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तकनीक अपनाएं, खेती की लागत घटाएं

इन सब कारणों की वजह से किसान के पास कम संसाधन होते हुए भी अर्थात् किसान सामथ्र्यहीन होते हुए भी, अनावश्यक रूप से उगे हुए खरपतवारों के नियंत्रण के लिए मजदूर या खरपतवारनाशी का अनावश्यक प्रयोग, पानी के लिए बिजली

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खेतों में जमा पानी बाहर निकालें किसान भाई

किसान भाईयों विगत दिनों हुई तेज बारिश से सोयाबीन के जिन खेतों में पानी जमा है उन खेतों की सोयाबीन फसल में नुकसान का अंदेशा हो गया है। यदि 24 घंटे से ज्यादा समय तक खेतों में पानी भरा रहेगा

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फन्दा प्रक्षेत्र बनेगा बड़ा बीज अनुसंधान केन्द्र : श्री बिसेन

भोपाल। फन्दा कृषि प्रक्षेत्र प्रदेश का बड़ा बीज अनुसंधान केन्द्र बनेगा। इसमें अधिक उत्पादन वाली किस्में विकसित कर किसानों को विक्रय की जायेंगी। मौसम की बदलती हुई परिस्थिति को देखते हुए बीजों की प्रजाति विकसित की जायेगी। प्रदेश के किसान-कल्याण

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खरीफ और चुनौतियां

भारतीय कृषि मानसून की दासी है उसके बुने तानों-बानों पर ही उसे चलना है जैसा उसका बजाना वैसा ही कृषि को गाना है यह बात सर्वविदित है। वर्ष 2015 का मानसून आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा।

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फास्फोजिप्सम से बढ़ेगा तिलहनी फसलों का उत्पादन

सोयाबीन मध्यप्रदेश में सोयाबीन का क्षेत्रफल पूरे देश के क्षेत्र का 80 प्रतिशत है तथा उत्पादकता 5 दशक से केवल 1 टन प्रति हैक्टेयर के आसपास ही रहती है। उत्पादन में स्थिरता का एक प्रमुख कारण प्रदेश में लगातार सोयाबीन-गेहूं

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धान का आहार पोषण

धान के पोषण में विभिन्न पोषक तत्वों की भूमिका नाइट्रोजन धान की नाइट्रोजन आवश्यकता बहुत अधिक है। फसल लगभग पकने के समय तक नाइट्रोजन चाहती है फिर भी कल्ले बनने की अवस्था में नाइट्रोजन की मांग विशेष अधिक रहती है।

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आदिवासियों की फसल रामतिल

हमारे देश का करीब 20 प्रतिशत क्षेत्र आदिवासी जनजातियों का है, आदिवासी क्षेत्रों में रामतिल, मुख्य खरीफ के रूप में उगाई जाती है इसे क्षेत्रों में जगनी भी कहा जाता है, इसके तेल की विशेषता यह है कि इसमें 25

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मूंगफली खूब फली

भारत विश्व में मूंगफली के क्षेत्रफल व उत्पादन की दृष्टि से प्रथम स्थान पर है। हमारे देश में मूंगफली की कम उत्पादकता का कारण, इसकी खेती असिंचित व अनुपजाऊ भूमि में होना है। साथ ही सूखे की अधिकता व अधिक

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बांस के रूप में तीसरी फसल लें किसान : श्री कियावत

उज्जैन। जिस तरह से आज क्षिप्रा नदी का कटाव हो रहा है इसे देखते हुए लग रहा है कि शीघ्र ही आने वाले समय में किनारे के खेतों में अपने में समेट लेगी। ऐसे समय में क्षिप्रा नदी के किनारे

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के.जे.एजुकेशन सोसायटी की गतिविधियां खरीफ फसलों पर फार्म स्कूल प्रारंभ

बड़वानी। खरीफ सीजन में के.जे. एजुकेशन सोसायटी भोपाल ने जिले के सेंधवा, निवाली एवं पानसेमल विकासखंडों में गतिविधियां प्रारंभ कर दी है। सेंधवा विकासखंड के ग्राम थिगली, निवाली के खडकी वन एवं पानसेमल विकासखंड के ग्राम बालझिरी में मक्का फसल

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