राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

मत्स्य पालन और जलीय कृषि में भारत-इजराइल का बड़ा कदम, सहयोग बढ़ाने पर सहमति

17 जनवरी 2026, नई दिल्ली: मत्स्य पालन और जलीय कृषि में भारत-इजराइल का बड़ा कदम, सहयोग बढ़ाने पर सहमति – केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और दुग्ध उत्पादन मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने 13 से 15 जनवरी 2026 के दौरान इज़राइल के ईलात में आयोजित “ब्लू फूड सिक्योरिटी: सी द फ्यूचर 2026” विषय पर दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन में भाग लिया। यह आधिकारिक यात्रा मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में भारत और इज़राइल के बीच द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

उद्घाटन सत्र में मंत्रिस्तरीय संवाद

शिखर सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में मंत्री महोदय ने इज़राइल के कृषि एवं खाद्य सुरक्षा मंत्री श्री अवि डिक्टर, क्षेत्रीय सहयोग मंत्री श्री डेविड एमसलेम, वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। इस वैश्विक कार्यक्रम में घाना, जॉर्जिया और अज़रबैजान के मंत्रियों सहित कई देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, वहीं जॉर्डन, मोरक्को, रोमानिया और फिलीपींस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

वैश्विक पैनल चर्चा में भारत की उपलब्धियों पर प्रकाश

मंत्री राजीव रंजन सिंह ने खाद्य सुरक्षा और नीली अर्थव्यवस्था पर आयोजित वैश्विक मंत्रिस्तरीय पैनल चर्चा में भाग लेते हुए मत्स्य पालन क्षेत्र में भारत की उल्लेखनीय उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने वैश्विक मत्स्य पालन और जलीय कृषि को मजबूत करने में भारत की बढ़ती भूमिका पर जोर दिया और सतत नीली अर्थव्यवस्था, नवाचार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग तथा जिम्मेदार संसाधन प्रबंधन के प्रति भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

एग-टेक इनोवेशन प्रदर्शनी और स्टार्टअप्स से संवाद

इस यात्रा के दौरान मंत्री महोदय ने इज़राइल के कृषि मंत्री द्वारा उद्घाटित एग-टेक इनोवेशन प्रदर्शनी का दौरा किया। यहां उन्होंने मत्स्य पालन, जलीय कृषि, ब्लू फूड और समुद्री नवाचार के क्षेत्र में कार्यरत स्टार्टअप्स के साथ संवाद किया। इस अवसर पर सतत क्षेत्रीय विकास को गति देने में प्रौद्योगिकी और नवाचार की भूमिका पर विशेष जोर दिया गया।

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द्विपक्षीय बैठकों में सहयोग विस्तार पर चर्चा

मंत्री महोदय ने अपने इज़राइली समकक्ष श्री अवि डिक्टर और अन्य सहभागी देशों के मंत्रियों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। इज़राइल के कृषि मंत्री के साथ हुई चर्चा में व्यापार, क्षमता निर्माण, स्टार्टअप आदान-प्रदान, संयुक्त अनुसंधान एवं विकास, सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान और समुद्री कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनी।

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संयुक्त मंत्रिस्तरीय आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर

इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण भारत और इज़राइल के बीच मत्स्य पालन और जलीय कृषि सहयोग पर संयुक्त मंत्रिस्तरीय आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर रहा। यह घोषणापत्र प्रौद्योगिकी और नवाचार, टिकाऊ मत्स्य पालन पद्धतियों, क्षमता निर्माण और व्यापार में सहयोग के प्रति दोनों देशों की पारस्परिक प्रतिबद्धता को दर्शाता है और संयुक्त उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना की नींव रखता है।

घाना के साथ भी सहयोग की संभावनाएं

मंत्री महोदय ने घाना की मत्स्य पालन और जलीय कृषि विकास मंत्री सुश्री एमेलिया आर्थर से भी मुलाकात की। इस बैठक में सतत विकास और ज्ञान के आदान-प्रदान पर ध्यान केंद्रित करते हुए द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करने के अवसरों पर चर्चा की गई।

इजराइल उद्योग प्रतिनिधियों से तकनीकी संवाद

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने इज़राइली उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी मुलाकात की, जिनमें—

एक्वाकल्चर प्रोडक्शन टेक लिमिटेड के सीईओ श्री एली गोल्डबर्ग, जिन्होंने जल-कुशल और उन्नत मत्स्य पालन प्रौद्योगिकियों पर जानकारी दी;

2. वायाक्वा थेरेप्यूटिक्स लिमिटेड के सीईओ श्री शाई उफाज़, जिन्होंने झींगा स्वास्थ्य और जैव सुरक्षा के लिए आरएनए-आधारित समाधानों पर चर्चा की;

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3. बार एल्गी के सीईओ श्री डोरोन आइज़ेनस्टैड, जिन्होंने हैचरी उत्पादकता और बीज गुणवत्ता बढ़ाने के लिए उन्नत माइक्रोएल्गी प्रौद्योगिकियों पर प्रकाश डाला।

राष्ट्रीय मत्स्य पालन केंद्र और सीनोवेशन इनोवेशन सेंटर का दौरा

प्रतिनिधिमंडल ने ईलात स्थित राष्ट्रीय मत्स्य पालन केंद्र (एनसीएम) का दौरा किया, जहां ब्रूडस्टॉक विकास, हैचरी प्रौद्योगिकियों, आईएमटीए मॉडल और रोग प्रबंधन पर चर्चा हुई। इसके अलावा, प्रतिनिधिमंडल ने सीनोवेशन इनोवेशन सेंटर का भी दौरा किया, जिसका उद्देश्य भारत-इज़राइल सहयोग के व्यावहारिक रास्ते तलाशना और उन्नत तकनीकों को भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल बनाना रहा।

रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया बल

यह दौरा भारत और इज़राइल के बीच बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक संबंधों को रेखांकित करता है। इससे मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र में सहयोग को नई गति मिलने के साथ-साथ दीर्घकालिक साझेदारी और पारस्परिक हित के क्षेत्रों में नए सहयोग मार्ग खुलने की उम्मीद है।

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