लाभदायक गर्मियों की जुताई
लाभदायक गर्मियों की जुताई रबी फसलों की कटाई का महत्वपूर्ण कार्य मार्च के अंतिम सप्ताह तक या अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक लगभग पूर्ण कर लिया जाता है, जब रबी फसलों की खेत से कटाई की जाती है, तब खेत
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंनवीनतम फसल की खेती (Crop Cultivation) की जानकारी और कृषि पद्धतियों में नवाचार, बुआई का समय, बीज उपचार, खरपतवार नियन्तारन, रोग नियन्तारन, कीटो और संक्रमण से सुरक्षा, बीमरियो का नियन्तारन। गेहू, चना, मूंग, सोयाबीन, धान, मक्का, आलू, कपास, जीरा, अनार, केला, प्याज़, टमाटर की फसल की खेती (Crop Cultivation) की जानकारी और नई किस्मे। गेहू, चना, मूंग, सोयाबीन, धान, मक्का, आलू, कपास, जीरा, अनार, केला, प्याज़, टमाटर की फसल में कीट नियंतरण एवं रोग नियंतरण। सोयाबीन में बीज उपचार कैसे करे, गेहूँ मैं बीज उपचार कैसे करे, धान मैं बीज उपचार कैसे करे, प्याज मैं बीज उपचार कैसे करे, बीज उपचार का सही तरीका। मशरुम की खेती, जिमीकंद की खेती, प्याज़ की उपज कैसे बढ़ाए, औषदि फसलों की खेती, जुकिनी की खेती, ड्रैगन फ्रूट की खेती, बैंगन की खेती, भिंडी की खेती, टमाटर की खेती, गर्मी में मूंग की खेती, आम की खेती, नीबू की खेती, अमरुद की खेती, पूसा अरहर 16 अरहर क़िस्म, स्ट्रॉबेरी की खेती, पपीते की खेती, मटर की खेती, शक्ति वर्धक हाइब्रिड सीड्स, लहसुन की खेती। मूंग के प्रमुख कीट एवं रोकथाम, सरसों की स्टार 10-15 किस्म स्टार एग्रीसीड्स, अफीम की खेती, अफीम का पत्ता कैसे मिलता है?
लाभदायक गर्मियों की जुताई रबी फसलों की कटाई का महत्वपूर्ण कार्य मार्च के अंतिम सप्ताह तक या अप्रैल के प्रथम सप्ताह तक लगभग पूर्ण कर लिया जाता है, जब रबी फसलों की खेत से कटाई की जाती है, तब खेत
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंअदरक उत्पादन तकनीक जलवायु अदरक गर्म एवं नम जलवायु में अच्छी तरह उगाया जाता है। इसकी खेती समुद्र तट से 1500 मीटर तक की ऊंचाई पर भी की जा सकती है। अदरक की खेती वर्षा आधारित एवं सिंचित अवस्था में
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंलाभदायक गर्मियों की जुताई फसलों को हानि पहुंचाने वाले रोगाणु, रोगजनक, कीड़े, खरपतवारों के बीज फसलों की कटाई के बाद भूमि की दरारों (खाली जगहों) में सुषुप्तावस्था में पड़े रहते है और जब अगली फसल की बुवाई की जाती है
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंउन्नत बीज ही सफल खेती का पहला कदम है उत्पादन की प्रथम सीढ़ी अच्छा बीज होता है और अच्छे बीज की प्राप्ति हेतु कृषक काफी दौड़-धूप करता है क्योंकि उसे मालूम है कि उन्नत बीज ही सफल खेती का पहला
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंप्राचीनकाल से ही मनुष्य रोग निदान के लिये विभिन्न प्रकार के पौधों का उपयोग करता आया है। औषधि प्रदाय करने वाले पौधे अधिकतर जंगली होते हैं। कभी-कभी इन्हें उगाया भी जाता है। पौधों की जड़े, तने, पत्तियाँ, फूल, फल, बीज
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंसिंघाडा जिसे अंग्रेजी में water chestnut के नाम से जाना जाता है। जिसका उपयोग पूजन एवं उपवास में मुख्यता से किया जाता है। इसकी खेती तालाबों में की जाती है। जलीय खेती में मुख्यत: कमल, कूटू, सिंघाड़ा एवं मखाना उगाए
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंमूंग भारत में उगाई जाने वाली दलहनी फसलों में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। इसमें 24 प्रतिशत प्रोटीन के साथ-साथ रेशे एवं लौह तत्व भी प्रचुर मात्रा में पाये जाते हैं। मूंग की जल्दी पकने वाली एवं उच्च तापमान को सहन
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंज्वार बीज उत्पादक कम्पनियों की संकर एवं उन्नत किस्में कंपनी किस्म महिको एमएसएच-51,एमएफएसएच-3,4,15, एमआरएस 4094 नाथ बायोजीन अमरनाथ -251, 2000, सेमे जे.के.एग्री जेनेटिक्स जेकेएसएच-22,234, जेके ज्योति गंगा कावेरी जीके-4009,4030,4013, 4034 बायर क्राप साइंस 8320,8340, 8450, 8568, 8712 विभा सीड्स
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंअल्टरनेरिया झुलसा: सरसों का यह रोग बहुत ही महत्वपूर्ण है और इस रोग के लगने से 15-71 प्रतिशत तक उत्पादन में कमी हो जाती है। इस रोग का मुख्य लक्षण पौधे के पूरे भाग में दिखाई देता है तथा सबसे
आगे पढ़ने के लिए क्लिक करेंहमारे देश का एक बड़ा भाग कृषि उत्पादन पर निर्भर करता है। रबी सब्जियों में एकीकृत कीट प्रबंधन की आवशकता हैै। अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए रसायनिक उर्वरकों का अधिक एवं अनियमित प्रयोग किया जाता रहा हैै। रसायनिक उर्वरक
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