नोटबंदी का किसान पर कितना असर

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की 8 नवम्बर को 500 तथा 1000 रुपयों के नोटों को चलन से हटाने की घोषणा से पूरा देश एक सुखद आश्चर्य के साथ सकते में आ गया। किसानों पर भी इसका प्रभाव पडऩा स्वाभाविक था। इस वर्ष अच्छी वर्षा के कारण भूमि में पर्याप्त नमी के कारण बीजों के अच्छे अंकुरण तथा अच्छी फसल की संभावना बनी हुई है। बड़े नोटों के बंद होने से  खेती के भी प्रभावित होने की संभावना व्यक्त की जा रही है। वैसे भी देश का किसान हर दिन किसी न किसी समस्या से जूझता रहता है। इसके बाद भी खाद्य उत्पादन कर देश की आवश्यकता को पूरा करता है। इस समस्या से भी किसान एक-दूसरे के सहयोग से इसका निराकरण निकाल  ही लेंगे। वैसे भी नवम्बर के प्रथम सप्ताह तक मध्य भारत का किसान तिलहनी व दलहनी फसलों की बुआई पूरी कर लेता है।  इसलिए इन फसलों को लेने वाले किसानों पर नोटबंदी का कोई असर नहीं पड़ेगा। बीज विक्रय करने में नये नोटों की आवश्यकता गेहूं के नये बीज खरीदने में आने की संभावना है। जिसका किसान में असर कम ही पड़ेगा। क्योंकि अधिकांश गेहूं उगाने वाले किसान अपना बीज स्वयं ही बनाते हैं। नया बीज खरीदने की उन्हें आवश्यकता तभी पड़ती है जब वे किसी नई किस्म के बीज को अपनाने के लिये अपना मन बनाते हैं। यह स्थिति 4-5 वर्ष बाद ही आती है। सब्जी उगाने वाले किसानों पर नोटबंदी का असर अवश्य पड़ेगा क्योंकि अधिकांश  सब्जी उत्पादक किसान अब हाईब्रिड बीज का उपयोग करते हैं जो हर वर्ष बदलना पड़ता है।
भारत सरकार ने भी नोटबंदी से रबी फसलों की बुआई पर कोई असर न पड़े इसलिये किसानों को पुराने नोटों से ही बीज उपलब्ध कराने का निर्णय लिया है। यह सुविधा भारतीय बीज निगम, केंद्र व राज्य सरकारों की संस्थाओं तथा कृषि विश्वविद्यालयों से ही बीज लेने पर उपलब्ध रहेगी। सरकार की इस रियायत का फायदा सब्जी उत्पादक किसानों को कम ही मिलने की संभावना है, क्योंकि सब्जियों के लगभग 80 प्रतिशत बीज निजी बीज कम्पनियों के द्वारा ही उपलब्ध कराये जाते हंै जो किसानों को पुराने नोटों से उपलब्ध नहीं हो पायेंगे। इसके लिये राज्य सरकारों को सब्जी उत्पादक किसानों को बीज उपलब्ध कराने के लिये प्रयास करने चाहिए। सरकार ने कृषि तथा कुछ अन्य कर्जे के भुगतान के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया है जिससे किसानों को कुछ राहत मिलेगी। यदि नये नोटों की उपलब्धता में अगले 10-15 दिन में सुधार नहीं आता तो किसानों को पौध संरक्षण रसायनों व कुछ उर्वरकों की खरीद के लिए सरकार को कुछ रियायतें देना आवश्यक हो जायेगा।

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