राज्य कृषि समाचार (State News)

कोदो, विष्णुभोग और दुबराज से लौटेगी खेती की पुरानी रौनक, छत्तीसगढ़ बन रहा जैविक खेती का हब

19 जुलाई 2025, भोपाल: कोदो, विष्णुभोग और दुबराज से लौटेगी खेती की पुरानी रौनक, छत्तीसगढ़ बन रहा जैविक खेती का हब – छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के कसडोल ब्लॉक में कृषि और ईको टूरिज्म को जोड़ने की अनोखी पहल शुरू की गई है। वन विभाग ने अचानकपुर गांव में देवहिल नेचर रिसॉर्ट के जरिए किसानों को परंपरागत और जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित करना शुरू कर दिया है। खास बात ये है कि किसानों को कोदो, विष्णुभोग और दुबराज जैसी पारंपरिक किस्मों की खेती के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है।

वनमंडल अधिकारी गणवीर धम्मशील के मार्गदर्शन में एसीएफ (प्रशिक्षु) गजेन्द्र वर्मा, परिक्षेत्र अधिकारी संतोष कुमार पैकरा और बीएफओ योगेश सोनवानी की टीम लगातार ग्रामीणों को जैविक खेती के लिए प्रेरित कर रही है। संयुक्त वन प्रबंधन समिति के माध्यम से स्थानीय किसानों को रासायनिक मुक्त खेती की तरफ मोड़ा जा रहा है। इसका उद्देश्य न केवल वनों का संरक्षण है बल्कि किसानों की आय और पोषण सुरक्षा को भी मजबूत करना है।

खेती को मिलेगा पर्यटन का सहारा

यह पूरा क्षेत्र अब ईको-टूरिज्म और कृषि पर्यटन के नए मॉडल के रूप में विकसित हो रहा है। देवहिल नेचर रिसॉर्ट में आने वाले पर्यटक खेतों में जैविक और परंपरागत खेती को प्रत्यक्ष रूप से देख और समझ सकेंगे। इससे एक तरफ जहां किसानों को अपने उत्पाद बेचने के नए मौके मिलेंगे, वहीं दूसरी तरफ छत्तीसगढ़ की पारंपरिक कृषि विरासत का प्रचार-प्रसार भी होगा।

सेहतमंद खेती से उपजाएंगे सेहतमंद अनाज

जैविक खेती से खेतों की उर्वरता बढ़ेगी और किसानों को रसायन मुक्त फसलों का फायदा मिलेगा। इन फसलों से तैयार खाद्य पदार्थ देवहिल नेचर रिसॉर्ट में सीधे इस्तेमाल होंगे, जिससे किसानों को बाजार की चिंता नहीं करनी पड़ेगी। इससे पर्यावरण को भी लाभ मिलेगा और स्थानीय आजीविका को भी बढ़ावा मिलेगा।

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किसानों ने उत्साह के साथ शुरू की जैविक खेती

ग्राम अचानकपुर के किसान रामसिंह बरिहा, पानसिंह बरिहा, फूलसिंह बरिहा, रामायण बरिहा समेत कई किसानों ने विष्णुभोग, दुबराज, कोदो और देसी अरहर की खेती करना शुरू कर दिया है। किसानों ने खुशी जाहिर करते हुए बताया कि वे पूरी तरह से जैविक पद्धति को अपना रहे हैं और इससे खाद्य सुरक्षा, मिट्टी की उर्वरता और परंपरागत खेती को नया जीवन मिलेगा।

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यह पहल छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता खोल रही है और साथ ही खेती के साथ पर्यटन से जुड़कर किसानों की आय को दोगुना करने की दिशा में अहम भूमिका निभा रही है।

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