उर्वरक उत्पादन में उपयोग होने वाला एनहाइड्रस अमोनिया हुआ सस्ता, 40 इनपुट पर शून्य आयात शुल्क
03 अप्रैल 2026, नई दिल्ली: उर्वरक उत्पादन में उपयोग होने वाला एनहाइड्रस अमोनिया हुआ सस्ता, 40 इनपुट पर शून्य आयात शुल्क – केंद्र सरकार ने उर्वरक और कृषि से जुड़े उद्योगों को राहत देने के उद्देश्य से एनहाइड्रस अमोनिया सहित 40 प्रमुख रासायनिक इनपुट, इंटरमीडिएट और पॉलिमर उत्पादों पर आयात शुल्क को शून्य (Nil) कर दिया है। यह निर्णय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा अधिसूचना संख्या 12/2026-सीमाशुल्क के तहत लिया गया है।
यह छूट 2 अप्रैल 2026 से लागू होकर 30 जून 2026 तक प्रभावी रहेगी, जिससे उद्योगों को कच्चे माल की लागत में तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।
इस अधिसूचना में शामिल एनहाइड्रस अमोनिया विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह नाइट्रोजन आधारित उर्वरकों (जैसे यूरिया) के निर्माण का मुख्य कच्चा माल है। इसके सस्ता होने से उर्वरक उत्पादन लागत में कमी आ सकती है, जिसका अप्रत्यक्ष लाभ किसानों तक पहुंचने की संभावना है।
सरकार ने इस फैसले के तहत मुख्य रूप से बेसिक केमिकल, पेट्रोकेमिकल इंटरमीडिएट और पॉलिमर को शामिल किया है, जो उर्वरक, कीटनाशक निर्माण, सिंचाई पाइप, मल्च फिल्म, ग्रीनहाउस प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग में व्यापक रूप से उपयोग होते हैं।
इसके अलावा, एक अन्य अधिसूचना (सं. 13/2026) के तहत अमोनियम नाइट्रेट पर कृषि अवसंरचना एवं विकास उपकर (AIDC) को भी शून्य कर दिया गया है, जिससे उर्वरक क्षेत्र को अतिरिक्त समर्थन मिलेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब वैश्विक बाजार में कच्चे माल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इससे घरेलू उद्योगों को प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और कृषि इनपुट की उपलब्धता बेहतर हो सकती है।
हालांकि, किसानों तक इसका पूरा लाभ पहुंचने के लिए यह जरूरी होगा कि उद्योग इन लागत लाभों को अंतिम उत्पादों की कीमतों में दर्शाएं।
शून्य आयात शुल्क वाले उत्पादों की पूरी सूची (टैरिफ कोड सहित)
| क्रम संख्या | टैरिफ कोड | वस्तु का नाम | शुल्क दर |
|---|---|---|---|
| 1 | 2814 10 00 | एनहाइड्रस अमोनिया | शून्य |
| 2 | 2902 30 00 | टोल्युइन | शून्य |
| 3 | 2902 50 00 | स्टाइरीन | शून्य |
| 4 | 2903 12 00 | डाइक्लोरोमीथेन | शून्य |
| 5 | 2903 21 00 | विनाइल क्लोराइड मोनोमर | शून्य |
| 6 | 2905 11 00 | मेथनॉल | शून्य |
| 7 | 2905 12 20 | आइसोप्रोपाइल अल्कोहल | शून्य |
| 8 | 2905 31 00 | मोनोएथिलीन ग्लाइकोल (MEG) | शून्य |
| 9 | 2907 11 10 | फिनॉल | शून्य |
| 10 | 2915 21 00 | एसीटिक एसिड | शून्य |
| 11 | 2915 32 00 | विनाइल एसीटेट मोनोमर | शून्य |
| 12 | 2917 36 00 | पीटीए | शून्य |
| 13 | 2921 21 00 | एथिलीनडायमीन | शून्य |
| 14 | 2922 | डाइ/मोनो एथेनोलामीन | शून्य |
| 15 | 2929 10 20 | टोल्युइन डाय-आइसोसाइनेट | शून्य |
| 16 | 3102 30 00 | अमोनियम नाइट्रेट | शून्य |
| 17 | 3817 00 11 | लीनियर एल्किलबेंजीन | शून्य |
| 18 | 3901 | एथिलीन पॉलिमर | शून्य |
| 19 | 3902 | पॉलीप्रोपाइलीन | शून्य |
| 20 | 3903 | पॉलीस्टाइरीन | शून्य |
| 21 | 3903 20 00 | SAN | शून्य |
| 22 | 3903 30 00 | ABS | शून्य |
| 23 | 3904 | PVC | शून्य |
| 24 | 3904 61 00 | PTFE | शून्य |
| 25 | 3905 | पॉली विनाइल एसीटेट | शून्य |
| 26 | 3905 30 00 | पॉली विनाइल अल्कोहल | शून्य |
| 27 | 3906 | PMMA | शून्य |
| 28 | 3907 10 00 | POM | शून्य |
| 29 | 3907 29 | पॉलीऑल्स | शून्य |
| 30 | 3907 29 90 | PEEK | शून्य |
| 31 | 3907 30 10 | एपॉक्सी रेजिन | शून्य |
| 32 | 3907 40 00 | पॉलीकार्बोनेट | शून्य |
| 33 | 3907 50 00 | एल्किड रेजिन | शून्य |
| 34 | 3907 61/69 | PET चिप्स | शून्य |
| 35 | 3907 91 20 | अनसैचुरेटेड पॉलिएस्टर | शून्य |
| 36 | 3907 91 50 | PBT | शून्य |
| 37 | 2912/3909 | फॉर्मल्डिहाइड आधारित रेजिन | शून्य |
| 38 | 3909 50 00 | पॉलीयूरीथेन | शून्य |
| 39 | 3911 90 90 | PPS | शून्य |
| 40 | 4002 | स्टाइरीन ब्यूटाडीन रबर | शून्य |
(स्रोत: भारत सरकार की राजपत्र अधिसूचना)
सरकार का यह निर्णय उर्वरक और कृषि-आधारित उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण राहत के रूप में देखा जा रहा है। खासकर एनहाइड्रस अमोनिया जैसे प्रमुख कच्चे माल पर शुल्क शून्य होने से उर्वरक उत्पादन लागत पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
आपने उपरोक्त समाचार कृषक जगत वेबसाइट पर पढ़ा: हमसे जुड़ें
> नवीनतम कृषि समाचार और अपडेट के लिए आप अपने मनपसंद प्लेटफॉर्म पे कृषक जगत से जुड़े – गूगल न्यूज़, व्हाट्सएप्प
> कृषक जगत अखबार की सदस्यता लेने के लिए यहां क्लिक करें – घर बैठे विस्तृत कृषि पद्धतियों और नई तकनीक के बारे में पढ़ें
> कृषक जगत ई-पेपर पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: E-Paper
> कृषक जगत की अंग्रेजी वेबसाइट पर जाने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें: Global Agriculture

