राजस्थान: राष्ट्रीय बांस मिशन पर राज्य स्तरीय सेमिनार, बांस आधारित उद्यमिता और तकनीक पर फोकस
02 अप्रैल 2026, जयपुर: राजस्थान: राष्ट्रीय बांस मिशन पर राज्य स्तरीय सेमिनार, बांस आधारित उद्यमिता और तकनीक पर फोकस – राष्ट्रीय बांस मिशन पर राज्य कृषि प्रबंध संस्थान दुर्गापुरा, जयपुर में आयोजित 2 दिवसीय सेमिनार बुधवार को संपन्न हुई। सेमिनार का उद्घाटन कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने किया था। कार्यक्रम में राज्य के 12 जिलों डूंगरपुर, बांसवाड़ा, उदयपुर, सिरोही, राजसमंद, पाली, चित्तौड़गढ़, सलूम्बर, कोटा, बारां, झालावाड़ एवं प्रतापगढ़ से लगभग 100 स्टेकहोल्डर्स ने भाग लिया।
सेमिनार में बांस को एक बहुउपयोगी, शीघ्र विकसित होने वाली तथा पर्यावरण के अनुकूल वनस्पति के रूप में रेखांकित किया गया, जो ग्रामीण आजीविका बढ़ाने, मृदा संरक्षण करने एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। केन्द्र के राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत बांस उत्पादन, प्रसंस्करण एवं उद्यमिता को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों ने बताया कि राजस्थान के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों विशेषकर दक्षिणी जिलों में बांस की खेती की अपार संभावनाएं हैं। वर्तमान में राज्य के लगभग 2.5 प्रतिशत वन क्षेत्र में बांस उपलब्ध है, जो जनजातीय क्षेत्रों की आजीविका का प्रमुख आधार है।
वर्ष 2025-26 में राष्ट्रीय बांस मिशन को नवाचार के रूप में पुनः प्रारंभ करते हुए प्रशिक्षण, अंतरराज्यीय भ्रमण, राज्य स्तरीय सेमिनार तथा उच्च तकनीक नर्सरियों की स्थापना हेतु 93.38 लाख रुपये की कार्ययोजना स्वीकृत की गई। वहीं आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में 12 जिलों में बांस नर्सरी स्थापना, पौधारोपण, कॉमन फैसिलिटी सेंटर एवं प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन हेतु 303.79 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना भारत सरकार को भेजी गई है।
संगोष्ठी के प्रमुख उद्देश्य
सेमिनार का उद्देश्य बांस खेती के प्रति जागरूकता बढ़ाना, वैज्ञानिक तकनीकों का प्रसार करना, बांस आधारित ग्रामीण उद्यमिता को प्रोत्साहित करना तथा किसानों, वैज्ञानिकों एवं अधिकारियों के बीच समन्वय स्थापित करना रहा।
सेमिनार में बांस आधारित खेती की संभावनाएं, रोपण एवं फसल प्रबंधन, जलवायु परिवर्तन में भूमिका, ग्रामीण उद्यमिता, मूल्य संवर्धन, विपणन एवं आपूर्ति श्रृंखला, कृषि वानिकी, नर्सरी विकास, कटाई उपरांत प्रबंधन तथा ई-कॉमर्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। साथ ही “राजस्थान में बांस अर्थव्यवस्था का विस्तार” विषय पर पैनल चर्चा भी आयोजित की गई।
इस आयोजन से बांस उत्पादन की वैज्ञानिक तकनीकों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपयुक्त प्रजातियों की पहचान होगी तथा बांस क्षेत्र से जुड़े हितधारकों के बीच नेटवर्किंग को मजबूती मिलेगी।
कार्यक्रम में किसान-वैज्ञानिक संवाद सत्र एवं प्रतिभागी सुझाव सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें बांस आधारित आजीविका एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने हेतु महत्वपूर्ण सुझाव प्राप्त हुए।
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