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लौह इरादों वाले संदीप लोहान

11 अगस्त 2021, इंदौर । बंजर जमीन से कर रहे करोड़ों की कमाई – यदि आपके इरादों में इस्पात सी मजबूती हो, तो जटिल कार्य भी आसान हो जाते हैं, बस, करने का जुनून होना चाहिए। इस बात को साबित किया है मंडला जिले के ग्राम सिंगारपुर के युवा, उन्नत कृषक श्री संदीप लोहान ने। इन्होने 12 वर्ष पूर्व 150 एकड़ बंजर और उबड़-खाबड़ जमीन को समतल कर फसल उगाने का फैसला किया था। हालाँकि तब कई लोगों, यहां तक की कृषि विशेषज्ञों ने भी मना किया था, लेकिन उनके इस्पाती इरादों ने हार नहीं मानी और फसल उगाई। आज वे 500 से अधिक लोगों को रोजगार देने के साथ टमाटर, हरी मिर्च और शिमला मिर्च को देश-विदेश में भेजकर करोड़ों की कमाई कर रहे हैं।

श्री संदीप लोहान ने कृषक जगत को बताया कि हरी मिर्च, टमाटर और शिमला मिर्च के अलावा 2017 में सेब के 26 पेड़ लगाए थे, जिनमें 2019 -20 में थोड़े फल लगे लेकिन 2021 में एक पेड़ पर करीब 300-400 फल (वजन करीब 40 किलो) लगे। फार्म हाऊस की पथरीली जमीन पर अब टमाटर 80-100 टन/ एकड़, शिमला मिर्च 70 टन/एकड़, हरी मिर्च 40 टन/एकड़,करेला 15 टन/ एकड़ और लौकी 40 टन/ एकड़ उत्पादन होता है। इसके अलावा इनके बगीचे में निम्बू, एलोवेरा आदि भी लगे हुए हैं। पॉली हाउस की नर्सरी में खुद ही पौधे तैयार करते हैं। इन्होंने गत दिनों बिना मल्चिंग के पथरीली जमीन पर बैंगन भी लगाए हैं। देखते हैं यह प्रयोग कितना सफल होता है।

उल्लेखनीय है कि लोहान फार्म हाऊस की प्रसिद्धि मंडला जिले तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां प्रदेश के दमोह, हरदा, सागर जैसे जिलों के कई किसान, सरकारी और गैर सरकारी संगठन, एनजीओ आकर खेती की तकनीक जानते हैं और सलाह लेते हैं। इजराइल सहित अन्य देशों की यात्रा कर वहां की तकनीक को अपनाकर श्री लोहान ने अपनी खेती को उन्नत बनाया है। इनके फार्म हाऊस पर 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिल रहा है। इससे मजदूरों के साथ -साथ इन्हें भी आत्मिक ख़ुशी मिलती है। यहां पौधों को पोषक तत्वों और पानी की जरूरत की निगरानी मशीनों द्वारा की जाती है। यहां की हरी मिर्च, टमाटर और शिमला मिर्च देश-विदेश में बिकती है। विशेष किस्म की लाल मिर्च की मांग अफ्रीकन देशों में खूब है। खास बात यह है कि इस विशेष लाल मिर्च का उत्पादन देश के कुछ ही हिस्सों में होता है, जिसमें मंडला भी शामिल है। विशेषत: उद्यानिकी फसलों से करोड़ों की कमाई करने वाले श्री लोहान के खाते में लोगों की दुआएं भी बहुत जमा हुई है। लॉक डाउन के दौरान मंडला और डिंडोरी जिलों के 5 हजार जरूरतमंद परिवारों को रोजाना मुफ्त सब्जी देकर मानवता की मिसाल पेश की है। सब्जियों की तुड़ाई का व्यय भी इन्होंने स्वयं वहन किया। उनके इस सेवाभाव की सभी ने सराहना की।

ऐसे कामयाब किसान की कहानी से अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं, खासतौर से वे किसान जो अपनी बंजर और पथरीली जमीन से निराश हैं। उनके सामने इन्होंने विकास की नई इबारत लिख दी है।

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