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राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

कोरोना की चपेट में पोल्ट्री उद्योग को 22 हजार करोड़ का नुकसान

कोरोना की चपेट में पोल्ट्री उद्योग को 22 हजार करोड़ का नुकसान


नई दिल्ली।
देशव्यापी कोरोना वायरस से पोल्ट्री उद्योग भी अछूता नहीं रह पाया है। फिक्की के मुताबिक 10 फरवरी से अभी तक पोल्ट्री उद्योग को लगभग 22,500 करोड रुपए के नुकसान की संभावना है। पूरे देश में लगभग 10 लाख से अधिक मुर्गी पालक हैं और देश की जीडीपी में पोल्ट्री उद्योग का 1.2 लाख करोड रुपए का सीधा योगदान है। जहां कुक्कुट उद्योग से मक्का और सोयाबीन उत्पादक 1 करोड़ किसान लाभान्वित होते हैं वहीं लगभग 5 करोड़ की आबादी पोल्ट्री उत्पादन , विपणन , कुक्कुट आहार, परिवहन आदि गतिविधियों से प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष रूप से जुडी है। कोविड-19 महामारी के कारण पोल्ट्री उत्पादों की मांग में भारी कमी आई है जिससे पोल्ट्री उद्योग की अर्थव्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा है।

मक्का के दाम गिरे

पोल्ट्री प्रोडक्ट्स की मांग ना होने के कारण मक्का , सोयाबीन के किसान भी प्रभावित हुए हैं । पिछले कुछ दिनों में मक्का के दाम 25 रूपये किलो से गिरकर 15 रूपये पर आ गए हैं ।अंडों की फॉर्म गेट प्राइस 2 रूपये पर चल रही है । प्रत्येक पोल्ट्री फार्मर को प्रति मुर्गी औसतन 130 रूपए का नुकसान हो रहा है। इस परिदृश्य में मुर्गी पालकों ने अपने पोल्ट्री फॉर्म का व्यवसाय समेटना शुरू कर दिया है।फिक्की ने केंद्र से डूबते हुए पोल्ट्री उद्योग के लिए त्वरित सहायता की मांग की है।

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