फसल की खेती (Crop Cultivation)

मध्यप्रदेश के किसान गेंहू की फसल बोने से पहले जरूर करें पोषक तत्व प्रबंधन

18 नवम्बर 2023, भोपाल: मध्यप्रदेश के किसान गेंहू की फसल बोने से पहले जरूर करें पोषक तत्व प्रबंधन – भारत में चावल के बाद गेहूं दूसरा सबसे महत्वपूर्ण भोज्य पदार्थ है। इसकी खेती भारत के लगभग सभी राज्यों में की जाती है। वर्तमान में गेंहू की बुवाई चल रही हैं। किसान गेंहू की अधिक पैदावार लेने के लिए फसल में पोषक तत्व प्रबंधन आवश्य करें।

मध्यप्रदेश के किसान फसल की बुवाई से पहले मिट्टी परीक्षण अवश्य करायें। परीक्षण के आधार पर नाइट्रोजन, फास्फेट एवं पोटाश की मात्रा का निर्धारण अनुशंसा करें। फसल में 25 कि.ग्रा./हे. की दर से जिंक सल्फेट का प्रयोग। जिंक सल्फेट का प्रयोग 3 फसल के उपरांत (न की प्रत्येक वर्ष) करें।

वर्षा आधारित प्रजातियों में पूरी उर्वरकों की मात्रा को बुवाई के समय डाल देना चाहिए। कम पानी वाली प्रजातियों में 50 प्रतिशत नाइट्रोजन तथा सल्फर व पोटाश की पूरी मात्रा बूवाई के समय तथा आधी बची नाइट्रोजन की मात्रा प्रथम सिचाई पर सिचाई पूर्व अथवा सिचाई के बाद पर्याप्त नमी होने पर डालनी चाहिए। पूर्ण सिचिंत प्रजातियों में 1/3 नाइट्रोजन तथा सल्फर व पोटाश की पूरी मात्राऐं बुवाई के समय तथा नाइट्रोजन की शेष 2/3 मात्रा प्रथम व द्वितीय सिंचाई के बाद पर्याप्त नमी होने पर प्रयोग करनी चाहिए। सूक्ष्म पोषक तत्वों की पूर्ति लक्षणों के अनुसार विशेषज्ञ सलाह से खड़ी फसल में पर्ण छिड़काव से करनी चाहिए।

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