भारत अब चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है

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6 अगस्त 2022, नई दिल्ली: भारत अब चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है -.पिछले कुछ वर्षों के दौरान, देश में चीनी का उत्पादन घरेलू खपत से लगातार अधिक रहा है, जिससे अधिशेष की स्थिति बनती रही। देश में अतिरिक्त चीनी की समस्या का समाधान करने के लिए, केंद्र सरकार पिछले कुछ चीनी सीजन के दौरान चीनी मिलों को अतिरिक्त चीनी को इथेनॉल के लिए देने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके साथ ही मिलों को अतिरिक्त चीनी का निर्यात करने की भी सुविधा दी जा रही है जिससे चीनी मिलों के पास धनराशि बढ़े और वे गन्ना किसानों का भुगतान कर सकें। हाल के समय में चीनी के निर्यात और चीनी को इथेनॉल में बदलने से भी मांग-आपूर्ति संतुलन बनाए रखने और देश में चीनी की कीमतों को स्थिर करने में मदद मिली है। चीनी सीजन 2018-19 (अक्टूबर-सितंबर) से चीनी निर्यात और इथेनॉल में चीनी के डायवर्जन का विवरण इस प्रकार है:

लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) में}

चीनी सीजन2018-192019-202020-212021-22
चीनी का इथेनॉल में इस्तेमाल392235
निर्यात385970100 (01.08.2022 तक)
भारत अब चीनी का सबसे बड़ा उत्पादक और दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक देश है

दुनियाभर के हालात को ध्यान में रखते हुए देखें, तो भारत से किसी भी तरह के अनियंत्रित निर्यात से संकट (कमी का) पैदा हो सकता है; और स्थानीय कीमतें सितंबर-नवंबर 2022 की अवधि के दौरान बढ़ सकती हैं। सरकार खाद्य महंगाई को लेकर भी चिंतित है। ऐसे में, देश में घरेलू खपत के लिए उचित मूल्य पर चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहे, इसके लिए सरकार ने मई 2022 में 100 एलएमटी से अधिक चीनी के निर्यात को रोक दिया। निर्यातकों के साथ-साथ चीनी मिलों को जून 2022 में निर्यात के लिए 10 एलएमटी तक के निर्यात रिलीज ऑर्डर (ईआरओ) जारी किए गए थे। 1 अगस्त 2022 तक लगभग 100 एलएमटी निर्यात किया गया है।

मौजूदा चीनी सीजन में 1 अगस्त 2022 तक 100 एलएमटी चीनी के निर्यात से चीनी मिलों के पास 33,000 करोड़ रुपये तक धनराशि आएगी, जिससे वे किसानों के गन्ने का बकाया चुका सकें। आगे और 12 एलएमटी चीनी का निर्यात करने से चीनी मिलों के पास 3600 करोड़ रुपये तक की धनराशि आएगी, जिससे वो किसानों का बकाया चुका सकेंगे। 4 अगस्त 2022 तक गन्ना किसानों का बकाया 9700 करोड़ रुपये के करीब है। इस सीमा तक चीनी के निर्यात से विदेशी मुद्रा हासिल करने और व्यापार घाटे को भी कम करने में मदद मिलेगी।

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