मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में भारत–इज़राइल की साझेदारी, ब्लू इकोनॉमी को मिलेगी नई रफ्तार
16 जनवरी 2026, नई दिल्ली: मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर में भारत–इज़राइल की साझेदारी, ब्लू इकोनॉमी को मिलेगी नई रफ्तार – केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री एवं पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 से 15 जनवरी 2026 तक इजराइल का सफल दौरा किया। प्रतिनिधिमंडल ने इजरायल के इलात शहर में आयोजित “ब्लू फूड सिक्योरिटी: सी द फ्यूचर 2026” विषय पर दूसरे ग्लोबल समिट में भाग लिया। यह दौरा मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में भारत और इजरायल के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूती देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
भारत और इजरायल के बीच लंबे समय से रणनीतिक साझेदारी रही है। दोनों देशों का सतत विकास को लेकर साझा दृष्टिकोण है, जिसमें खाद्य सुरक्षा, आजीविका सृजन और आर्थिक विकास के लिए मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर की अहम भूमिका मानी जाती है। इस दौरान भारत के विशाल जलीय संसाधनों और इजरायल की उन्नत जल प्रबंधन एवं एक्वाकल्चर प्रौद्योगिकियों के बेहतर उपयोग पर विशेष रूप से चर्चा हुई।
संयुक्त मंत्रिस्तरीय आशय घोषणा पर हस्ताक्षर
इस दौरे के दौरान दोनों देशों ने पहली बार मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए संयुक्त मंत्रिस्तरीय आशय घोषणा (Joint Ministerial Declaration of Intent) पर हस्ताक्षर किए। यह घोषणा आपसी हित के कई क्षेत्रों में सहयोग के लिए एक व्यापक ढांचा तैयार करती है।
तकनीकी, अनुसंधान और नवाचार पर फोकस
घोषणा के तहत उन्नत एक्वाकल्चर प्रौद्योगिकियों जैसे रिसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS), बायोफ्लॉक, केज कल्चर, एक्वापोनिक्स तथा ओशनरियम और एक्वेरियम सिस्टम में संयुक्त अनुसंधान और विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ ही उच्च उपज वाली मछली प्रजातियों के प्रजनन, रोगजनक-मुक्त बीज विकास, ब्रूडस्टॉक सुधार और आनुवंशिक सुधार कार्यक्रमों में सहयोग पर सहमति बनी है।
जल प्रबंधन और मैरीकल्चर में सहयोग
इजरायल की जल-बचत तकनीकों के माध्यम से एक्वाकल्चर में बेहतर जल प्रबंधन को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके अलावा समुद्री शैवाल की खेती सहित मैरीकल्चर के क्षेत्र में भी सहयोग को विस्तार देने का निर्णय लिया गया है।
स्टार्टअप, ब्लू इकोनॉमी और सतत मत्स्य पालन
संयुक्त घोषणा में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर से जुड़े स्टार्टअप्स के आदान-प्रदान और समर्थन पर ज़ोर दिया गया है, जिससे ब्लू इकोनॉमी को नई गति मिलेगी। साथ ही समुद्री संसाधनों के संरक्षण, पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने और मत्स्य संसाधनों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए टिकाऊ और ज़िम्मेदार मछली पकड़ने की पद्धतियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी है।
तकनीक आधारित निगरानी और क्षमता निर्माण
दोनों देश तकनीक-आधारित मत्स्य पालन निगरानी और डेटा-संग्रह प्रणालियों में सहयोग करेंगे, जिससे प्रमाण-आधारित प्रबंधन, पारदर्शिता और ट्रेसेब्लिटी को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही मछुआरों और जलीय किसानों की सामाजिक-आर्थिक ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए क्षमता निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसमें गहरे समुद्र में मछली पकड़ने, जहाज़ों के डिज़ाइन और विकास, तटीय जलीय कृषि और समुद्री संसाधन संरक्षण से जुड़ी पहल शामिल होंगी।
प्रशिक्षण, एक्सचेंज प्रोग्राम और बुनियादी ढांचा
घोषणा के अंतर्गत मछुआरों, जलीय किसानों, वैज्ञानिकों और नीति निर्माताओं के लिए एक्सचेंज कार्यक्रमों की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। इसके साथ ही आधुनिक मछली प्रसंस्करण, विपणन और बुनियादी ढांचे के विकास पर प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिसमें मछली पकड़ने के बंदरगाह और मछली उतारने के केंद्र भी शामिल हैं।
द्विपक्षीय व्यापार और उत्कृष्टता केंद्र
भारत और इजरायल मत्स्य पालन और जलीय कृषि से जुड़े निर्यात-आयात को आसान बनाने, टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं को दूर करने तथा प्रौद्योगिकी-संचालित ट्रेसेब्लिटी सिस्टम को बढ़ावा देने के लिए बातचीत के माध्यम से द्विपक्षीय व्यापार को मजबूत करेंगे। इसके अलावा दोनों देश मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के लिए नए भारत–इज़राइल उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की संभावनाएं तलाशेंगे, जो पहले से संचालित 43 कृषि उत्कृष्टता केंद्रों की तर्ज पर होंगे।
यह ऐतिहासिक समझौता दोनों देशों में मत्स्य पालन और एक्वाकल्चर के क्षेत्र में नवाचार, स्थिरता और आर्थिक विकास के नए अवसर खोलेगा। साथ ही खाद्य सुरक्षा और जलवायु-लचीले विकास के प्रति भारत और इजरायल की साझा प्रतिबद्धता को और सशक्त करेगा।
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