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राज्य कृषि समाचार (State News)

धान छोड़ करेले की खेती से बदली किस्मत, प्रति एकड़ कमाया सवा लाख का मुनाफा

05 सितंबर 2026, महासमुंद: धान छोड़ करेले की खेती से बदली किस्मत, प्रति एकड़ कमाया सवा लाख का मुनाफा – परंपरागत धान की खेती से सीमित कमाई कर रहे महासमुंद जिले के विकासखंड बागबाहरा के ग्राम टेंगराही के किसान नारायण प्रसाद वर्मा ने करेले की व्यावसायिक खेती अपनाकर अपनी तकदीर बदल ली है।

राष्ट्रीय बागवानी मिशन के सहयोग से शुरू हुई यह पहल अब क्षेत्र के दूसरे किसानों के लिए भी नई राह बन रही है। आय बढ़ाने के लिए वर्मा ने राष्ट्रीय बागवानी मिशन वर्ष 2025-26 के तहत सब्जी क्षेत्र विस्तार योजना का लाभ लिया, जिसके तहत उन्हें 1 हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती के लिए शासन से सहायता मिली।

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग से मिला मुनाफा

खेती में नवाचार करते हुए वर्मा ने ड्रिप सिंचाई (टपक सिंचाई), प्लास्टिक मल्चिंग और आधुनिक कृषि यंत्रों का इस्तेमाल किया। इससे पानी की भारी बचत हुई और साथ ही फसल की गुणवत्ता व उत्पादन दोनों में अच्छी बढ़ोतरी दर्ज हुई।

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खरपतवार नियंत्रण पर मेहनत और लागत भी कम हुई, क्योंकि मल्चिंग शीट ने उस काम को आसान बना दिया। अच्छी देखरेख के चलते वर्मा को प्रति एकड़ करेले की फसल से करीब 12 टन उत्पादन मिला।

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बाजार में फसल का सही मूल्य मिलने पर सभी लागत और खर्च निकालने के बाद उन्हें 1 लाख 7 हजार रुपये का शुद्ध लाभ हुआ। इस सफलता से न सिर्फ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है, बल्कि आसपास के किसान भी सब्जी की व्यावसायिक खेती की तरफ आकर्षित हो रहे हैं।

छोटे किसानों के लिए सीख

वर्मा की कहानी बताती है कि सरकारी बागवानी योजनाओं का सही इस्तेमाल कर छोटे और मध्यम किसान भी परंपरागत अनाज की खेती से हटकर ज्यादा मुनाफे वाली सब्जी फसलों की तरफ बढ़ सकते हैं।

ड्रिप सिंचाई और मल्चिंग जैसी तकनीकों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाकर कम जोत वाले किसान भी सीमित जमीन में बेहतर आमदनी हासिल कर सकते हैं।

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