खरीफ बुआई समाप्ति की ओर

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नई दिल्ली। चार महीने के बरसाती मौसम में बेहद अहम माने जाने वाले जुलाई में बारिश सामान्य की तुलना में लगभग 15 फीसदी कम रही। खरीफ फसलों के तहत बुआई का रकबा पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अधिक है। अब तक बोनी 847.40 लाख हेक्टेयर में की गई है जबकि गत वर्ष 808.40 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई थी।
सामान्य तौर पर जब बारिश में कमी आती है तो बुआई की रफ्तार भी मंद पड़ जाती है और किसान अपनी फसल की बुआई के लिए इंतजार करते हैं। हालांकि जून में सामान्य की तुलना में बारिश अधिक रही और किसानों ने बारिश के शुरू में बुआई में दिलचस्पी दिखाई।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) से प्राप्त आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि मराठवाड़ा, विदर्भ, उत्तरी कर्नाटक और मध्य महाराष्ट्र को छोड़ कर बड़े इलाकों में, कोई भी सब-डिवीजन 1 जून के बाद तीन सप्ताह से अधिक समय तक बारिश से वंचित नहीं रहा है। 1 जून के बाद सूखे की स्थिति 10 जून के आसपास समाप्त हुई और तब तीन-चार दिनों तक सामान्य से अधिक मानसून की बारिश हुई । इसके बाद 21 जून से 26 जून तक मानसून सामान्य की तुलना में अधिक सक्रिय रहा। जुलाई की शुरुआत बड़ी चिंता के साथ हुई क्योंकि बारिश समाप्त हो गई थी, लेकिन 11 जुलाई के आसपास बारिश हुई जो कई हिस्सों में सामान्य बारिश की तुलना में अधिक रही। इसके बाद 21 जुलाई से कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। यह रुझान अगस्त में भी बना हुआ है और 10-15 अगस्त तक बना रहेगा। मौसम विज्ञानियों का कहना है कि इसके बाद बारिश 20 अगस्त से फिर से शुरू होगी। अगस्त के लिए मौसम विभाग ने अनुमान जताया है कि बारिश एलपीए के 90 फीसदी पर रहेगी।
राज्यों से प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक, कुल बुवाई क्षेत्र 7 अगस्त तक 847.40 लाख हेक्टेयर आंका गया, जबकि पिछले साल इस समय यह आंकड़ा 808.40 लाख हेक्टेयर था। धान की बुवाई 227.81 लाख हेक्टेयर में, दालों की बुवाई 82.44 लाख हेक्टेयर में, मोटे अनाजों की बुवाई 148.49 लाख हेक्टेयर में, तिलहन की बुवाई 148.52 लाख हेक्टेयर में और कपास की बुवाई 101.91 लाख हेक्टेयर में हुई है।

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