श्री शिवराज पहले जनसेवक, बाद में मुख्यमंत्री

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  • अशोक मनवानी
    मो.: 9425680099

03 अप्रैल 2021, भोपाल । श्री शिवराज पहले जनसेवक, बाद में मुख्यमंत्री – मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में श्री शिवराज सिंह चौहान के विभिन्न कार्यकालों पर नजर डालें तो हम पाते हैं कि प्रत्येक कार्यकाल विशेष रहा है। प्रथम कार्यकाल में उन्होंने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, लाड़ली लक्ष्मी योजना, विद्यार्थियों को विद्यालय जाने के लिए सायकिल प्रदाय जैसे कल्याणकारी कार्य प्रारंभ किये। बुनियादी क्षेत्रों में सुविधाएँ बढ़ाने की ठोस पहल की। श्री चौहान का मुख्यमंत्री पद का पहला कार्यकाल तीन वर्ष का था। द्वितीय और तृतीय कार्यकाल पाँच-पाँच वर्ष के रहे। इन दस वर्षों में मध्यप्रदेश ने विकास के नये आयाम छुए। श्री शिवराज सिंह चौहान का वर्तमान कार्यकाल भी सक्रियता से परिपूर्ण है।

श्री शिवराज सिंह चौहान मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में पृथक छवि निर्मित करने मेें सफल रहे हैं। उन्होंने इस पद की गरिमा को बढ़ाया है। आज अनेक योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्यप्रदेश के अग्रणी रहने का श्रेय उन्हें ही है। मध्यप्रदेश के गठन के बाद जनता के कल्याण के लिए सबसे अधिक अवधि के मुख्यमंत्री के रूप में ही नहीं जनता के मुख्यमंत्री के तौर पर शिवराज जी की छवि बनी है। उन्होंने हर कार्यकाल में यादगार कार्य किए हैं, जिनसे विकास के नए-नए आयाम सामने आए हैं।

मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री चौहान सबसे अधिक लोकप्रिय राजनेता के रूप में जाने जाते हैं। इसके पीछे उनका कठोर परिश्रम, स्व-अनुशासन, परोपकार का भाव, करूणा से ओत-प्रोत व्यक्तित्व और रागद्वेष के बिना हर तबके की भलाई के लिए तेजी से कार्य करने की विशिष्ट शैली प्रमुख कारण हैं। श्री शिवराज सिंह चौहान के लिए सामाजिक और राजनैतिक संस्थाएँ उपयोगी मंच बनी हैं। इन संस्थाओं को शिवराज जी की नेतृत्व क्षमता से बल मिला है। प्रत्येक दायित्व को निष्ठा से निभाते हुए वे संस्था और समाज में अलग पहचान बनाने में सफल हुए।

मुख्यमंत्री श्री चौहान ने वर्ष दर वर्ष निरंतर जन-कल्याण के अभियान को गति दी। मुख्यमंत्री श्री चौहान दृढ़ संकल्प का परिचय देते हैं। मध्यप्रदेश में औद्योगिक निवेश बढ़ाने के लिए उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री बनते ही इसके प्रयत्न प्रारंभ किए थे। मध्यप्रदेश में विभिन्न क्षेत्रों में उद्योगों के विकास की व्यापक संभावनाओं को साकार करने के लिए उद्योगपतियों से सतत सम्पर्क आवश्यक था। इसके लिए की गईं इन्वेस्टर्स समिट बहुत लाभकारी सिद्ध हुईं। मध्यप्रदेश में न सिर्फ नया निवेश आया बल्कि लाखों नौजवानों को रोजगार भी मिला। प्रदेश की प्रतिभा का पलायन भी रूका।

मार्च 2020 में मध्यप्रदेश के चौथी बार मुख्यमंत्री बनने के बाद पिछले 11-12 माह न सिर्फ मध्यप्रदेश के लिए बल्कि पूरे देश और विश्व के लिए भी कुछ अर्थों में महत्वपूर्ण रहे हैं। कोरोना महामारी ने जब पैर फैलाए, तब इस संकट के समय नेतृत्व की परीक्षा भी हुई। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने साहस के साथ इस महामारी के आने के बाद आवश्यक फैसले लिए, उसका ही प्रतिरूप श्री चौहान भी बने। महामारी के नियंत्रण, संक्रमित लोगों के उपचार, महामारी से बचने के लिए उपयोगी उपायों पर अमल, भावी कार्य-योजना और मनोवैज्ञानिक रूप से नागरिकों को संबल प्रदान करके बहुत मायने रहे। मुख्यमंत्री शिवराज जी ने स्वयं न घबराते हुए कोरोना संकट को समाधान में बदलने का प्रयास किया। आपदा को अवसर में बदला। अनेक वर्गों के लिए सरकार का खजाना खोल दिया। कई तरह की राहत दी गईं। किसानों, विद्यार्थियों और श्रमिकों को योजनाओं का पैसा ऑनलाइन अंतरित किया गया जनता को कोरोना से बचाव के प्रति जागरूक करने का कार्य भी वे एक वर्ष से निरंतर कर रहे हैं। स्वयं भी मास्क के उपयोग और सोशल डिस्टेसिंग के पालन का उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

मध्यप्रदेश में रोग संक्रमण की नियमित समीक्षा के समय उन्होंने विभिन्न नगरों और कस्बों के मोहल्लों के नाम तक याद कर लिए थे। मुख्यमंत्री श्री चौहान ने राजनीति को सदैव सेवा का माध्यम माना है। मुख्यमंत्री के विभिन्न कार्यकाल की चर्चा करें तो यह बात स्पष्ट तौर पर सामने आती है कि मुख्यमंत्री श्री चौहान ने बुनियादी क्षेत्रों के विकास को सदैव केन्द्र में रखा है।

श्री चौहान ने प्रथम कार्यकाल में सड़क निर्माण को प्राथमिकता दी। द्वितीय कार्यकाल में सिंचाई बढ़ाने का कार्य प्रमुखता से किया गया। इसके पश्चात तृतीय कार्यकाल में विद्युत उत्पादन बढ़ाने और उसके सुचारु प्रदाय पर ध्यान दिया गया। मार्च 2020 से प्रारंभ अपने चतुर्थ मुख्यमंत्री कार्यकाल में श्री चौहान ने स्वास्थ्य, शिक्षा और पेयजल की सुविधाएँ तेजी से बढ़ाने का निश्चय किया है। । आत्म-निर्भर मध्यप्रदेश का रोडमैप बनाकर अमल किया जा रहा है।मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान स्वयं को जनता का सेवक मानते हैं। वे अपने संबोधनों में स्पष्ट रूप से कहते हैं कि मध्यप्रदेश मेरे लिए एक मंदिर के समान है, यहाँ की जनता मेरे लिए भगवान की तरह है। इस मंदिर का पुजारी शिवराज सिंह चौहान है । जनता से सीधे जुड़कर ही उन्होंने यह स्थिति अर्जित की है ।

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