राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसानों को कर्ज जाल से निकालने के लिए कृषि वित्त तंत्र को सरल और मानवीय बनाना जरूरी: मंत्री शिवराज  

22 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: किसानों को कर्ज जाल से निकालने के लिए कृषि वित्त तंत्र को सरल और मानवीय बनाना जरूरी: मंत्री शिवराज – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि किसानों को साहूकारी, ऊंचे ब्याज, जटिल कर्ज प्रक्रिया और असंवेदनशील व्यवस्था से राहत दिलाने के लिए कृषि वित्त तंत्र को और अधिक सरल, व्यावहारिक, मानवीय और परिणामोन्मुख बनाना होगा। उन्होंने कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) ने किसानों को राहत दी है, लेकिन अब जरूरत इस बात की है कि तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग हो, बैंकिंग व्यवस्था ग्रामीण जरूरतों के अनुरूप मजबूत बने, योजनाएं जमीन पर व्यावहारिक रूप से लागू हों और छोटे किसानों की आय बढ़ाने के लिए एकीकृत खेती जैसे मॉडल को आगे बढ़ाया जाए।

ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण बहुत जरूरी

सिविल सेवा दिवस के अवसर पर विज्ञान भवन, नई दिल्ली में कृषि पर आयोजित पैनल चर्चा में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि उनका बचपन गांव में बीता है और उन्होंने बहुत करीब से देखा है कि पहले गांवों में किस तरह ब्याज पर पैसा देने का चलन था। जरूरतमंद लोग बर्तन, जेवर, जमीन या घर का सामान गिरवी रखकर पैसा लेते थे और ब्याज का कोई ठिकाना नहीं होता था। उन्होंने कहा कि आज जरूरत किसानों को इस शोषणकारी चक्र से बाहर निकालने की है।

उन्होंने कहा कि KCC और बैंकिंग ऋण सुविधाओं ने किसानों को राहत पहुंचाई है। ट्रैक्टर, सिंचाई, बीज और अन्य जरूरतों के लिए ऋण मिलने से उत्पादन बढ़ाने में मदद मिली है, लेकिन बैंक से ऋण लेना आज भी गांवों में आसान नहीं है। किसान को कागजों, अभिलेखों, तहसील, पटवारी और कई स्तरों की प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, इसलिए ऋण प्रक्रिया का सरलीकरण बहुत जरूरी है।

व्यवस्था में संवेदना और संतुलन जरूरी

श्री चौहान ने कहा कि व्यवस्था में संवेदना और संतुलन दोनों होने चाहिए। कई बार अधिकारी सामने वाले किसान को तुच्छ समझ लेते हैं, जबकि किसान कोई याचक नहीं है, वह अपने हक और सम्मान के साथ व्यवस्था के पास आता है।

उन्होंने एक उदाहरण देते हुए बताया कि एक किसान बच्चों की पढ़ाई के लिए मकान बनाकर कर्ज में फंस गया था। 18 लाख रुपये का ऋण ब्याज बढ़ते-बढ़ते 40 लाख रुपये तक पहुंच गया। ऐसे मामलों में वन टाइम सेटलमेंट जैसे व्यावहारिक समाधान जरूरी हैं।

तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग जरूरी

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि तकनीक का उपयोग जरूरी है, लेकिन उसका इस्तेमाल सोच-समझकर होना चाहिए। उन्होंने बताया कि गेहूं खरीदी के दौरान कई जगह सैटेलाइट सत्यापन में गड़बड़ी से किसान परेशान हुए। इसलिए कृषि विभाग, नाबार्ड, आरबीआई और संबंधित संस्थाओं को मिलकर बेहतर और व्यावहारिक व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

ग्रामीण बैंकों में स्टाफ की कमी पर चिंता

श्री चौहान ने ग्रामीण बैंकों में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि मनरेगा मजदूरी, किसान सम्मान निधि और अन्य योजनाओं का पैसा सीधे खातों में आने से बैंकों पर काम का दबाव बढ़ गया है, लेकिन स्टाफ सीमित है।

कई बार किसान 8 से 10 किलोमीटर चलकर बैंक पहुंचता है, लेकिन लंबी लाइन और कम स्टाफ के कारण उसका काम नहीं हो पाता, जिससे उसका समय, श्रम और आय प्रभावित होती है। उन्होंने जरूरत के अनुसार पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

प्रगतिशील किसानों को अधिक वित्तीय सहयोग की जरूरत

उन्होंने कहा कि केवल KCC सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। यदि किसान पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, ड्रिप या उन्नत खेती करना चाहता है, तो अधिक निवेश की जरूरत होती है। सरकार सब्सिडी देती है, लेकिन इसकी भी सीमाएं हैं, इसलिए प्रगतिशील किसानों को अधिक वित्तीय सहयोग देने पर विचार जरूरी है।

इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर जोर

श्री चौहान ने छोटे और सीमांत किसानों की आय बढ़ाने के लिए इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छोटे किसान केवल अनाज पर निर्भर रहकर अपनी आय नहीं बढ़ा सकते। उन्हें फल, सब्जी, पशुपालन, मछली पालन, बकरी पालन और मधुमक्खी पालन जैसी गतिविधियों को साथ लेकर चलना होगा। इन क्षेत्रों में निवेश के लिए भी वित्तीय सहायता जरूरी है और विभिन्न योजनाओं के समन्वय से इसे प्रभावी बनाया जा सकता है।

व्यवहारिक क्रियान्वयन पर जोर

केंद्रीय मंत्री ने वेयरहाउस रसीद पर ऋण देने की योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि यह योजना अच्छी है, लेकिन इसे और अधिक सरल और प्रभावी बनाना होगा। उन्होंने कहा कि जब किसान को तत्काल पैसों की जरूरत होती है, तो वह कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर हो जाता है। यदि आसान ऋण उपलब्ध हो, तो किसान सही समय पर बेहतर दाम पर अपनी उपज बेच सकता है।

अधिकारियों से नई सोच की अपील

श्री शिवराज सिंह चौहान ने सिविल सेवा से जुड़े अधिकारियों से आत्मविश्लेषण, बेहतर क्रियान्वयन और आउट-ऑफ-द-बॉक्स सोच अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि योजनाओं के बेहतर परिणाम के लिए अधिकारियों को अपनी क्षमता और नवाचार का पूरा उपयोग करना चाहिए और अच्छे विचारों को जमीन पर उतारने की दिशा में काम करना चाहिए।

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