खरीफ के जोखिम
देहात में शारीरिक अक्षमता को दर्शाते हुए एक कहावत है कि एक आंख वाले ब्याह में सौ-सौ जोखिम। यही हाल खरीफ फसलों का भी होता है। बुवाई के मिलने वाले तीन दिन से लेकर कटाई तक किसान की जान सांसत
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंदेहात में शारीरिक अक्षमता को दर्शाते हुए एक कहावत है कि एक आंख वाले ब्याह में सौ-सौ जोखिम। यही हाल खरीफ फसलों का भी होता है। बुवाई के मिलने वाले तीन दिन से लेकर कटाई तक किसान की जान सांसत
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंबीज की आनुवांशिक शुद्धता का तात्पर्य बीज किस्म में निहित उन विशिष्ट लक्षणों से है, जिनके कारण इस किस्म को विशेष नाम से पहचाना जाता है जैसे किस्म की जीनी संरचना, पौधे की ऊंचाई, रोगरोधिता और कीट रोधी-गुण, पादप, तना
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंहमारे देश की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या खेती एवं खेती आधारित कार्यों में लगी हुई है। आधुनिक समय में खेती में बहुत अधिक लागत लगती है इस कारण ग्रामीण लोगों का रुझान खेती की ओर से कम होता जा रहा
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंइंदौर। इंदौर जिले के प्रगतिशील किसान श्री मदनसिंह यादव ने परंपरागत खेती से इतर पॉली हाउस तकनीक से गुलाब की खेती प्रारंभ की है। हालांकि इससे पूर्व वे शिमला मिर्च, टमाटर आदि का उत्पादन करके प्रसिद्धि हासिल कर चुके हैं।
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंइंदौर। खेती के काम को आसान बनाने के लिए किसान हमेशा कुछ न कुछ जुगत में लगे रहते हैं। देवास जिले की बागली तहसील के ग्राम सामगी के किसान श्री हुकुमचंद्र पटेल ने अपने खेतों में छिड़काव करने के लिए
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंबुरहानपुर। दलहनी फसलें अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली और तिल की कास्त लागत कम है। यदि जलमान की बात करें तो परम्परागत फसलों केला-गन्ना की 250 सेमी प्रति हेक्टेयर की तुलना में दलहनी फसलों का 15-20 सेमी है। वर्षा की स्थिति
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंनई दिल्ली। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गत दिनों कहा कि बढ़ती जनसंख्या और तेजी से खंडित हो रही भूमि-जोत के कारण देश में बिना देरी किए दूसरी हरित क्रांति का लाया जाना समय की जरूरत है और यह केवल
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंपुणे। दि फर्टिलाइजर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफएआई) के पश्चिमी क्षेत्र की वार्षिक बैठक पुणे में गत 23 जून को आयोजित की गई। वर्ष 2014-15 में उर्वरक उद्योग के हालातों की समीक्षा और भविष्य पर चर्चा करते हुए इस बैठक का
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंखरीफ बोनी 306 लाख हेक्टेयर पार (विशेष प्रतिनिधि) नई दिल्ली/भोपाल। देश में गत माह हुई अच्छी बारिश के चलते चालू खरीफ मौसम में अभी तक दलहनों-तिलहनों, कपास और मोटे अनाजों की बुवाई आगे चल रही है। कुल खरीफ बुवाई 306
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंनई दिल्ली। कृषि की मानसून पर निर्भरता को कम करने के लिए केंद्र ने हर गांव तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने के लिए पचास हजार करोड़ की योजना को मंजूरी दे दी है। इसमें मौजूदा समय में चल रही योजनाओं को
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