सरसों प्रदर्शन का अवलोकन एवं तकनीकी चर्चा

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15 फरवरी 2021, भोपाल। सरसों प्रदर्शन का अवलोकन एवं तकनीकी चर्चा – कृषि विज्ञान केन्द्र, टीकमगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रमुख डॉ. बी. एस. किरार, वैज्ञानिक डॉ. एस. के. सिंह, वैज्ञानिक डॉ. आर. के. प्रजापति, वैज्ञानिक डॉ. यू. एस. धाकड़ द्वारा विगत दिवस राष्ट्रीय खाद सुरक्षा मिशन योजना अंर्तगत ग्राम कारी जिला टीकमगढ़ में तिलहन फसल सरसों किस्म आर. एच. 406 का कृषकों के प्रक्षेत्रों पर लगे प्रदर्शनों का अवलोकन किया एवं उत्पादन तकनीक से अवगत कराया गया।

फसल की माहू कीट के प्रति निगरानी रखने और माहू कीट फसल में आने पर पौधों की ऊपरी कोमल शाखाओं, पत्तियों, फूलों एवं फलों से चिपक कर काला चिपचिपा पदार्थ छोड़ती है जिससे इनमें प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बधित होती है, पौधा कमजोर तथा फूल एवं फलन प्रभावित होता है इससे फसल उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

इसके उचित प्रबंधन के लिये कीटनाशक दवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एस.एल.,100 मिली. दवा या डाइमिथिएट 30 ईसी 300-400 मि.ली प्रति एकड़ की दर से 200 ली. पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। कृषि विज्ञान केन्द्र के वैज्ञानिकों ने बताया कि सरसों की खेती से मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा मिलता है सरसों की खेती के साथ मधुमक्खी पालन का व्यवसाय किया जा सकता है जिससे एक अतिरिक्त आमदानी प्राप्त की जा सकती है।

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