राज्य कृषि समाचार (State News)

नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी में कृषि विज्ञान मेला सम्पन्न

13 मार्च 2026, नर्मदापुरम: नर्मदापुरम जिले के बनखेड़ी में कृषि विज्ञान मेला सम्पन्न – सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन “आत्मा” योजना अंतर्गत जिला स्तरीय कृषि विज्ञान मेला सह प्रदर्शनी का आयोजन कृषि विज्ञान केंद्र गोविंदनगर, बनखेड़ी में पिपरिया विधानसभा के  विधायक श्री ठाकुरदास नागवंशी के मुख्य आतिथ्य में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकासखंडों से आए किसान भाई-बहनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

 बनखेड़ी नगर पालिका के अध्यक्ष श्री हरीश मालानी, श्री नवल रघुवंशी, श्री सर्वज्ञ दीवान, भाऊ साहब भुस्कुटे स्मृति लोक न्यास गोविंद नगर के उपाध्यक्ष श्री उम्मेद सिंह पटेल, श्री मकरन सिंह पटेल, सहसचिव श्री केशव माहेश्वरी, सदस्य श्री भूपेन्द्र सिंह पटेल, विशेष आमंत्रित सदस्य श्री विवेक माहेश्वरी, श्री अनिल बारोलिया, कृषि विज्ञान केंद्र के अध्यक्ष श्री अनिल अग्रवाल, न्यास के प्रबंधक श्री धर्मेन्द्र गुर्जर, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सदस्य (मृदा विज्ञान) श्री नीतिराज पटेल, उपसंचालक कृषि डॉ.रविकांत सिंह, उप परियोजना संचालक “आत्मा” श्री गोविंद मीना, कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक खांडे, प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संजीव कुमार गर्ग तथा कृषि एवं विभिन्न विभाग से पधारे अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे साथ नर्मदापुरम के विभिन्न विकासखंड से आए हुए किसान कार्यक्रम में सम्मिलित हुए I

  उपसंचालक कृषि डॉ. रविकांत सिंह ने कार्यक्रम का परिचय एवं रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि इस कृषि विज्ञान मेले का मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच उन्नत कृषि तकनीकों का प्रसार, प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना तथा किसानों को नवीन कृषि नवाचारों से अवगत कराना है। नर्मदापुरम जिले के किसानों तथा विभागीय अमले को गेहूं कटाई उपरांत नरवाई जलाने की समस्या पर विशेष ध्यान देकर कृषकों को नरवाई प्रबंधन के लिए जागरूक करने के लिए  कहा गया। उन्होंने  कहा  कि मिट्टी एक सजीव है, इसमें कई जीव- जंतु निवासरत है, जिसका भी हमें ध्यान रखना चाहिए नरवाई जलाने से सजीव मिट्टी के पोषक तत्व नष्ट हो जाते I उन्होंने फसल विविधीकरण ध्यान देने  को कहा  I

विधायक श्री   नागवंशी ने  किसानों  से नरवाई नहीं जलाने की अपील की गई, नरवाई जलाए नहीं बल्कि उसका चारा एकत्रित करें साथ ही फसल चक्र  अपनाएं  जिससे नरवाई नहीं जलाना  पड़े।  सांसद प्रतिनिधि एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के सदस्य (मृदा विज्ञान) श्री नीतिराज पटेल ने किसानों  से  कहा कि पुरानी खेती आत्मनिर्भर खेती थी जो जमीन से जुड़ी हुई थी, उन्होंने वर्तमान में कैंसर  के बढ़ती संख्या पर चिंता व्यक्त की एवं इसे रोकने हेतु परिवार के स्वास्थ्य और पोषण को ध्यान में रखते हुए जैविक एवं प्राकृतिक खेती करने के लिए आग्रह किया गया। श्री उम्मेद सिंह पटेल ने किसानों से आग्रह किया कि वे छोटे रकबे से ही जैविक खेती शुरू करें और धीरे-धीरे इसे बड़े स्तर पर अपनाए तथा विभाग की योजनाओं की जानकारी आधिक से अधिक किसानो तक  पहुंचाने  की सलाह दी गई। श्री नवल रघुवंशी ने किसानों को भूमि सुपोषण अभियान के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि यह अभियान पूरे देश में चैत्र नवरात्र से प्रारंभ होकर एक माह तक संचालित किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भूमि की उर्वरता को बनाए रखना तथा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना है। श्री सर्वज्ञ दीवान ने किसानों को जैविक खेती के लिए प्रेरित किया।

तकनीकी सत्र के दौरान प्रभारी वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. संजीव कुमार गर्ग ने कृषि विज्ञान केंद्र की भूमिका, नरवाई प्रबंधन तथा प्राकृतिक खेती की पद्धतियों की जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक खांडे ने ग्रीष्मकालीन फसल उत्पादन तकनीक पर विस्तृत जानकारी देते हुए किसानों को रसायनों का सीमित उपयोग करने तथा एक ही प्रकार के कीटनाशक का बार-बार प्रयोग न करने की सलाह दी। उन्होंने किसानों को फसलों की उन्नतशील किस्मों के बारे में भी जानकारी दी। कृषि वैज्ञानिक डॉ. राजेन्द्र  पटेल  द्वारा ग्रीष्मकालीन मूंग फसल की वैकल्पिक फसल उड़द एवं प्राकृतिक खेती आधारित फसलों की जानकारी किसान बंधुओं को दी गई, डॉ. बृजेश कुमार नामदेव ने जैविक पौध संरक्षण के उपायों की जानकारी दी, डॉ. रंजीत सिंह ने किसानों को ग्रीष्मकालीन सब्जी उत्पादन तकनीक के बारे में बताया।

कार्यक्रम के दौरान आयोजित कृषक-वैज्ञानिक संवाद में प्रगतिशील कृषक श्री भूपेन्द्र पटेल ने अपने जैविक एवं प्राकृतिक खेती के अनुभव साझा किए। उन्होंने किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि खेतों में दलहन, तिलहन एवं मोटे अनाज की फसलों को बारी-बारी से लगाने से भूमि की उर्वरता बनी रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है। कृषि विज्ञान मेले में 30 से अधिक कृषि प्रदर्शनी लगाई गई, जिनमें कृषि एवं संबंधित विभागों तथा कृषि से जुड़ी संस्थाओं द्वारा कृषि आदान, उत्पाद तथा उन्नत तकनीकों का जीवंत प्रदर्शन किया गया। साथ ही जिले के प्रगतिशील किसानों द्वारा उत्पादित फसलों की भी प्रदर्शनी लगाई गई।

कार्यक्रम के अंत में “आत्मा” योजना अंतर्गत सर्वोत्तम जिला स्तरीय, विकासखंड स्तरीय  प्रमाण पत्र प्रदान किए गए। साथ ही कृषि विज्ञान केंद्र में संचालित आर्या परियोजना के अंतर्गत हितग्राही किसानों को भी प्रमाण पत्र वितरित किए गए। कार्यक्रम के दौरान अतिथियों को कृषि विज्ञान केंद्र परिसर में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन श्री गोविन्द मीना, डॉ. संजीव कुमार गर्ग एवं डॉ. बृजेश कुमार नामदेव द्वारा कराया गया। इस अवसर पर कृषि वैज्ञानिक, सहायक संचालक कृषि, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी, कृषि विस्तार अधिकारी, बीटीएम, एटीएम सहित जिले के 1600 से अधिक किसान उपस्थित रहे।  उप परियोजना संचालक ‘आत्मा ‘ श्री गोविंद मीना द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

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