किसान चने की इन 3 किस्मों की करें खेती, कम लागत और समय में मिलेगी बंपर पैदावार; जानिए खासियत और लाभ
07 नवंबर 2025, नई दिल्ली: किसान चने की इन 3 किस्मों की करें खेती, कम लागत और समय में मिलेगी बंपर पैदावार; जानिए खासियत और लाभ – रबी फसलों की बुवाई का सीजन चल रहा है। इस सीजन में किसान मुख्य तौर पर चना, गेहूं और सोयाबीन की फसल बोते हैं। ऐसे में अन्नदाताओं को अच्छी किस्म के बीजों की आवश्यकता होती है ताकि वह अच्छी पैदावार लें सके। हालांकि, बाजार में रबी फसलों की बहुत सी अधिक उत्पादन देने वाली किस्में हैं मौजूद है लेकिन इनकी जानकारी हर किसान को नहीं होती है। ऐसे में यहां हम आपको चने की अधिक उत्पादन देने वाली टॉप 3 किस्मों की जानकारी देंगे, ताकि आप कम लागत और समय में बढ़िया मुनाफा कमा सकें। आइए जानें किस्नों की खासियत और लाभ।
1. बिदिशा (बीजी 1084) डब्ल्यूबीजी 29 — पश्चिम बंगाल के किसानों के लिए वरदान
-रिलीज वर्ष: 2015 (एसवीआरसी)
-उद्गम केंद्र: बेरहामपुर, पश्चिम बंगाल
–औसत उपज: लगभग 25 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
-परिपक्वता अवधि: 131 दिन
-उपयुक्त क्षेत्र: पश्चिम बंगाल
-विशेष लक्षण: पछेती बुवाई की स्थिति में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन
-मुख्य विशेषता: छोटे बीजों वाली मध्यम परिपक्व देसी किस्म (12–14 ग्राम प्रति 100 बीज)
यह किस्म देरी से बोई जाने वाली फसलों के लिए उपयुक्त है और उपज के मामले में अन्य देसी किस्मों से काफी बेहतर मानी जाती है।
2. बीडीएनजीके 798 — महाराष्ट्र के किसानों के लिए उपयुक्त काबुली किस्म
-रिलीज वर्ष: 2016 (एसवीआरसी)
-उद्गम केंद्र: एआरएस, जालना
-औसत उपज: 16–18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
-परिपक्वता अवधि: 120–135 दिन
-उपयुक्त क्षेत्र: महाराष्ट्र
-विशेष लक्षण: सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त
-मुख्य विशेषता: सफेद दानों वाली काबुली किस्म (29 ग्राम प्रति 100 बीज), मुरझान और स्टंट रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी
यह किस्म न केवल दाने के आकार और रंग के कारण बाजार में लोकप्रिय है, बल्कि इसकी रोग सहनशीलता और उपज क्षमता भी किसानों को अच्छा मुनाफा दिला सकती है।
3. गुजरात जूनागढ़ ग्राम 6 (जीजेजी 6) — उच्च उपज और रोग प्रतिरोधक किस्म
-रिलीज वर्ष: 2016 (एसवीआरसी)
-उद्गम केंद्र: जूनागढ़
-औसत उपज: 16–18 क्विंटल प्रति हेक्टेयर
-परिपक्वता अवधि: 120–130 दिन
-उपयुक्त क्षेत्र: गुजरात
-विशेष लक्षण: सामान्य बुवाई के लिए उपयुक्त
-मुख्य विशेषता: मुरझान और स्टंट रोगों के प्रति सहिष्णु
गुजरात के किसानों के बीच यह किस्म लोकप्रिय हो रही है क्योंकि यह सामान्य बुवाई में भी बेहतर पैदावार देती है और बीमारियों से सुरक्षित रहती है।
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