फूलों की खेती मुनाफे की

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें

25 जनवरी 2021 भोपाल। वर्तमान संदर्भ में खेती को लाभकारी बनाने के प्रयास जोर शोर से किये जा रहे हैं। खेत के कुछ भाग में फल वृक्ष, पशुपालन, मशरूम पालन, मछली पालन करके मिश्रित खेती की ओर कृषकों को आकर्षित किया जा रहा है ताकि मिश्रित खेती की आय से खेती का स्तर घाटे से उठकर मुनाफे की ओर बढ़ जाये। इसके पहले मिश्रित खेती के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की जा चुकी है। मिश्रित खेती में फूलों की खेती के महत्व और उसका विकास, विस्तार किये जाने की अपार संभावनायें हैं, फूलों की खेती आदिकाल से की जाती रही है। जब से सृष्टि का प्रार्दुभाव हुआ तब से फूल का भी अस्तित्व सामने आया। देवता के युग में भी पौराणिक कथाओं में विभिन्न पुष्प और देव विशेष का संदर्भ सभी जानते हैं। विष्णु के हाथ में कमल, शंकर के लिये धतूरा, देवी के लिये जासोन इस प्रकार फूलों का इतिहास बहुत पुराना है। वर्तमान में गेंदे के फूल का विस्तार शीघ्रता से हो रहा है। उसका कारण है कि थोड़ी से रखरखाव में गेंदा अच्छी तरह लगाया जा सकता है। गेंदे के फूलों की मांग माला बनाने के उद्देश्य से अधिक होती है। माला जिसका उपयोग देवी-देवता से लेकर नेता, अभिनेताओं सभी के लिये किया जाना एक आम बात है। माला पहनाकर संबंधों को गहरा बनाने के उद्देश्य से शादी-विवाहों में वरमाला तथा अतिथियों को गले में पड़ी वरमाला बारातियों की पहचान बन जाती है।

इसके अलावा संसार से बिदाई के समय में भी यही फूलों का उपयोग परम्परागत है। फूलों की खेती के लिये हमारी जलवायु-भूमि इतनी उपयोगी है कि गुलाब,गेंदा, ग्लेडीयोलस, रात की रानी, बेला, मोगरा, हारसिंगार, सदासुहागन, लिली, गुलदावदी, रजनीगंधा सभी प्रकार के फूलों की खेती सफलता से की जा सकती है। क्षेत्रफल की दृष्टि से गेंदा का रकबा का लगभग 7386 लाख हेक्टर, उत्पादन 0.81 टन तथा उत्पादकता 10.97 टन है जो सर्वाधिक है इसके बाद गुलाब का क्षेत्र लगभग 2334 लाख हेक्टर, सेवंती का लगभग 762 लाख हेक्टर, ग्लेडीयोलस का लगभग 1960 लाख हेक्टर, रजनीगंधा का लगभग 263 लाख हेक्टर में लगाया जाता है। उल्लेखनीय है कि सफल गुलाब उत्पादन से 2 से 2.5 लाख रु./हेक्टर, सेवंती जो कि महाराष्ट्र, गुजरात में प्रमुख रूप से अच्छा पैसा देने की क्षमता रखती है। क्योंकि इसकी मांग भी वहां अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक है। फूलों की काशत से 1 से 1.50 लाख / हे. कमाना कठिन काम नहीं होगा। संकर गेंदा से 1.5 से 1.75 लाख/हे. सरलता से प्राप्त किया जा सकता है। फूलों के राजा गुलाब का सतत विस्तार हो रहा है। शहरी क्षेत्रों में शायद ही कोई बंगला अटरिया ऐसी हो जहां गुलाब नहीं लगा है। गुलाब की खेती का भी आज अलग इतिहास है मुगलकाल में इस पुष्प की शान-शौकत ही बढ़ गई। मुगल बादशाह अकबर को गुलाब बहुत पसंद था जबसे लेकर स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू अपनी शेरवानी में गुलाब लगाना कभी नहीं भूलते थे इस प्रकार गुलाब सदियों में सरताज बना है गुलाब की करीब 25 हजार विभिन्न आकर्षक रंगों की किस्में विश्व में है।

भारत में लगभग 6 हजार किस्मों का विस्तार हुआ है। इसकी खेती का रकबा लगभग 3500 हेक्टर में की जाती है तथा 100 से 120 किलो तेल प्राप्त किया जाता है जो बहुउपयोगी होता है। हमें विश्वास नहीं होगा कि बाजार में एक किलो गुलाब के तेल की कीमत 2-3 लाख रुपये होती है विश्व में कुल गुलाब तेल की मांग उत्पादन से कई गुना अधिक है जबकि वर्तमान में केवल 15 से 20 टन तेल उत्पादन की क्षमता है। फूलों की खेती के विस्तार की अपार संभावनायें हैं प्राकृतिक संसाधन की फूलों की खेती के लिये अनुकूल है। अतएव फूलों की खेती का विस्तार कर खेती को लाभकारी बनाने का मार्ग बहुत आसान है क्योंकि शासन की ओर से भी विभिन्न फूल के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिये योजनायें हैं कृषकों को चाहिए कि उनका लाभ उठायें।

महत्वपूर्ण खबर : महाविद्यालय द्वारा विश्व मृदा दिवस का आयोजन

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *