पॉलीथिन बैग में कद्दूवर्गीय सब्जियों की पौध तैयार करें

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पॉलीथिन बैग में कद्दूवर्गीय सब्जियों की पौध तैयार करें

पौध तैयार करने की विधि

प्रतिकूल परिस्थितियों में जहां खेत की तैयारी के लिए समय नहीं मिलता नमी के अभाव में बीज का जमाव नहीं होता ऐसी स्थिति में पौध को तैयार कर लेना ही अच्छा होता है। लौकी, करेला, नेनुवा, तोरई, खरबूज, तरबूज इत्यादि की पौध वैज्ञानिक सूझ-बूझ से पॉलीथिन की 20 & 10 से.मी. लम्बी गोल आकर वाली थैली जिसकी मोटाई 200 से 300 गेज हो उसको पौध उगने के लिए प्रयोग में लेते है। प्रत्येक थैली में शोधित उर्वरक मिश्रण भरकर उसमें 2 या 3 बीज डालकर ऐसे जगह पर रख देते है जहां पर बीज का जमाव सुचारु रूप से हो सके। जैसे वर्षा के मौसम में किसी छायादार स्थान पर घास-फूस, सरकंडे, पुआल के छत के नीचे और शारद ऋतु में गर्म स्थान पैर, पाली हाउस या कमरों में जहां प्रकाश मिलता रहे रखें। ध्यान रखें की पॉलीथिन में 2-3 जगह छेद अवश्य कर दें जिससे हवा जाती रहे और आवश्यकता से अधिक पानी बहार निकाल दें। कोशिश करें कि पौधों के ऊपर फुहारे से सिंचाई करें। जब पौधों में 4-5 पत्तियां निकल आयें तथा बाहर का वातावरण अनुकूल हो तो उनका खेत में रोपण कर दें। पौधों को रोपण करने से पहले जहां पौधों को लगाना है उपयुक्त दूरी पर गड्ढे बना लें। पौध रोपण से पहले पॉलीथिन की थैलियों को ब्लेड से खड़ा चीरा लगा दें और तैयार गड्ढों में पौध को अच्छे से सीधे रखकर मिट्टी को अच्छी तरह से दबादें।  पौध की रोपाई के उपरांत उसमे हल्की सिंचाई कर दें। उर्वरक मिश्रण बनाते समय कीटनाशक क्लोरोपायरीफास नामक दवा को 200 ग्राम प्रति 100 किलो ग्राम मिश्रण की दर से मिला दें जिससे कटुवा, दीमक तथा लालकीट का प्रभाव कम हो जायेगा।  

प्रतिकूल मौसम जैसे वर्षा ऋतु में तेज हवा बारिश एवं ठंडी तथा बहुत गर्मी में बीजों की बुवाई सीधे खेतों में करना संभव नहीं हो पाता है। कभी-कभी बारिश के मौसम में खेत की तैयारी के लिए समय कम पड़ जाता है। जिससे आगे की फसल में देरी हो जाती है, जिससे किसान को घाटा हो जाता है। ज्यादातर ये समस्या गर्मी एवं बरसात के समय में लगने वाली सब्जियों में होती है। अगर किसी तरह से पहले पौध तैयार कर ली जाय तो कम समय में समय से पौध रोपण कर अधिक उपज एवं आय प्राप्त की जा सकती।  इन मौसम में कद्दूवर्गीय सब्जियां ज्यादा उगाई जाती हैं। जबकि कद्दूवर्गीय सब्जियों को उखाड़कर एक जगह से दूसरी जगह नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि उसमें सुबेरिन नमक रसायन होता है जो पौधों में खनिज एवं पानी अवशोषण करने वाली कोशिका को बंद कर देता है। जिससे पौधा मर जाता है। परन्तु पौध को ऐसे तैयार किया जाय की पौध को उखाडऩा ही न पड़े और उसको सीधे ही रोपण कर दिया जाय। इस तरह से पौध तैयार करने के लिए प्लास्टिक कल्चरिंग के द्वारा संभव है। प्लास्टिक कल्चरिंग में पौध पॉलीथिन बैग में तैयार कर लेते हैं और उस पौधे को बिना उखाड़े पॉलीथिन को काटकर हटा देते हैं और सीधे तैयार गड्ढे में ले जाकर लगा देते है।

अनुमानित पौध की आवश्यकता 

सामान्यतया यह देखा गया है कि संस्तुत और आवश्यक बीज की मात्रा में काफी अन्तर होता है परन्तु यदि हम पौधों की आवश्यकता को सुनिश्चित कर लें तो बीज की मात्रा के निर्धारण में सुगमता हो जाती है। अग्र लिखित सारणी में कद्दूवर्गीय पौध की आवश्यकतानुसार संख्या दी गयी है। 

सावधानियां

पॉलीथिन बैग में पौध तैयार करने से लेकर पौध रोपण तक अगर सावधान रहा जाय तो पौध के मरने की संभावना कम हो जाती है और बीज नुकसान होने से बच जाता है साथ ही साथ किसान की मेहनत और उसकी पूंजी भी जाया नहीं जाती। पॉलीथिन में बीज बोने के समय उसकी मिट्टी में उचित नमी होनी चाहिए तथा बीज शोधित हो। हल्की सिंचाई आवश्यकतानुसार छिड़काव द्वारा ही करें। रोपण के समय गड्ढे की साईज पौध पॉलीथिन बैग के बराबर हो नहीं तो पौध के स्थान पर गड्ढा रह जायेगा और सिंचाई के समय पानी जमने लगेगा। पौध लगाते समय पॉलीथिन में खड़ा चीरा लगा दे जिससे जडं़े विकसित होंगी। पॉलीथिन बैग में बीज को डालने के बाद छायादार स्थान में रखें। अगर किसान इस तरह से पौध तैयार करते हंै तो उनकी बुवाई प्रतिकूल समय में भी समय से और आज के समय में जब संकर प्रजाति महंगी है उसमें ज्यादातर पौध को बिना नुकसान के उगाया जा सकता है। परिणाम स्वरुप किसान की आय में वृद्धि होगी।

कद्दूवर्गीय सब्जियों के तैयार पौधों की आवश्यकता
फसल पौध की आवश्यकता
कद्दू, कुम्हड़ा 900-1000
लौकी 1000-2000
तरबूज, आरातोरी, चिकनीतोरी, पेठा 1150-1350
खरबूज, ककड़ी 2250-2500
करेला, खीरा, टिंडा 3000-3500
स्वैश 3500-4000
  • ज्ञानेंद्र कुमार राय
  • रंजीत रंजन कुमार
  • शैली परवीन
  • सुशील शर्मा  

जैव प्रौद्योगिकी स्कूल, शेर-ए -कश्मीर कृषि एवं प्रौद्यौगिकी विश्वविद्यालय, जम्मू
जैव रसायन संभाग, भारतीय कृषि अनुसंधान संसथान, नईदिल्ली
gkrai75@gmail.com

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