आदिवासियों की फसल रामतिल
हमारे देश का करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र आदिवासी जनजातियों का है, आदिवासी क्षेत्रों में रामतिल, मुख्य खरीफ के रूप में उगाई जाती है इसे क्षेत्रों में जगनी भी कहा जाता है, इसके तेल की विशेषता यह है कि इसमें 25
हमारे देश का करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र आदिवासी जनजातियों का है, आदिवासी क्षेत्रों में रामतिल, मुख्य खरीफ के रूप में उगाई जाती है इसे क्षेत्रों में जगनी भी कहा जाता है, इसके तेल की विशेषता यह है कि इसमें 25
भारत विश्व में मूंगफली के क्षेत्रफल व उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान पर है। हमारे देश में मूंगफली की कम उत्पादकता का कारण, इसकी खेती असिंचित व अनुपजाऊ भूमि में होना है। साथ ही सूखे की अधिकता व अधिक
उज्जैन। जिस तरह से आज क्षिप्रा नदी का कटाव हो रहा है इसे देखते हुए लग रहा है कि शीघ्र ही आने वाले समय में किनारे के खेतों में अपने में समेट लेगी। ऐसे समय में क्षिप्रा नदी के किनारे
बड़वानी। खरीफ सीजन में के.जे. एजुकेशन सोसायटी भोपाल ने जिले के सेंधवा, निवाली एवं पानसेमल विकासखंडों में गतिविधियां प्रारंभ कर दी है। सेंधवा विकासखंड के ग्राम थिगली, निवाली के खडकी वन एवं पानसेमल विकासखंड के ग्राम बालझिरी में मक्का फसल
देहात में शारीरिक अक्षमता को दर्शाते हुए एक कहावत है कि एक आंख वाले ब्याह में सौ-सौ जोखिम। यही हाल खरीफ फसलों का भी होता है। बुवाई के मिलने वाले तीन दिन से लेकर कटाई तक किसान की जान सांसत
बीज की आनुवांशिक शुद्धता का तात्पर्य बीज किस्म में निहित उन विशिष्ट लक्षणों से है, जिनके कारण इस किस्म को विशेष नाम से पहचाना जाता है जैसे किस्म की जीनी संरचना, पौधे की ऊंचाई, रोगरोधिता और कीट रोधी-गुण, पादप, तना
हमारे देश की लगभग 70 प्रतिशत जनसंख्या खेती एवं खेती आधारित कार्यों में लगी हुई है। आधुनिक समय में खेती में बहुत अधिक लागत लगती है इस कारण ग्रामीण लोगों का रुझान खेती की ओर से कम होता जा रहा
इंदौर। इंदौर जिले के प्रगतिशील किसान श्री मदनसिंह यादव ने परंपरागत खेती से इतर पॉली हाउस तकनीक से गुलाब की खेती प्रारंभ की है। हालांकि इससे पूर्व वे शिमला मिर्च, टमाटर आदि का उत्पादन करके प्रसिद्धि हासिल कर चुके हैं।
इंदौर। खेती के काम को आसान बनाने के लिए किसान हमेशा कुछ न कुछ जुगत में लगे रहते हैं। देवास जिले की बागली तहसील के ग्राम सामगी के किसान श्री हुकुमचंद्र पटेल ने अपने खेतों में छिड़काव करने के लिए
बुरहानपुर। दलहनी फसलें अरहर, मूंग, उड़द, मूंगफली और तिल की कास्त लागत कम है। यदि जलमान की बात करें तो परम्परागत फसलों केला-गन्ना की 250 सेमी प्रति हेक्टेयर की तुलना में दलहनी फसलों का 15-20 सेमी है। वर्षा की स्थिति