किसानों को अगले खरीफ में मिलेगी अरहर की नई किस्म पूसा-16

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नई दिल्ली। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामले मंत्री श्री अरुण जेटली और केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री राधा मोहन सिंह ने गत दिनों दालों की नई किस्म ‘पूसा अरहर-16Ó के खेत का मुआयना किया। श्री राधा मोहन सिंह ने इस नई किस्म के बारे में श्री अरुण जेटली को विस्तृत जानकारी दी। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट मामले मंत्री श्री अरुण जेटली ने ‘पूसा अरहर-16Ó को विकसित करने के लिए आईसीएआर के वैज्ञानिकों को बधाई दी और उम्मीद जताई कि देश जल्द ही दालों के मामले में आत्मनिर्भर बन जाएगा।
इस अवसर पर श्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि ‘पूसा अरहर-16Ó काफी पहले पक जाने वाली, परिमित, कम ऊंचाई एवं उच्च पैदावार वाली किस्म है और यह किसानों को अगले खरीफ सीजन से उपलब्ध करा दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि जहां एक ओर परम्परागत किस्मों को पकने में 170 दिन लग जाते हैं, वहीं दूसरी ओर यह नई किस्म सिर्फ 120 दिनों में ही पक जाती है। इस अवसर पर कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण विभाग में सचिव श्री शोभना के. पटनायक और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्रा के अलावा आईएआरआई की निदेशक डॉ. रविन्दर कौर भी मौजूद थीं।

पूसा अरहर – 16 :- आईसीएआर-आईएआरआई ने और अधिक जल्दी पकने वाली (120 दिन), कम ऊंचाई वाली (95 सेमी से 120 सेमी तक लंबी) परिमित, अधिक उपज देने वाली नई पादप प्रकार की आनुवंशिक सामग्री अर्थात् पूसा अरहर-16 विकसित की है, जो अद्र्ध रूप से सीधा खड़ा होने वाला मजबूत किस्म का पौधा है। अगर इसकी बुआई 30 सेमी की दूरी रखकर और एक पौधे से दूसरे पौधे के मध्य 10 सेमी का अंतर रखकर की जाए तो एक हेक्टेयर भूमि में इस किस्म की अरहर के 3 लाख तीस हजार पौधों की सघन आबादी हो सकती है। अरहर की फसल की सफल कटाई के बाद रबी सीजन में सरसों/आलू/गेहूं पैदा किया जा सकता है। इसके अलावा यह किस्म जल्दी पकने वाली है इसलिए मानसून की शुरुआत से लेकर जुलाई के पहले सप्ताह तक इसकी बुवाई की जा सकती है।

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