे ग्राहकों को परेशानी होती थी और व्यवसाय की साख पर भी असर पड़ता था। इस समस्या का समाधान तलाशते हुए उन्होंने दूसरे राज्यों पर निर्भर रहने के बजाय कोण्डागांव में ही कृषि उपकरण निर्माण इकाई स्थापित करने का फैसला किया।

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प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम से मिली मदद

अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए सुरेश देवांगन ने जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, कोण्डागांव से संपर्क किया। यहां उन्हें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम के तहत उद्योग स्थापित करने के लिए मार्गदर्शन मिला। योजना के अंतर्गत उन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा से 50 लाख रुपये का ऋण प्राप्त किया। इसके साथ ही जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के माध्यम से 12.50 लाख रुपये की सब्सिडी भी स्वीकृत हुई। इस वित्तीय सहायता से उन्हें अपना सपना साकार करने में मदद मिली।

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इसके बाद उन्होंने रायपुर नाका, कोण्डागांव के पास ‘किसान मितान एग्रो’ नाम से आधुनिक कृषि उपकरण निर्माण इकाई स्थापित की। यहां कृषि ट्रॉलियों के साथ विभिन्न प्रकार की कृषि मशीनों और उपकरणों का निर्माण शुरू किया गया।

20 लाख रुपये से बढ़कर 7 करोड़ रुपये हुआ कारोबार

स्थानीय किसानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर मजबूत और टिकाऊ कृषि उपकरण तैयार करने से ‘किसान मितान एग्रो’ के उत्पादों की मांग बढ़ने लगी। बेहतर गुणवत्ता और निरंतर मेहनत के दम पर कारोबार का विस्तार होता गया। शुरुआत में करीब 20 लाख रुपये का कारोबार करने वाली यह इकाई आज लगभग 7 करोड़ रुपये के वार्षिक टर्नओवर तक पहुंच चुकी है। सुरेश देवांगन अब अपने व्यवसाय को और अधिक विस्तार देने की दिशा में काम कर रहे हैं।

25 लोगों को रोजगार, किसानों को स्थानीय स्तर पर उपकरण

आज ‘किसान मितान एग्रो’ क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता का माध्यम बन रही है। इस निर्माण इकाई में 25 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला है, जिससे उनके परिवारों को आर्थिक सहारा मिल रहा है। इसके अलावा कोण्डागांव और आसपास के क्षेत्रों के किसानों को कृषि ट्रॉलियां और आधुनिक कृषि उपकरण स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो रहे हैं। अब उन्हें इन उपकरणों के लिए दूसरे जिलों और राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। इससे किसानों के समय और धन की बचत होती है और कृषि कार्यों को आसान बनाने में मदद मिलती है।

सुरेश देवांगन ने उद्योग विभाग की योजना के माध्यम से मिली सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त किया। उनकी सफलता की कहानी दिखाती है कि स्थानीय जरूरतों को पहचानकर और उपलब्ध योजनाओं का लाभ लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में भी आधुनिक उद्योग स्थापित किए जा सकते हैं। 

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