Wheat Variety

अधिक उपज देने वाली गेहूँ की किस्में (Wheat Variety), कम अवधि वाली गेहूँ की किस्म, लंबी अवधि वाली गेहूँ की किस्म, मध्य प्रदेश के लिए गेहूँ की किस्म, गेहूँ की नवीनतम किस्म, महाराष्ट्र के लिए किस्में, उत्तर प्रदेश/यूपी के लिए गेहूँ की किस्में, कामा पानी गेहूँ की किस्में, जलवायु के अनुकूल गेहूँ की किस्में, डीबीडब्ल्यू 327 (करन शिवानी)

फसल की खेती (Crop Cultivation)

श्रीराम फार्म सॉल्यूशन की गेहूँ की कौन सी किस्म भूरा रतुआ और झुलसा रोग के प्रति प्रतिरोधी है?

श्रीराम सुपर 5-SR-05 गेहूँ किस्म: रोगों से सुरक्षित, उच्च गुणवत्ता और स्थिर उपज वाली किस्म 21 नवंबर 2025, भोपाल: श्रीराम फार्म सॉल्यूशन की गेहूँ की कौन सी किस्म भूरा रतुआ और झुलसा रोग के प्रति प्रतिरोधी है? – गेहूँ की

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फसल की खेती (Crop Cultivation)

किसान खेतों में लगाएं ये टॉप-5 हाई-यील्ड गेहूँ किस्में, पाएं 70 क्विंटल तक पैदावार

20 नवंबर 2025, नई दिल्ली: किसान खेतों में लगाएं ये टॉप-5 हाई-यील्ड गेहूँ किस्में, पाएं 70 क्विंटल तक पैदावार – रबी सीजन की तैयारी में किसान हर साल यह सोचते हैं कि कौन-सी गेहूं की किस्म उनके खेत के लिए

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फसल की खेती (Crop Cultivation)

श्रीराम सुपर 5-SR-05 गेहूँ की किस्म: किस्म के गुणों, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उपज के बारेमें जाने

श्रीराम फार्म सॉल्यूशन की गेहूँ वैरायटी किसानों को दे रही है उच्च उपज और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता 19 नवंबर 2025, भोपाल: श्रीराम सुपर 5-SR-05 गेहूँ की किस्म: किस्म के गुणों, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उपज के बारेमें जाने –

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फसल की खेती (Crop Cultivation)

मुक्‍तिनाथ गेहूँ 3170 (NIAW 3170) गेहूँ किस्म: महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: मुक्‍तिनाथ गेहूँ 3170 (NIAW 3170) गेहूँ किस्म: महाराष्ट्र और कर्नाटक के प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म – NIAW 3170 (Muktinath Wheat 3170) ICAR-NRRI, पुणे द्वारा विकसित की गई है और प्रायद्वीपीय भारत के सिंचित क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है। मुख्य

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जीडब्ल्यू 451 (GW 451) गेहूँ किस्म: गुजरात क्षेत्र के लिए उच्च कठोरता और बेहतर प्रोसेसिंग वाली गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: जीडब्ल्यू 451 (GW 451) गेहूँ किस्म: गुजरात क्षेत्र के लिए उच्च कठोरता और बेहतर प्रोसेसिंग वाली गेहूँ किस्म – GW 451 नवसारी कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है और केंद्रीय एवं पश्चिमी भारत में प्रचलित है। मुख्य विशेषताएं: यह

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एचआई 1633 (HI 1633) (पुसा व्हीट 1633) गेहूँ किस्म: केंद्रीय क्षेत्र के लिए उच्च-उपज क्षमता वाली किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: एचआई 1633 (HI 1633) (पुसा व्हीट 1633) गेहूँ किस्म: केंद्रीय क्षेत्र के लिए उच्च-उपज क्षमता वाली किस्म – HI 1633 ICAR-IARI, नई दिल्ली द्वारा विकसित की गई है और मध्य भारत में सिंचित खेती के लिए उपयुक्त

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करन नरेंद्र (Karan Narendra) (DBW 222) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी भारत के लिए रोग प्रतिरोधी गेहूँ

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: करन नरेंद्र (Karan Narendra) (DBW 222) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी भारत के लिए रोग प्रतिरोधी गेहूँ – DBW 222 (Karan Narendra) पूर्वी भू-भागों जैसे बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में उपयुक्त है और रोग-प्रतिरोध क्षमता के लिए

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पीबीडब्ल्यू 826 (PBW 826) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के सिंचित क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: पीबीडब्ल्यू 826 (PBW 826) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के सिंचित क्षेत्रों के लिए गेहूँ किस्म – PBW 826 पंजाब कृषि विश्वविद्यालय द्वारा विकसित की गई है और पूर्वी राज्यों जैसे पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश पूर्वी, बिहार और

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करन वंदना (Karan Vandana) (DBW 187) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए उपयुक्त

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: करन वंदना (Karan Vandana) (DBW 187) गेहूँ किस्म: उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के लिए उपयुक्त – DBW 187 जिसे Karan Vandana भी कहा जाता है, ICAR-IIWBR द्वारा विकसित की गई किस्म है, जो बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के सिंचित क्षेत्रों

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आरएयू 627 (RAU 627) गेहूँ किस्म: बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक अनुकूल किस्म

16 नवंबर 2025, नई दिल्ली: आरएयू 627 (RAU 627) गेहूँ किस्म: बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए अत्यधिक अनुकूल किस्म – RAU 627 राष्ट्रीय बीज निगम और बिहार कृषि विश्वविद्यालय द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एक किस्म है, जो पूर्वी उत्तर

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