राज्य कृषि समाचार (State News)

अनुसूचित जाति के किसानों का मुर्गी पालन पर विशेष प्रशिक्षण संपन्न

20 मार्च 2026, टीकमगढ़अनुसूचित जाति के किसानों का मुर्गी पालन पर विशेष प्रशिक्षण संपन्न – कृषि विज्ञान केंद्र टीकमगढ़ द्वारा अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के 200 अनुसूचित जाति के किसानों के लिए उन्नत मुर्गी पालन विषय पर एक दिवसीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जिले के अनुसूचित जाति कृषकों को मुर्गी पालन के माध्यम से अतिरिक्त आय अर्जित करने और आत्मनिर्भर बनाने हेतु प्रेरित करना है। अनुसूचित जाति विकास कार्यक्रम के तहत प्रत्येक प्रशिक्षित कृषकों को मुर्गी पालने हेतु आगे एक पिंजड़ा घर एवं 20-25 अच्छी नस्ल के मुर्गियों की  प्रजातियों  के चूजे एवं भोजन आहार (आई.सी.ए.आर., भारत सरकार कुक्कुट विकास निदेशालय, हैदराबाद) द्वारा वित्तीय रूप से सहयोग प्रदान किया जायेगा।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि केंद्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं प्रमुख, डॉ. बी.एस. किरार ने अपने संबोधन में कहा कि मुर्गी पालन एक ऐसा व्यवसाय है जिसे कम लागत और कम समय में शुरू किया जा सकता है। यह न केवल ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति में सुधार लाता है, बल्कि पोषण सुरक्षा (अंडे और मांस के रूप में) भी प्रदान करता है। उन्होंने किसानों से शासन की योजनाओं का लाभ उठाकर इसे वैज्ञानिक पद्धति से अपनाने का आग्रह किया। कार्यक्रम में तकनीकी सत्र के दौरान केंद्र के वैज्ञानिक एवं परियोजना नोडल अधिकारी डॉ. आर.के. प्रजापति, जिनके प्रयास से ये योजना अपने जिले के किसानों को लाभान्वित करेगी एवं तकनीकी मार्गदर्शन में बुन्देलखण्ड क्षेत्र में वैज्ञानिक रूप से मुर्गी पालन पर व्याख्यान दिया तथा डॉ. एस.के. सिंह, डॉ. एस.के. जाटव, डॉ. आई.डी. सिंह, श्री जयपाल छिगारहा एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग, टीकमगढ़ से डॉ. एम.एस. सेंगर ने प्रशिक्षण के तकनिकी सत्र में किसानों को मुर्गी पालन की बारिकियों -नस्ल चयनरू कड़कनाथ,अशील,ग्रामप्रिया और बनराज जैसी उन्नत नस्लों का महत्व, आहार एवं आवास प्रबंधन मुर्गियों के लिए उचित शेड निर्माण और संतुलित आहार, टीकाकरण और स्वास्थ्य मुर्गियों में होने वाली प्रमुख बीमारियों (जैसे रानीखेत) से बचाव और समय पर टीकाकरण, बायो-सिक्योरिटी फार्म पर साफ-सफाई और संक्रमण रोकने के उपाय से अवगत कराया।

डॉ. सतेन्द्र कुमार ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए अपने उद्बोधन में किसानों के साथ संवाद किया और एकीकृत कृषि प्रणाली में मुर्गी पालन के महत्व को रेखांकित किया। प्रशिक्षण में शामिल हुए 200 किसानों ने इसे अपनी आजीविका के लिए एक सशक्त माध्यम बताया और वैज्ञानिक तरीके से फार्म प्रबंधन करने का संकल्प लिया। बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान के सहयोग से भी मुर्गीपालन में रूचि रखने वाले अनुसूचित जाति कृषकों के चयन हुआ तथा संस्थान के श्री वसुदेव निर्देशक बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान एवं क्षेत्रीय ग्रामीण सामाजिक कार्यकर्ता श्री कुलदीप सिंह, विनायक, नैंसी, मुमताज, रीना, दशरथ, श्यामलाल और राहुल, आदि ने कार्यक्रम में किसानों को केंद्र तक आने वापिस गाँव पहुँचने में सहयोग प्रदान किया। अंत में श्री कुलदीप सिंह बुन्देलखण्ड सेवा संस्थान द्वारा सबका आभार किया गया एवं डॉ. विजय, वैज्ञानिक आई.सी.ए.आर., भारत सरकार डी.पी.आर., हैदराबाद का विशेष आभार वियक्त किया जिनके प्रयास से यह परियोजना टीकमगढ़ जिले के लिए ली  गई ।

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