बैतूल जिले की पड़त भूमि के लिए उपयुक्त फसल है काजू

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें

काजू के बगीचे लगाने हेतु आवेदन करें किसान

बैतूल जिले की पड़त भूमि के लिए उपयुक्त फसल है काजू – बैतूल मध्यप्रदेश का पहला जिला है जहाँ वर्ष 2018-19 से काजू की व्यवसायिक खेती प्रारंभ की गयी है। भारत सरकार के काजू एवं कोको निदेशालय के द्वारा यह अनुशंसा की गयी है कि बैतूल की मिट्टी एवं जलवायु काजू की खेती के लिये अत्यन्त उपयुक्त है। सफेद सोना कहलाने वाली काजू की फसल बैतूल जिले के किसानों के लिये आर्थिक रूप से काफी लाभकारी फसल साबित होगी। उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग द्वारा जिले के किसानों के खेतों में वर्तमान वर्ष 2020-21 में वृहद स्तर पर काजू के बगीचे लगाये जाने लक्ष्य जारी किए गए हैं। काजू मुख्यत: पड़त भूमि की फसल होने के कारण बैतूल जिले में बहुतायत में पाई जाने वाली लाल बर्री जमीन हेतु सर्वाधिक उपुयक्त फसल है। काजू उत्पादन की संभावनाओं को देखते हुये विभाग द्वारा इस वर्ष जिले में 483 हेक्टेयर में काजू रोपण किया जायेगा।
हाल ही में आत्मनिर्भर मध्यप्रदेश के अन्तर्गत एक जिला एक उत्पाद के तहत बैतूल जिले हेतु काजू फसल का चयन किया गया जिससे जिले में काजू से सम्बंधित विभिन्न उत्पादों हेतु प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयां तथा मार्केटिंग की सुविधा विकसित करने हेतु उद्यानिकी विभाग के द्वारा सहायता प्रदान की जाएगी।

महत्वपूर्ण खबर : खरगोन मंडी में हुई 12 हजार क्विंटल कपास की आवक

क्या है योजना

उद्यानिकी विभाग की योजना में 1 हेक्टेयर में सामान्य दूरी 7ङ्ग7 मीटर पर काजू के 200 पौधे लगाए जायेंगे। रोपण हेतु काजू के ग्रॉफ्टेड पौधे विभाग द्वारा उपलब्ध कराए जायेंगे। विभाग द्वारा किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करने हेतु समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

कितना होगा उत्पादन

उचित प्रबंधन एवं ड्रिप के साथ रोपण करने पर द्वितीय वर्ष से काजू का उत्पादन प्राप्त होने लगेगा जो प्रति पेड़ लगभग 1 किलो कच्चा काजू होता है। व्यवसायिक उत्पादन 6-7 साल में 10 किलो प्रति पेड़ प्राप्त होता है उसके पश्चात भी जैसे-जैसे पौधों की उम्र बढ़ेगी उचित प्रबंधन करने पर उत्पादन बढ़कर 30 किलो प्रति पेड़ तक हो सकता है। वर्तमान में जिले में उत्पादित कच्चा काजू गुणवत्ता अनुसार 85 रुपये से लेकर 120 रुपये प्रति किलो की दर से विक्रय किया जा रहा है। कच्चे काजू से काजू निकालने हेतु घोड़ाडोंगरी में मध्यप्रदेश की पहली काजू प्रसंस्करण इकाई भी स्थापित है।

योजना में अनुदान

उपरोक्त योजना में पौध रोपण हेतु प्रथम वर्ष में राशि रूपये 12000/-, द्वितीय वर्ष में राशि रूपये 4000/- एवं तृतीय वर्ष में राशि रूपये 4000/- की दर से तीन वर्षो में कुल राशि रूपये 20000/- का अनुदान प्रति हेक्टेयर पौध जीवितता क्रमश: 75, 90 एवं 100 प्रतिशत पाये जाने पर दी जाती है।
काजू रोपण के साथ ड्रिप लगाना अनिवार्य है, ड्रिप लगाने के लिये विभाग की योजनांतर्गत निर्धारित लागत का 45 से 55 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है जो कि अलग से देय होगा। ड्रिप संयंत्र की स्थापना एम.पी. एग्रो के माध्यम से कराया जाना है।

योजना का लाभ कैसे लिया जाये

वर्ष 2020-21 में पौध रोपण हेतु ऐसे कृषक जिनके पास पूरे साल सुनिश्चित सिंचाई व्यवस्था उपलब्ध है वो इस योजना का लाभ लेने हेतु उद्यानिकी विभाग के पंजीयन पोर्टल रूक्कस्नस्ञ्जस् पर जाकर एकीकृत बागवानी मिशन एवं राष्ट्रीय कृषि विकास योजनांतर्गत काजू पौधरोपण घटक में ऑनलाईन पंजीयन एवं आवेदन की कार्यवाही करना अनिवार्य होगा। पात्रता अनुसार पहले आओ पहले पाओ के आधार पर लाभ दिया जायेगा।
प्रति कृषक 0.25 हेक्टेयर से लेकर 4 हेक्टेयर तक काजू पौधरोपण हेतु अनुदान का लाभ ले सकते हैं। अधिक जानकारी हेतु इच्छुक कृषक उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग, जिला बैतूल के जिला कार्यालय एवं विकासखण्ड कार्यालय में कार्यालयीन समय में सम्पर्क कर सकते है।

स्त्रोत : सुश्री आशा उपवंशी वासेवार
उपसंचालक उद्यान
(उद्यानिकी एवं खाद्य प्रसंस्करण विभाग बैतूल का फेसबुक पेज उद्यानिकी सन्देश-खेती में स्वच्छता अभियान से )

व्हाट्सएप या फेसबुक पर शेयर करने के लिए नीचे क्लिक करें
Advertisements

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

sixteen + 14 =

Open chat
1
आपको यह खबर अपने किसान मित्रों के साथ साझा करनी चाहिए। ऊपर दिए गए 'शेयर' बटन पर क्लिक करें।