राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

शीर्षक: भारत ने 9.25 करोड़ फार्मर आईडी बनाई, अगले छह महीनों में 100% कवरेज का लक्ष्य

02 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: शीर्षक: भारत ने 9.25 करोड़ फार्मर आईडी बनाई, अगले छह महीनों में 100% कवरेज का लक्ष्य – भारत में कृषि क्षेत्र को सशक्त और पारदर्शी बनाने की दिशा में फार्मर आईडी पहल तेजी से आगे बढ़ रही है। हाल ही में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्रियों के साथ एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की, जिसमें फार्मर आईडी, उर्वरक उपलब्धता और विभिन्न कृषि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में यह जानकारी दी गई कि देश के 19 राज्यों में अब तक 9.25 करोड़ फार्मर आईडी तैयार की जा चुकी हैं। इसे एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए मंत्री ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे अभियान चलाकर अगले छह महीनों के भीतर सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीकरण सुनिश्चित करें। साथ ही यह भी कहा गया कि यह प्रक्रिया केवल प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना तक सीमित न रहे, बल्कि प्रत्येक योग्य किसान तक पहुँचे।

फार्मर आईडी को एक समग्र डिजिटल पहचान प्रणाली के रूप में विकसित किया जा रहा है, जो किसानों को उनकी भूमि, फसल, पशुधन और मत्स्य पालन जैसी गतिविधियों से जोड़ती है। इससे सरकार को योजनाओं का लाभ सीधे किसानों तक पहुँचाने में सुविधा होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी। इसके माध्यम से दोहराव, गलत लाभार्थियों की पहचान और अनियमितताओं को भी प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा।

उर्वरक उपलब्धता के विषय में मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसानों को किसी भी परिस्थिति में उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े। राज्यों को जमाखोरी और कालाबाजारी पर सख्त निगरानी रखने के लिए कहा गया। साथ ही तकनीक आधारित संतुलित वितरण प्रणाली को अपनाने पर जोर दिया गया, ताकि किसानों को उनकी आवश्यकता के अनुसार उर्वरक उपलब्ध हो सके और असंतुलित उपयोग को भी रोका जा सके।

बैठक में यह भी कहा गया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में उर्वरकों की अवैध आवाजाही पर विशेष निगरानी रखी जाए। हरियाणा की ‘मेरी फसल, मेरा ब्योरा’ जैसी पहल की सराहना करते हुए इसे अन्य राज्यों के लिए एक आदर्श मॉडल बताया गया।

इसके अतिरिक्त, दलहन और तिलहन फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की समीक्षा भी की गई, जो प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान के अंतर्गत संचालित होती है। निर्देश दिए गए कि खरीद प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो, किसानों का पंजीकरण आधार से जुड़ी प्रणालियों पर किया जाए, और भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में किया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित करने पर बल दिया गया कि खरीद केंद्रों की पर्याप्त संख्या हो ताकि किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

सरकार द्वारा आयोजित क्षेत्रीय कृषि सम्मेलनों की जानकारी देते हुए बताया गया कि देश को विभिन्न कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित कर प्रत्येक क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुसार योजनाएँ बनाई जाएँगी। साथ ही, आगामी अभियानों के माध्यम से वैज्ञानिकों और किसानों के बीच सीधा संवाद स्थापित कर नई तकनीकों, उन्नत किस्मों और आधुनिक कृषि पद्धतियों का प्रसार किया जाएगा।

बैठक के अंत में मंत्री ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना, पारदर्शी खरीद व्यवस्था सुनिश्चित करना और प्रभावी वितरण प्रणाली लागू करना राज्यों की प्राथमिक जिम्मेदारी है। फार्मर आईडी के माध्यम से इन सभी उद्देश्यों को अधिक सशक्त और प्रभावी ढंग से हासिल किया जा सकेगा।

इस प्रकार, फार्मर आईडी पहल भारत में कृषि के आधुनिकीकरण, पारदर्शिता और समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है, जो आने वाले समय में किसानों और कृषि तंत्र दोनों को नई मजबूती प्रदान करेगी।

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