राष्ट्रीय कृषि समाचार (National Agriculture News)

ICAR-CIFA ने जारी किया पीएमएमएसवाई प्रशिक्षण कैलेंडर, 22 हजार से अधिक मछली पालकों को मिलेगा लाभ

12 जनवरी 2026, नई दिल्ली: ICAR-CIFA ने जारी किया पीएमएमएसवाई प्रशिक्षण कैलेंडर, 22 हजार से अधिक मछली पालकों को मिलेगा लाभ – प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के तहत मत्स्य पालन क्षेत्र में कौशल विकास और क्षमता निर्माण को नई गति देने के उद्देश्य से आईसीएआर–केंद्रीय मीठा जल जीवपालन अनुसंधान संस्थान (ICAR-CIFA), भुवनेश्वर द्वारा वर्ष 2025–2027 के लिए प्रशिक्षण एवं क्षमता निर्माण कार्यक्रम कैलेंडर जारी किया गया है। यह कैलेंडर राष्ट्रीय मत्स्य किसान दिवस के अवसर पर केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री श्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) द्वारा जारी किया गया। इसका उद्देश्य मछुआरों और मछली पालकों को आधुनिक तकनीकों से जोड़कर उनकी उत्पादकता और आय में वृद्धि करना है।

जारी किए गए इस प्रशिक्षण कैलेंडर के माध्यम से देशभर में 22 हजार से अधिक मछली पालकों, मछुआरों और अन्य हितधारकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की संभावना है। यह पहल पीएमएमएसवाई के उस विजन को साकार करती है, जिसमें मत्स्य पालन मूल्य श्रृंखला के आधुनिकीकरण, उत्पादन बढ़ाने और उत्पादन के बाद होने वाले नुकसान को कम करने पर विशेष जोर दिया गया है। संरचित प्रशिक्षण, अनुभवात्मक भ्रमण और ज्ञान साझा करने की गतिविधियों के माध्यम से मत्स्य क्षेत्र को अधिक लाभकारी और टिकाऊ बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

इस पहल के जरिए मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र को विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप आगे बढ़ाने की दिशा में एक मजबूत आधार तैयार किया गया है, जिससे रोजगार सृजन, पोषण सुरक्षा और ग्रामीण आजीविका को मजबूती मिलेगी।

व्यापक प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीकों पर फोकस

प्रशिक्षण कार्यक्रमों में पूर्व-उत्पादन, उत्पादन और पश्चात-उत्पादन के सभी पहलुओं को शामिल किया गया है। इसमें मछली बीज उत्पादन, उन्नत विकास तकनीकें, एकीकृत एवं मिश्रित मछली पालन, मछली स्वास्थ्य प्रबंधन, चारा निर्माण, समुद्री शैवाल की खेती और मूल्यवर्धित मछली प्रसंस्करण पर विशेष ध्यान दिया गया है। इसके साथ ही पुनर्संचारी मत्स्य पालन प्रणाली (RAS), बायोफ्लॉक, पिंजरा संस्कृति और सजावटी मछली प्रजनन जैसी आधुनिक प्रणालियों पर भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।

अनुभवात्मक भ्रमण और रोजगार-केंद्रित पहल

कैलेंडर में अखिल भारतीय स्तर पर संरचित अनुभवात्मक भ्रमण, कार्यशालाएं, सम्मेलन और प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण (ToT) भी शामिल है, जिससे प्रतिभागियों को व्यावहारिक ज्ञान और उन्नत तकनीकों को प्रत्यक्ष रूप से समझने का अवसर मिलेगा। महिलाओं को लक्षित मूल्यवर्धित मत्स्य उत्पादों, सजावटी मत्स्य पालन और मछली विपणन संबंधों पर भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम रखे गए हैं।

2.93 करोड़ रुपये का बजट, एनएफडीबी करेगा क्रियान्वयन

मत्स्य पालन विभाग द्वारा प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के लिए 2.93 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इन कार्यक्रमों का क्रियान्वयन राष्ट्रीय मत्स्य विकास बोर्ड (NFDB), हैदराबाद के माध्यम से किया जाएगा। मछुआरों और मछली पालकों के प्रशिक्षण से जुड़ा पूरा खर्च केंद्र सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

पिछले छह महीनों में 22,921 प्रतिभागियों को मिला लाभ

राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशों के मत्स्य विभाग, आईसीएआर मत्स्य अनुसंधान संस्थान, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), भारतीय कृषि कौशल परिषद (ASCI) और अन्य संस्थानों के सहयोग से पिछले छह महीनों में 499 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनसे 22,921 प्रतिभागियों को लाभ मिला है।

मत्स्य क्षेत्र के भविष्य को मजबूत आधार

आईसीएआर-CIFA और मत्स्य पालन विभाग के नेतृत्व में शुरू की गई यह पहल न केवल मछली पालकों को आधुनिक ज्ञान और कौशल से सशक्त बना रही है, बल्कि मत्स्य पालन एवं जलीय कृषि क्षेत्र के दीर्घकालीन विकास, रोजगार सृजन और देश के सामाजिक-आर्थिक सशक्तिकरण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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