राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

किसानों तक कृषि की जानकारी पहुंचाने में केवीके का सहयोग जरूरी

जी20 की 100वीं कृषि प्रमुख वैज्ञानिकों की बैठक वाराणसी में

29 अप्रैल 2023, नई दिल्ली किसानों तक कृषि की जानकारी पहुंचाने में केवीके का सहयोग जरूरी – तीन दिवसीय जी20 के कृषि प्रमुख वैज्ञानिकों (एमएसीएस) की बैठक ‘सस्टेनेबल एग्रीकल्चर एंड फूड सिस्टम फॉर हेल्दी पीपल एंड प्लैनेट’ विषय पर वाराणसी में हुई। बैठक में जी20 के सदस्य देशों के 80 प्रतिनिधियों के अलावा  आमंत्रित अतिथि देशों, अंतर्राष्ट्रीय संगठन और भारत द्वारा विशेष आमंत्रित सदस्यों ने भाग लिया।

डॉ. हिमांशु पाठक, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (भाकृअनुप) तथा श्री फिलिप माउगिन, अध्यक्ष एवं सीईओ, आईएनआरएई – राष्ट्रीय कृषि, खाद्य एवं पर्यावरण अनुसंधान संस्थान (फ्रांस) ने भारत और फ्रांस की द्विपक्षीय बैठक में अपने संबंधित प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। दोनों देशों ने जलवायु परिवर्तन, फसल विविधीकरण, मिट्टी तथा जल संरक्षण, प्राकृतिक खेती और बायोफोर्टिफाइड फसलों से संबंधित विषयों पर सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

डॉ. पाठक ने इस बैठक में कहा कि किसानों तक कृषि संबंधी विस्तार सेवाओं को प्रभावी ढ़ंग से पहुंचाने में केवीके का सहयोग अति महत्वपूर्ण होगा। एफएओ के प्रतिनिधियों ने भी कृषि विस्तार सेवा में सहयोग बढ़ाने में गहरी दिलचस्पी दिखाई। इस बैठक में एफएओ के मुख्य वैज्ञानिक, डॉ. इश्महाने एलौफी तथा एफएओ के वरिष्ठ कृषि अधिकारी डॉ. सेलवाराजू रामास्वामी ने भाग लिया। प्रतिनिधियों ने बीज उत्पादन के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की सराहना किया और कहा कि भारत की बीज उत्पादन के क्षेत्र में अन्य देशों के लिए बहुत बड़ी भूमिका होगी।

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इस बैठक में कृषि खाद्य प्रणाली में परिवर्तन के लिए नवाचार और तकनीकी, खाद्य सुरक्षा और पोषण प्राप्त करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में फ्रंटियर्स, पोषण मूल्य बढ़ाने के लिए खाद्य फसलों में बायोफोर्टिफिकेशन, पोषण और ब्ल्यू क्रांति के लिए उष्णकटिबंधीय समुद्री शैवाल की खेती, श्रीअन्न के उत्पादन एवं पोषण हेतु प्राचीन अनाज अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान पहल (महर्षि), पर एकीकृत दृष्टिकोण के रूप में, समन्वित कार्रवाई के लिए साझेदारी और नीतियों के बनाने पर जोर दिया गया। इसके अलावा अन्य विषयों जैसे – सीमापार कीट और रोग, टिकाऊ कृषि खाद्य प्रणालियों के लिए अनुसंधान एवं विकास प्राथमिकताएँ, टिकाऊ कृषि-खाद्य प्रणालियों के लिए जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकी और नवाचार, प्राकृतिक खेती, रेजिलिएंट एग्रीफूड सिस्टम के निर्माण के लिए विज्ञान और नवाचार, जैविक नाइट्रिफिकेशन इनहिबिशन (बीएनआई), जीएचएस उत्सर्जन को कम करना और फसल की पैदावार बढ़ाने पर चर्चा की गई। प्रतिनिधियों ने डिजिटल कृषि और सतत कृषि मूल्य श्रृंखला, कृषि अनुसंधान एवं विकास में सार्वजनिक निजी भागीदारी एवं मैक्स कम्यूनिके पर विचार-विमर्श किया। 

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कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव श्री मनोज अहूजा, संयुक्त सचिव (बीज) श्री पंकज यादव व अन्य अधिकारी मौजूद थे, वहीं राज्यों और आईसीएआर के प्रमुख अधिकारी वर्चुअल जुड़े थे।

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