परंपरागत एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने शहडोल में कार्यशाला संपन्न
26 मार्च 2026, शहडोल: परंपरागत एवं प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने शहडोल में कार्यशाला संपन्न – किसानों की आय बढ़ाने, मिट्टी की उर्वरता को संरक्षित करने एवं पर्यावरण अनुकूल खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शासन द्वारा संचालित परंपरागत कृषि विकास योजना के तहत जिला स्तरीय एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किसान कल्याण एवं कृषि विकास विभाग, शहडोल द्वारा किया गया। इस कार्यशाला में किसानों को परंपरागत, जैविक एवं प्राकृतिक खेती की उन्नत तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें आत्मनिर्भर एवं लाभकारी कृषि की ओर प्रेरित किया गया।
उपसंचालक कृषि श्री अनुराग पटेल ने परंपरागत खेती की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए किसानों को रासायनिक खेती से हटकर परंपरागत एवं प्राकृतिक खेती अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि परंपरागत खेती न केवल मिट्टी की उर्वरता बनाए रखती है, बल्कि उत्पादन लागत को भी कम करती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक संसाधनों के संतुलित उपयोग, जैविक खाद एवं स्थानीय तकनीकी के प्रयोग पर विशेष जोर देते हुए बताया कि आने वाले समय में यही खेती का टिकाऊ मॉडल सिद्ध होगा।
जिला पंचायत के कृषि स्थाई समिति के सभापति श्री हीरालाल कोल ने कहा कि आज के समय में रासायनिक खेती के कारण मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है, लागत बढ़ती जा रही है और स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे में प्राकृतिक खेती न केवल एक विकल्प है, बल्कि समय की आवश्यकता बन गई है। प्राकृतिक खेती अपनाने से किसानों की लागत कम होती है और उत्पाद शुद्ध एवं पौष्टिक होते हैं, जिससे बाजार में बेहतर मूल्य प्राप्त होता है। इसके साथ ही जल संरक्षण, पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता को भी बढ़ावा मिलता है। शासन द्वारा भी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से प्राकृतिक खेती को प्रोत्साहित किया जा रहा है। हमें चाहिए कि हम इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं और अपनी खेती को आत्मनिर्भर एवं लाभकारी बनाएं।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. बी के प्रजापति ने आधुनिक तकनीक के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि तकनीकी नवाचारों के उपयोग से खेती को सरल, सुलभ एवं अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने किसानों को उन्नत कृषि यंत्रों, नई पद्धतियों एवं वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने के लिए प्रेरित किया। डॉ. प्रजापति ने बताया कि यदि किसान परंपरागत ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ें, तो खेती को एक सफल व्यवसाय में बदला जा सकता है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे अधिक से अधिक तकनीकी संसाधनों का उपयोग करें और कृषि को लाभ का साधन बनाएं। कार्यशाला के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया तथा उन्हें विभिन्न योजनाओं एवं तकनीकों की विस्तृत जानकारी प्रदान की गई। कार्यक्रम में उपस्थित किसानों ने इसे उपयोगी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे आयोजनों की अपेक्षा जताई।
कृषि वैज्ञानिक डॉ अल्पना शर्मा ने भी जैविक खेती अपनाने की बात कही। कार्यक्रम में अग्रणी बैंक प्रबंधक श्री अमित चौरसिया, श्री वी पी सिंह, मत्स्य विभाग, उद्यान विभाग, पशुपालन विभाग, सहकारिता विभाग के अधिकारी, कृषि विस्तार अधिकारी श्री प्रदीप कुशवाहा, जनप्रतिनिधि, सेवा प्रदाता ग्लोबल ऑर्गेनिक प्राइवेट लिमिटेड के सदस्य, तकनीकी के सदस्य, परंपरागत खेती करने वाले कृषक, अग्रणी संसाधन कृषक, कृषि सखी, कृषक उत्पादक संगठन, सिविल सोसाइटी संगठन के, जैविक एवं प्राकृतिक उत्पाद के प्रसंस्करण करता एवं संग्रहण करता एवं विक्रेता कार्यक्रम में शामिल रहे।
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