नए साल पर किसानों को बड़ी राहत: महाराष्ट्र में 2 लाख तक के कृषि कर्ज पर स्टांप ड्यूटी पूरी तरह माफ
04 जनवरी 2026, भोपाल: नए साल पर किसानों को बड़ी राहत: महाराष्ट्र में 2 लाख तक के कृषि कर्ज पर स्टांप ड्यूटी पूरी तरह माफ – नए साल की शुरुआत महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए बड़ी राहत के साथ की है। राज्य सरकार ने फसल और कृषि कार्यों के लिए लिए जाने वाले 2 लाख रुपये तक के कर्ज से जुड़े सभी दस्तावेजों पर स्टाम्प ड्यूटी पूरी तरह माफ करने का निर्णय लिया है। इस फैसले का उद्देश्य किसानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को कम करना और कृषि ऋण प्रक्रिया को सरल बनाना है। यह व्यवस्था 1 जनवरी से पूरे राज्य में प्रभावी हो चुकी है।
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस निर्णय की जानकारी देते हुए कहा कि सरकार किसानों की जरूरतों और चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है। स्टांप ड्यूटी माफी से किसानों को सीधे तौर पर राहत मिलेगी और उन्हें कर्ज लेने के दौरान अतिरिक्त खर्च नहीं उठाना पड़ेगा।
खेती की लागत घटाने की दिशा में बड़ा कदम
राजस्व मंत्री ने बताया कि यह फैसला मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की किसान-हितैषी सोच का परिणाम है। स्टांप ड्यूटी समाप्त होने से किसानों की लागत में होने वाली बचत का उपयोग बीज, खाद, आधुनिक कृषि उपकरण और नई तकनीकों पर किया जा सकेगा। इससे खेती की गुणवत्ता बेहतर होगी और उत्पादन बढ़ने की संभावना भी मजबूत होगी।
अब कर्ज लेना होगा और आसान
अब तक फसल ऋण पर प्रति 1 लाख रुपये पर लगभग 0.3 प्रतिशत की दर से स्टांप शुल्क देना पड़ता था। इस हिसाब से 2 लाख रुपये के कर्ज पर किसानों को करीब 600 रुपये स्टांप ड्यूटी के रूप में चुकाने होते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद यह राशि पूरी तरह बच जाएगी, जिससे कर्ज लेना किसानों के लिए अधिक सुलभ हो जाएगा।
किन दस्तावेजों पर मिलेगी पूरी छूट
राजस्व एवं वन विभाग द्वारा जारी सरकारी अधिसूचना के अनुसार, 2 लाख रुपये तक के कृषि ऋण से जुड़े सभी प्रमुख दस्तावेजों पर स्टांप ड्यूटी नहीं लगेगी। इसमें स्वामित्व से जुड़े कागजात, जमा पत्र, बंधक और गिरवी से संबंधित दस्तावेज, गारंटी पत्र, बंधक विलेख और लोन एग्रीमेंट जैसे कागज शामिल हैं। यह छूट राज्य के सभी बैंकों, सहकारी संस्थाओं और अन्य ऋण एजेंसियों पर समान रूप से लागू होगी।
कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा संबल
सरकार का मानना है कि यह निर्णय केवल कर्ज प्रक्रिया को आसान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी। किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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