काला चावल भी एक्सपोर्ट हो सकता है

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22 जुलाई 2021, नई दिल्ली । काला चावल भी एक्सपोर्ट हो सकता है – मणिपुरी ब्लैक राईस जिसे स्थानीय रूप से चक-हाओ कहा जाता है, को वर्ष 2020 में भौगोलिक सूचक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। ब्लैक राईस की खेती ने मणिपुर और असम जैसे पूर्वोत्तर राज्यों के अलावा पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखण्ड, बिहार, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में कुछ जिलों में लोकप्रियता हासिल की। उत्तर प्रदेश के चंदोली जिले में आकांक्षी जिले के तहत ब्लैक राईस की खेती की गई।

काले चावल की खेती पर श्री बृजेन्द्र सिंह सांसद हिसार (हरियाणा) द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में केन्द्रीय कृषि मंत्री श्री तोमर ने स्पष्ट किया कि सरकार  राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) के तहत चावल के विभिन्न प्रकारों की खेती के लिए राज्यों को सहायता प्रदान कर रही है। इस उत्पाद को ब्रांड बनाया गया है और ‘विंध्य ब्लैक राईसÓ के नाम से बाजार में बेचा जाता है। ब्लैक राईस किस्मों में निर्यात की क्षमता है। परंतु विभाग के पास ब्लैक राईस के निर्यात का कोई डाटा नहीं है अपेडा के अनुसार गत वर्ष 2020-21 में प्रमुख आयातक देशों को भारत से गैर-बासमती चावल 110.98 लाख टन निर्यात किया गया है।

चावल के प्रमुख आयातक देश हैं- नेपाल, टोगो, सेनेगल, बांग्लादेश, संयुक्त अरब अमीरात, इराक आदि।

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