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फसल की खेती (Crop Cultivation)

बायर एडमायर कीटनाशक: धान में चूसने वाले कीटों का सटीक इलाज

10 मार्च 2025, नई दिल्ली: बायर एडमायर कीटनाशक: धान में चूसने वाले कीटों का सटीक इलाज – बायर एडमायर कीटनाशक में इमिडाक्लोप्रिड होता है, जो दुनिया के सबसे ज्यादा बिकने वाले कीटनाशकों में से एक है और इसे बायर द्वारा खोजा और विकसित किया गया है। इमिडाक्लोप्रिड धान, कपास और सब्जी की फसलों को विभिन्न प्रकार के चूसने वाले कीटों से बचाता है। एडमायर अपनी अभिनव स्ट्रेस शील्ड तकनीक की वजह से फसलों को विभिन्न पर्यावरणीय तनावों से बचाने में भी मदद करता है।

हर साल, भारत में चूसने वाले कीट फसलों को भारी नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे किसानों की पैदावार कम हो जाती है। इसका किसानों की आय पर बड़ा प्रभाव पड़ता है। बायर का एडमायर एक सिस्टमिक कीटनाशक है जो आपके पौधों को अंदर से मजबूत बनाता है और जैसिड्स, एफिड्स, थ्रिप्स और हॉपर्स जैसे विभिन्न चूसने वाले कीटों से आपकी फसलों की रक्षा करता है।

कीट आपकी फसलों को नष्ट कर सकते हैं और आपकी पैदावार को काफी कम कर सकते हैं। सही प्रकार के कीटनाशक (कीटनाशक दवा) का उपयोग करके, हर किसान अपनी फसल की गुणवत्ता को बेहतर कर सकता है, अधिक पैदावार प्राप्त कर सकता है और अपनी कृषि आय को बढ़ा सकता है।

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सक्रिय घटक: इमिडाक्लोप्रिड 70% WG

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पैक साइज़: 2 ग्राम, 30 ग्राम, 75 ग्राम, 150 ग्राम, 300 ग्राम

एडमायर कीटनाशक कपास, धान, भिंडी, खीरा, टमाटर और आलू के लिए अनुशंसित है। यह जैसिड्स, एफिड्स, थ्रिप्स, ब्राउन प्लांट हॉपर्स, व्हाइट बैक्ड प्लांट हॉपर्स और व्हाइटफ्लाइज़ (सफेद मक्खी) से सुरक्षा प्रदान करता है।

यह कैसे काम करता है?

एडमायर एक सिस्टमिक कीटनाशक है जो नियोनिकोटिनॉइड्स के रासायनिक वर्ग से संबंधित है और विभिन्न कीटों के खिलाफ प्रभावी है। एडमायर में जर्मन तकनीक फ्लुइडाइज्ड बेड ग्रैन्युलेशन प्रक्रिया का उपयोग किया जाता है, जो पानी में तेजी से घुल जाता है और एक समान और स्थिर स्प्रे सस्पेंशन बनाता है।

एडमायर पौधों के लिए सुरक्षित है और इसके सक्रिय घटक का तेजी से फैलाव और अवशोषण होता है। इसके परिणामस्वरूप, यह फसलों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करता है।

एडमायर में इमिडाक्लोप्रिड होता है, जो कीटों के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में सही संकेत प्रसारण को बाधित करता है, जिससे तंत्रिका कोशिकाओं में उत्तेजना पैदा होती है। इससे तंत्रिका तंत्र में गड़बड़ी होती है और अंततः उपचारित कीट की मृत्यु हो जाती है।

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