फसल कटाई में उपयोगी कृषि यंत्र एवं अनुदान

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  • कम्बाइंड हार्वेस्टर स्ट्रा मैनेजमेंट सिस्टम (एसएमएस) मशीन भूसे को बारीक काटकर हार्वेस्टर के पीछे खेतों में फैला देता है। एसएमएस द्वारा कटाई की गई खेतों में हैप्पी सीडर द्वारा सीधे बोनी की जा सकती है, तो यह मशीन भूसे के बिखराव के कारण मृदा की नमी संरक्षण में भी उपयोगी है। उपकरण की कीमत 22 लाख है जिस पर शासन द्वारा 8.56 लाख अनुदान दिया जा रहा है।
  • बेलर यंत्र ट्रैक्टर चलित उपकरण है जो की फसल अवशेषों का व्यवस्थापन कर उनको बंडलों में तैयार करता है। अवशेष बंडल का उपयोग पशु आहार, ईंधन, पैंकिग कार्य तथा अन्य औद्योगिक उपयोग में किया जा सकता है। उपकरण की कीमत 3.92 लाख है जिस पर 1.96 लाख रूपए का अनुदान दिया जा रहा है।
  • इसी तरह स्ट्रा रीपर भूसा कटाई यंत्र से कम्बाइंड हार्वेस्टर द्वारा गेहूं की कटाई उपरांत खेतों में ही भूसा बनाकर ट्रॉली में संग्रहित किया जा सकता है। उपकरण की कीमत 2.77 लाख है जिस पर 1.10 लाख रूपए का अनुदान दिया जा रहा है।
  • हैप्पी सीडर यंत्र द्वारा कम्बाइंड हार्वेस्टर से अधिक उंचाई पर फसल की कटाई उपरांत तत्काल बिना जुताई अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। धान फसल के अवशिष्टों की मल्चिंग कर मृदा सुधार करने में भी सहायक है। इस यंत्र से संरक्षित कृषि पद्धति के कारण समय, परिश्रम लागत और सिंचाई जल में उल्लेखनीय बचत के साथ उत्पादन की मात्रा एवं गुणवत्ता में भी वृद्धि करने में सहायक है। खरपतवार के अंकुरण पर भी प्रभावी नियंत्रण करता है। इस यंत्र की कीमत 2.50 से तीन लाख रुपए है और इस पर 40 से 50 प्रतिशत सब्सिडी है।
  • जीरो टिलेज सीड कम फर्टिलाइजर ड्रिल उपकरण खरीफ फसल कटाई के तत्काल पश्चात् बिना जुताई के रबी फसलों की बोनी में उपयोगी है। उपकरण में उर्वरक तथा बीज हेतु अलग-अलग व्यवस्था की गई है। इस यंत्र की कीमत 50 से 55 हजार रुपए है और इस पर 40 से 50 प्रतिशत सब्सिडी है।
  • द्य मल्चर कृषि यंत्र फसल अवशेषों को मृदा में मिलाने तथा मृदा की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में उपयोगी है। उपकरण की कीमत 1.72 लाख रूपए एवं अनुदान 58 हजार रूपए है।
  • रोटावेटर कृषि यंत्र एक बार में समुचित बतर युक्त खेत की बोवनी हेतु तैयार करता है। इस यंत्र से सुविधानुसार जुताई की गहराई निर्धारित करना संभव है फसल अवशिष्ट, खरपतवार, हरी खाद आदि को चूर्णीत कर खेत में जैविक उर्वरक की पूर्ति करने में भी सहायक है। उपकरण की कीमत 1.25 लाख एवं अनुदान 44 हजार रूपए है। किसान कृषि यंत्रों के माध्यम से अपनी फसलों के अवशेषों का बेहतर तरीके से प्रबंधन कर सकते हैं।
  • भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद नई दिल्ली द्वारा विकसित पूसा डीकंपोजर नरवाई जलाने से रोकने में काफी उपयोगी है। इस कैप्सूल के माध्यम से घोल बनाकर फसल अवशेषों पर छिड़कने से फसल अवशेष मिट्टी मे ही गल जाते हैं। यह कैप्सूल मिट्टी की उर्वरा शक्ति बढ़ाने में भी सहायक है। किसान पूसा डी कंपोजर कैप्सूल भारतीय कृषि अनुसधान परिषद से प्राप्त कर सकते है या जवाहर लाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर से प्राप्त कर सकते हैं।

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